राजस्थान के चूरू जिले में कम उम्र में विवाह और उससे जुड़े गंभीर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न का एक दर्दनाक मामला सामने आया है। बीकानेर जिले की रहने वाली दो नाबालिग सगी बहनों को चूरू के रतनगढ़ तहसील स्थित कांगड़ गांव में उनके ससुराल से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। पीड़ितों को पिछले लगभग डेढ़ साल से उनके ससुराल वाले लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। स्थिति तब अत्यधिक गंभीर हो गई जब बुधवार सुबह उनकी सास ने कथित तौर पर दोनों के साथ मारपीट की और उनके हाथों पर ब्लेड से कट लगा दिए। इस घटना के तुरंत बाद हरकत में आई संयुक्त टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों बहनों को बचाकर अपनी देखरेख में ले लिया है।
प्रशासनिक टीमों का संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की जानकारी सामने आते ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की चाइल्ड हेल्प लाइन, मानव तस्करी विरोधी यूनिट तथा कालिका पेट्रोलिंग टीम ने एक साझा ऑपरेशन की योजना बनाई। तीनों एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने तुरंत कांगड़ गांव स्थित उस मकान पर दबिश दी जहां दोनों बहनों को बंद रखा गया था। मौके पर पहुंची टीम ने बिना किसी देरी के दोनों बालिकाओं को ससुराल वालों के कब्जे से निकाला और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। चाइल्ड हेल्प लाइन के परियोजना अधिकारी पन्ने सिंह ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि दोनों बच्चियों को फिलहाल पूरी सुरक्षा में रखा गया है और उनकी गहन काउंसलिंग की जा रही है।
छह बेटियों के बोझ के चलते जून 2024 में हुआ था बाल विवाह
प्रारंभिक पड़ताल में इस दुखद बाल विवाह की वजह पारिवारिक परिस्थितियां बताई गई हैं। पीड़ितों के पिता की कुल छह बेटियां हैं, और परिवार पर आर्थिक व सामाजिक दबाव के कारण उन्होंने अपनी दो छोटी बेटियों की कम उम्र में ही शादी करने का फैसला कर लिया था। जून 2024 में दोनों बहनों का विवाह चूरू जिले के कांगड़ गांव में करा दिया गया था। विवाह के समय बड़ी बहन केवल 11वीं कक्षा में पढ़ रही थी, जबकि छोटी बहन 9वीं कक्षा की छात्रा थी। शादी होते ही दोनों बच्चियों को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी और उन्हें हमेशा के लिए ससुराल भेज दिया गया, जिससे उनका शैक्षणिक भविष्य पूरी तरह तबाह हो गया।
उम्र का बड़ा फासला और ससुराल में प्रताड़ना की शुरुआत
इस मामले में उम्र का असमान अंतर भी सामने आया है। शादी के समय बड़ी नाबालिग बहन का विवाह 32 वर्षीय पुरुष से कराया गया था, जबकि 9वीं कक्षा में पढ़ने वाली छोटी बहन की शादी 26 वर्ष के युवक के साथ हुई थी। विवाह संपन्न होने के लगभग छह महीने बाद ही ससुराल पक्ष का व्यवहार पूरी तरह बदल गया। दोनों बहनों पर घरेलू काम का भारी दबाव बनाया जाने लगा और छोटी-छोटी गलतियों पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। रोजाना डांट-डपट, बेइज्जती और गाली-गलौज उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन गई। धीरे-धीरे यह मौखिक प्रताड़ना गंभीर शारीरिक हिंसा में बदल गई।
बेल्ट से पिटाई और ब्लेड से हमले के बाद मिली मदद
पीड़ित बहनों द्वारा दिए गए बयानों के अनुसार, ससुराल में उन्हें नियमित रूप से चमड़े के बेल्ट से पीटा जाता था। बुधवार की सुबह प्रताड़ना की तमाम हदें पार हो गईं जब उनकी सास ने मामूली बात पर झगड़ा शुरू कर दिया और दोनों बहनों की बेरहमी से पिटाई की। आरोप है कि सास ने एक तेजधार ब्लेड उठाकर दोनों बालिकाओं के हाथों पर गहरे कट लगा दिए। इस खौफनाक हमले के बाद किसी तरह यह सूचना चाइल्ड हेल्प लाइन तक पहुंचाई गई। सूचना दर्ज होते ही बाल संरक्षण एजेंसियों और पुलिस टीमों ने बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंचकर दोनों बच्चियों को बचा लिया।
बाल कल्याण समिति के समक्ष होगी पेशी और आगे का कानूनी कदम
सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किए जाने के बाद वर्तमान में विशेषज्ञों द्वारा दोनों पीड़ित बहनों की काउंसलिंग की जा रही है, ताकि वे इस भयावह मानसिक आघात से उबर सकें। अधिकारियों के अनुसार काउंसलिंग की प्रक्रिया पूर्ण होते ही दोनों बालिकाओं को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद बाल कल्याण समिति द्वारा दिए जाने वाले निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यह घटना एक बार फिर उजागर करती है कि कम उम्र में विवाह कराने से बच्चों का स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और पूरा जीवन किस तरह संकट में पड़ जाता है।



















