राजस्थान के प्रमुख जलाशयों में शामिल बीसलपुर बांध में पानी की नई आवक शुरू होने से पेयजल आपूर्ति को लेकर एक बार फिर बड़ी उम्मीद जगी है। भीलवाड़ा, राजसमंद और चित्तौड़गढ़ जिलों के जलभराव यानी कैचमेंट इलाकों में हाल में हुई जोरदार बारिश के कारण त्रिवेणी नदी तेज बहाव के साथ बह रही है। नदी में 3.70 मीटर का गेज दर्ज किया गया है, जिसके सीधे प्रभाव से बीते 48 घंटों में बीसलपुर बांध के जलस्तर में 25 सेंटीमीटर से अधिक का उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। इस जल आवक से जयपुर, अजमेर और टोंक जिलों की बड़ी आबादी को पानी की उपलब्धता को लेकर भारी राहत मिली है।
बीसलपुर बांध का वर्तमान जलस्तर और भराव क्षमता
इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार बीसलपुर बांध की कुल भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर तय की गई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, बीते गुरुवार शाम की स्थिति तक बांध का जलस्तर बढ़कर 313.82 आरएल मीटर के स्तर तक पहुंच गया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बांध अभी अपनी पूर्ण भराव सीमा से मात्र 1.68 मीटर नीचे बना हुआ है। प्रतिशत के लिहाज से देखा जाए तो वर्तमान में यह जलाशय अपनी कुल क्षमता का लगभग 70 फीसदी तक भर चुका है। चूंकि त्रिवेणी नदी का तेज बहाव अभी भी जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में जलस्तर में निरंतर बढ़ोतरी दर्ज होने की पूरी संभावना बनी हुई है।
मानसून की धीमी चाल और ओवरफ्लो का गणित
इस साल मानसून सीजन के शुरुआती दौर में बीसलपुर के मुख्य कैचमेंट क्षेत्रों भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर और बेंगू में उम्मीद के मुताबिक बारिश दर्ज नहीं की गई थी। कम वर्षा होने की वजह से सीजन के शुरुआती हफ्तों में बांध में पानी की आवक बेहद सुस्त बनी रही। मानसून चक्र के 74 दिन पूरे हो चुके हैं और अब इस सीजन के करीब 35 दिन ही बाकी बचे हैं। मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, अगले लगभग दो हफ्तों तक मानसून की गतिविधियां धीमी रहने की संभावना है। बांध को पूरी तरह लबालब होकर छलकने के लिए अभी भी लगभग 300 एमक्यूएम पानी की और दरकार है, जिसके चलते अगस्त के अंत तक इसके पूर्ण भराव की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।
वर्ष 1996 से अब तक 8 बार ओवरफ्लो का रिकॉर्ड
वर्ष 1996 में बनकर तैयार हुए बीसलपुर बांध का ऐतिहासिक सफर काफी दिलचस्प रहा है। अपने निर्माण के बाद से अब तक यह बांध कुल 8 बार अपनी भराव क्षमता पार कर ओवरफ्लो हुआ है। इतिहास के पन्नों के अनुसार, पहली बार वर्ष 2004 में इसके गेट खोलकर पानी की निकासी की गई थी। इसके बाद वर्ष 2006, 2014, वर्ष 2016 में दो बार, तथा वर्ष 2022 और वर्ष 2024 में भी यह बांध पूरी तरह छलक उठा था। ऐतिहासिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि बांध के गेट सबसे ज्यादा 6 बार अगस्त महीने में ही खोले गए हैं, जबकि सितंबर में 1 बार और जुलाई में 1 बार गेट खोले गए थे। पिछले साल अच्छी बारिश के बल पर जुलाई में ही गेट खोलने पड़े थे, जबकि इस बार स्थिति अलग बनी हुई है।
जयपुर, अजमेर और टोंक के 1 करोड़ लोगों की लाइफलाइन
बीसलपुर जलाशय सिर्फ एक बांध नहीं, बल्कि जयपुर, अजमेर और टोंक जिलों के लिए जीवन रेखा के समान है। इस बांध से प्रतिदिन लगभग 1100 एमएलडी पेयजल शोधित करके इन प्रमुख शहरों और आसपास के कस्बों में भेजा जाता है। इस व्यवस्था पर करीब 1 करोड़ लोगों की दैनिक पेयजल जरूरतें टिकी हुई हैं। जल संसाधन विशेषज्ञों के अनुसार, बांध में वर्तमान में जितना पानी एकत्रित हो चुका है, वह इन तीनों जिलों की पूरे 1 साल की पेयजल आपूर्ति के लिए पर्याप्त है। ऐसे में त्रिवेणी से हो रही ताजा आवक ने आने वाले महीनों के लिए जल संकट की हर आशंका को दूर कर दिया है।





















