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राजस्थान में वोटिंग से पहले थमेगा शोर, जानिए किस दिन बंद होगा चुनाव प्रचार और कब पड़ेंगे वोटराजस्थान
6 सित॰ 2026, 6:59 pm (18 दिन पहले)· 2

राजस्थान में वोटिंग से पहले थमेगा शोर, जानिए किस दिन बंद होगा चुनाव प्रचार और कब पड़ेंगे वोट

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में मतदान से ठीक 48 घंटे पहले प्रचार पूरी तरह थम जाएगा, पहले चरण की वोटिंग 9 सितंबर को और दूसरे चरण की 11 सितंबर को होगी, नतीजे 14 सितंबर को आएंगे.

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में अब वोटिंग से ठीक पहले वाला सन्नाटा छाने वाला है. हफ्तों से गली-मोहल्लों में गूंज रहे लाउडस्पीकर, रैलियां और घर-घर जाकर वोट मांगने का सिलसिला थमने जा रहा है. इसके बाद फैसला सिर्फ मतदाता के हाथ में रहेगा, जो अकेले बूथ के भीतर अपनी पसंद तय करेगा.

दो चरण, नतीजा एक ही दिन

इस चुनाव में राजस्थान के 309 नगरीय निकायों में पार्षद चुने जाने हैं, जिनके लिए राज्यभर में कुल 10,245 वार्डों में वोटिंग होनी है. इतने बड़े पैमाने की वजह से मतदान को दो अलग-अलग चरणों में बांटा गया है. पहले चरण का मतदान 9 सितंबर को होगा, जबकि दूसरा चरण 11 सितंबर को होगा. दोनों ही दिन मतदान केंद्र सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक खुले रहेंगे. दोनों चरणों की वोटिंग पूरी होने के बाद सभी वोटों की गिनती एक साथ 14 सितंबर को होगी, जिस दिन हर उम्मीदवार की किस्मत का फैसला सामने आ जाएगा.

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पहला चरण: अलवर, भरतपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा और जयपुर जिला

9 सितंबर को होने वाले पहले चरण में 162 नगरीय निकायों के 5,425 वार्डों में मतदान होगा. इस चरण में अलवर, भरतपुर, बीकानेर और भीलवाड़ा जिले शामिल हैं, साथ ही जयपुर जिले के अंदर आने वाली 18 स्थानीय निकाय भी इसी चरण का हिस्सा हैं. निर्वाचन आयोग के नियम के मुताबिक, जहां भी मतदान होना है वहां वोटिंग से ठीक 48 घंटे पहले प्रचार पूरी तरह बंद करना जरूरी है, यानी इन इलाकों में चुनाव प्रचार 7 सितंबर की शाम 6 बजे थम जाएगा. इसी समय से इन क्षेत्रों में 'ड्राई डे' भी लागू हो जाएगा, जिसके तहत 7 सितंबर शाम 6 बजे से लेकर 9 सितंबर शाम 6 बजे तक शराब की बिक्री और सप्लाई पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी.

दूसरा चरण: जयपुर, जोधपुर समेत राज्य के बड़े नगर निगम

11 सितंबर को होने वाला दूसरा चरण आकार में बड़ा और ज्यादा अहम माना जा रहा है, इसमें 147 नगरीय निकायों के 4,820 वार्डों में वोटिंग होगी. इसी चरण में राजस्थान के सबसे बड़े नगर निगम भी शामिल हैं, जिनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और पाली प्रमुख हैं. राजधानी जयपुर की बात करें तो यहां के सभी 150 वार्डों में मतदान 11 सितंबर को ही होगा, इसलिए जयपुर शहर में चुनाव प्रचार दो दिन पहले यानी 9 सितंबर की शाम 6 बजे ही थम जाएगा. यहां भी वही 48 घंटे का मौन काल और ड्राई डे के नियम पहले चरण जितनी ही सख्ती से लागू रहेंगे.

48 घंटे की खामोशी में क्या-क्या नहीं हो सकता

प्रचार थमने के बाद के ये 48 घंटे पूरी चुनावी प्रक्रिया का सबसे संवेदनशील और सबसे ज्यादा निगरानी वाला समय माने जाते हैं. इस दौरान किसी भी तरह की सार्वजनिक सभा, रैली या जुलूस निकालने की इजाजत नहीं होती. उम्मीदवार और पार्टियां लाउडस्पीकर या किसी और माध्यम से सीधे जनसंपर्क भी नहीं कर सकतीं. मतलब, वोटर को सीधे या घुमा-फिराकर प्रभावित करने वाली हर सार्वजनिक गतिविधि पर मतदान पूरा होने तक पूरी तरह रोक लग जाती है.

