दक्षिण भारत के तमिलनाडु में मौसम का मिजाज पूरी तरह बिगड़ चुका है और बंगाल की खाड़ी से उठ रहे चक्रवाती तूफान के पहुंचने से पहले ही भारी वर्षा ने हाहाकार मचा दिया है। नीलगिरि जिले में लगातार हो रही बारिश के कारण मोयार नदी उफान पर आ गई है। सोमवार 26 अक्टूबर 22 को बाढ़ आने के बाद तेंगुमारहाडा गांव का बाहरी इलाकों से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, जिसके चलते वहां रहने वाले लोगों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इस गंभीर स्थिति के कारण गांव के भीतर भोजन, जरूरी दवाइयों और अन्य जीवनोपयोगी वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर स्थानीय निवासियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इसके साथ ही कई जगहों पर हुए भूस्खलन ने हालात को और अधिक डरावना बना दिया है।
घने जंगलों के बीच फंसा तेंगुमारहाडा गांव
भौगोलिक स्थिति के अनुसार कोटागिरी तालुक के अंतर्गत आने वाला यह दूरदराज का तेंगुमारहाडा गांव घने जंगलों के बीच बसा हुआ है और यह सत्यमंगलम तथा मुदुमलाई बाघ अभयारण्यों के बिल्कुल करीब स्थित है। यहां के स्थानीय निवासियों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों और आवश्यक सेवाओं को पाने के लिए अमूमन नदी पार करके ही बाहर आना-जाना पड़ता है। बीते कुछ दिनों से लगातार बरस रहे बादलों के कारण इस पूरे इलाके में मोयार नदी का जलस्तर तेजी से ऊपर उठ गया है। सोमवार के दिन इस नदी में मटमैले और लाल रंग के पानी का बहुत तेज बहाव साफ तौर पर देखा गया। ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में इस जानलेवा पानी को पार करना किसी खतरे से खाली नहीं है, इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के तहत नदी के रास्ते होने वाले सभी प्रकार के आवागमन को रोक दिया गया है।
पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का तांडव
इस बीच पूरे पहाड़ी जिले में पिछले 24 घंटों के भीतर भूस्खलन की 60 से अधिक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। इन तमाम घटनाओं में मिट्टी के खिसकने की छोटी-मोटी वारदातों से लेकर बड़े पैमाने पर विशाल पहाड़ियों के दरक जाने जैसे खतरनाक हादसे भी शामिल हैं। इसी तरह की एक बड़ी भूस्खलन की घटना में शुक्रवार के दिन 51 साल के एक सरकारी बस ड्राइवर जनगराज की जान चली गई थी। वह मेट्टुपालयम-कुन्नूर पहाड़ी मार्ग पर परलियार के पास हुए भीषण लैंडस्लाइड की चपेट में आ गए थे। लगातार बरस रहे पानी के कारण पहाड़ों की ढलानें बेहद कमजोर और अस्थिर हो चुकी हैं, जिससे आने-जाने वाले लोगों के लिए हादसों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
रेलवे सेवाएं और यातायात पर पड़ा असर
पहाड़ों के दरकने और मलबे के ढलने की वजह से नीलगिरि माउंटेन रेलवे की आवाजाही पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। रेलवे पटरियों के ऊपर भारी मात्रा में मलबा जमा हो जाने की वजह से कुन्नूर-मेट्टुपालयम रेल खंड पर ट्रेनों का संचालन फिलहाल अस्थायी तौर पर रोक दिया गया है। इसके अलावा मेट्टुपालयम-कुन्नूर मार्ग पर यातायात पूरी तरह बाधित होने की वजह से अब सभी वाहनों को वैकल्पिक रास्ते के रूप में कोटागिरी के माध्यम से भेजा जा रहा है। स्थानीय जिला प्रशासन और अग्निशमन एवं बचाव सेवा के तमाम कर्मचारी प्रभावित क्षेत्रों में मुस्तैदी के साथ राहत तथा बचाव अभियानों में जुटे हुए हैं। सड़कों पर फैले हुए मलबे और कीचड़ को हटाने का काम तेजी से किया जा रहा है। जिला कलेक्टर ने आम नागरिकों और पर्यटकों से साफ तौर पर यह अपील की है कि जब तक मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, वे पहाड़ी सड़कों पर किसी भी तरह की फालतू यात्रा करने से बचें। किसी भी प्रकार की आपातकालीन सहायता की जरूरत पड़ने पर लोग जिला नियंत्रण कक्ष के अधिकृत नंबर 1077 और 0423-2450024 पर संपर्क कर सकते हैं।



















