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रेल लाइनों के विस्तार में 17 गुना उछाल, छत्तीसगढ़ में सड़क और गांव कनेक्टिविटी भी मजबूतछत्तीसगढ़
7 सित॰ 2026, 3:57 pm (18 दिन पहले)· 2

रेल लाइनों के विस्तार में 17 गुना उछाल, छत्तीसगढ़ में सड़क और गांव कनेक्टिविटी भी मजबूत

2014 के बाद छत्तीसगढ़ में रेल लाइन बिछाने की रफ्तार करीब 17 गुना बढ़ी है, साथ ही हजारों किलोमीटर नए हाईवे, ग्रामीण सड़कें और भारतनेट के जरिए गांवों तक इंटरनेट पहुंचाने का काम भी तेज हुआ है।

छत्तीसगढ़ में सड़क, रेल पटरी और गांव तक पहुंचने वाली कनेक्टिविटी की रफ्तार 2014 के बाद के वर्षों में पहले के मुकाबले काफी तेज हो गई है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सड़क, रेल, ग्रामीण सड़क और इंटरनेट, हर मोर्चे पर पिछले एक दशक में निर्माण और निवेश दोनों ने रफ्तार पकड़ी है।

अप्रैल 2014 से अब तक राज्य में 3,389 किलोमीटर से ज्यादा लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जा चुके हैं। भारतमाला परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ को 471 किलोमीटर हाईवे प्रोजेक्ट्स आवंटित हुए हैं, जिनमें से 291 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। ये परियोजनाएं राज्य से गुजरने वाले बड़े सड़क गलियारों को चौड़ा और मजबूत बनाने की कोशिश का हिस्सा हैं।

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रेल लाइन बिछाने की रफ्तार करीब 17 गुना बढ़ी

सबसे बड़ा उछाल रेलवे के आंकड़ों में नजर आता है। 2009 से 2014 के बीच छत्तीसगढ़ में हर साल औसतन सिर्फ 6.4 किलोमीटर नई पटरी बिछाई जाती थी। वहीं 2014 से 2026 के बीच यह सालाना औसत बढ़कर 109 किलोमीटर से ज्यादा हो गया, यानी करीब 17 गुना की छलांग। इन दोनों अवधियों के बीच का यह फासला बताता है कि 2014 के बाद रेल निर्माण की गतिविधियों ने कितनी तेजी पकड़ी। इसी 2014-2026 अवधि में राज्य में कुल मिलाकर 1,311 किलोमीटर नई रेल लाइन चालू की जा चुकी है।

रेलवे के लिए मिलने वाला सालाना बजट भी उसी अनुपात में बढ़ा है। 2009-14 के दौरान छत्तीसगढ़ के लिए औसत वार्षिक आवंटन करीब 311 करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर करीब 7,470 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। इसके अलावा मार्च 2023 में राज्य के पूरे ब्रॉडगेज नेटवर्क का बिजलीकरण भी पूरा कर लिया गया, यानी अब इन रूटों पर ट्रेनें बिजली से चलती हैं, डीजल इंजन पर निर्भरता खत्म हो गई है।

गांव-गांव तक पहुंचीं सड़कें, हजारों बस्तियां जुड़ीं

हाईवे और रेल के अलावा गांव की सड़कों पर भी काफी काम हुआ है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत छत्तीसगढ़ में अब तक 44,828 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें पूरी हो चुकी हैं, जिससे 10,691 बस्तियों को सड़क कनेक्टिविटी मिल पाई है। मकसद यह है कि दूरदराज की बस्तियों को नजदीकी कस्बों और बाजारों तक हर मौसम में आने-जाने लायक पक्का रास्ता मिल सके।

अब गांव डिजिटल हाईवे से भी जुड़ रहे हैं

छत्तीसगढ़ में कनेक्टिविटी की कहानी अब सिर्फ सड़क और पटरी तक सीमित नहीं रह गई है। भारतनेट योजना के जरिए गांवों को इंटरनेट से जोड़ने का काम भी तेज हुआ है। अगस्त 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ की 11,682 ग्राम पंचायतों को संशोधित भारतनेट योजना के तहत कवर करने की योजना है, जबकि 8,328 गांवों में मांग आधारित यानी जरूरत पड़ने पर इंटरनेट कनेक्शन देने का प्रावधान रखा गया है। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि मुख्य भारतनेट रोलआउट से बाहर रह गए गांव भी बाद में कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकें।

कुल मिलाकर, पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी सिर्फ किलोमीटर के आंकड़ों में नहीं बदली है। बल्कि गांव से कस्बे, कस्बे से राजधानी और राज्य से देश के बड़े आर्थिक केंद्रों तक पहुंचना पहले के मुकाबले कहीं आसान हो गया है।

सवाल-जवाब

2014 से 2026 के बीच छत्तीसगढ़ में कुल कितनी नई रेल लाइन चालू हुई?
इस अवधि में कुल 1,311 किलोमीटर नई रेल लाइन चालू की गई।
रेल लाइन बिछाने की सालाना रफ्तार कितनी बढ़ी?
2009-14 के 6.4 किलोमीटर प्रति वर्ष से बढ़कर 2014-2026 में 109 किलोमीटर से ज्यादा प्रति वर्ष हो गई, यानी करीब 17 गुना।
भारतमाला परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ को कितने किलोमीटर हाईवे मिले हैं?
471 किलोमीटर हाईवे प्रोजेक्ट अवार्ड हुए हैं, जिनमें से 291 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है।
PMGSY के तहत छत्तीसगढ़ में कितनी ग्रामीण सड़कें बनीं और कितनी बस्तियां जुड़ीं?
44,828 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें पूरी हो चुकी हैं, जिससे 10,691 बस्तियां सड़क से जुड़ी हैं।
भारतनेट के तहत छत्तीसगढ़ में कितनी ग्राम पंचायतें कवर होने वाली हैं?
अगस्त 2026 के अपडेट के मुताबिक 11,682 ग्राम पंचायतें संशोधित भारतनेट के तहत कवर होंगी, जबकि 8,328 गांवों में ऑन-डिमांड कनेक्टिविटी का प्रावधान है।
छत्तीसगढ़ के पूरे रेल नेटवर्क का बिजलीकरण कब पूरा हुआ?
मार्च 2023 में छत्तीसगढ़ के पूरे ब्रॉडगेज रेल नेटवर्क का बिजलीकरण पूरा हो गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

छत्तीसगढ़ में बुनियादी ढांचे का यह विकास केवल परिवहन को सुगम नहीं बना रहा, बल्कि दूरदराज के आदिवासी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आर्थिक व सामाजिक एकीकरण की नई जमीन तैयार कर रहा है। रेलवे के बजट आवंटन में भारी बढ़ोतरी और शत-प्रतिशत विद्युतीकरण यह संकेत देते हैं कि लॉजिस्टिक्स की लागत कम होने से राज्य में औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर तेजी से पैदा हो सकते हैं, जिसका असर आगामी चुनावों और क्षेत्रीय राजनीति पर भी गहरा होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

छत्तीसगढ़ के इन अंदरूनी इलाकों में बेहतर रेल और सड़क नेटवर्क का सीधा असर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी पड़ेगा। सुरक्षा बलों की आवाजाही आसान होने से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियानों और राहत कार्यों में तेजी आएगी, साथ ही अदालती और प्रशासनिक तंत्र की पहुंच भी दूरदराज के गांवों तक अधिक प्रभावी होगी।

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