अब असली परीक्षा वोटर की खामोशी में

प्रचार का शोर थमते ही नेताओं के तमाम वादे, दावे और जवाबी दावे अपनी असली परीक्षा से गुजरते हैं, वह भी किसी मंच पर नहीं बल्कि हर वोटर के मन के भीतर. जो मंच कुछ दिन पहले तक नेताओं की आवाज से गूंज रहे थे, वे अब खामोश हो जाते हैं और किसी भी पार्टी के पास जनता को रिझाने के लिए आखिरी वक्त पर कोई नया दांव नहीं बचता. इस लगाई गई खामोशी में हर वोटर अकेले तय करता है कि उसे किस पर भरोसा करना है, किसे अपना नुमाइंदा बनाना है और किससे अपने वार्ड के विकास का हिसाब मांगना है.

राजस्थान के नगर निकाय चुनावों का यह हाई-वोल्टेज प्रचार अब अपने आखिरी पड़ाव की तरफ बढ़ चुका है और मुकाबला उम्मीदवारों के हाथ से निकलकर पूरी तरह वोटर के हाथ में आ गया है. 14 सितंबर को वोटों की गिनती के बाद ही यह तय हो पाएगा कि किसकी रणनीति काम आई और जनता ने किसे घर बिठा दिया.

सवाल-जवाब

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में वोटिंग कब-कब होगी?
वोटिंग दो चरणों में होगी, पहला चरण 9 सितंबर को और दूसरा चरण 11 सितंबर को.
मतदान केंद्र किस समय खुलेंगे और बंद होंगे?
दोनों दिन मतदान केंद्र सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक खुले रहेंगे.
वोटों की गिनती कब होगी?
दोनों चरणों के वोटों की गिनती 14 सितंबर को होगी.
पहले चरण में कौन से इलाके शामिल हैं?
पहले चरण में 162 नगरीय निकायों के 5,425 वार्ड शामिल हैं, जिनमें अलवर, भरतपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा और जयपुर जिले की 18 स्थानीय निकाय हैं.
दूसरे चरण में कौन से बड़े शहर हैं?
दूसरे चरण में 147 नगरीय निकायों के 4,820 वार्ड शामिल हैं, जिनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर और पाली के नगर निगम आते हैं.
जयपुर शहर में चुनाव प्रचार कब थमेगा?
जयपुर के सभी 150 वार्डों में वोटिंग 11 सितंबर को होने के कारण यहां प्रचार 9 सितंबर की शाम 6 बजे थम जाएगा.
48 घंटे के मौन काल में क्या प्रतिबंधित रहता है?
इस दौरान सार्वजनिक सभा, रैली, जुलूस और लाउडस्पीकर प्रचार पर रोक रहती है, और वोटर को सीधे या परोक्ष रूप से प्रभावित करने वाली कोई भी सार्वजनिक गतिविधि नहीं हो सकती.
'ड्राई डे' क्या होता है और कब लागू रहेगा?
यह वह अवधि है जिसमें शराब की बिक्री और वितरण पूरी तरह बंद रहता है, जो हर चरण में मतदान से दो दिन पहले शाम 6 बजे से शुरू होकर मतदान वाले दिन शाम 6 बजे तक लागू रहती है.
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

नगर निकाय चुनावों में प्रचार थमने के बाद के 48 घंटे कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से सबसे संवेदनशील होते हैं। इस दौरान निर्वाचन आयोग के 'मौन काल' और 'ड्राई डे' के नियमों का कड़ाई से पालन कराना पुलिस प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती होती है। गैर-कानूनी तरीके से मतदाताओं को प्रभावित करने, धनबल के इस्तेमाल या असामाजिक तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भारी पुलिस बल और खुफिया तंत्र पूरी तरह मुस्तैद रहता है ताकि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित किया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

नगरीय निकाय चुनावों में इतने बड़े पैमाने पर वार्डवार मतदान और दो चरणों की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय स्तर पर बूथ प्रबंधन सबसे अहम कड़ी होता है। प्रचार थमने के बाद राजनीतिक दलों का पूरा जोर घर-घर संपर्क और सूक्ष्म स्तर की गोलबंदी पर रहता है, जिससे प्रशासनिक मशीनरी और चुनाव आयोग के मैदानी अमले के लिए इस मौन काल में निगरानी रखना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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