धनतेरस पर 15 सालों में 362% उछला सोना, अगले साल 1.71 लाख रुपये तक जाने का अनुमानरूसी तेल प्रतिबंध कानून पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान, ओवल ऑफिस में दिए संकेतराजस्थान SET 2026 के नतीजे घोषित, 93 फीसदी से ज्यादा परीक्षार्थी हुए असफलऊर्जा महंगाई से बढ़ेंगी वेतन मांगें, दिसंबर बैठक से पहले ECB के अर्थशास्त्री फिलिप लेन ने दिए संकेतअमेरिकी मध्यवधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत के बाद बिटकॉइन और क्रिप्टो नियमों में आ सकता है बड़ा बदलावसोमनाथ मंदिर के पास नॉनवेज बैन पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- दिवाली पर खाइए मिठाईहिसार की कंशिका ने सीए फाउंडेशन परीक्षा में लहराया परचम, पूरे देश में हासिल किया पहला स्थानहिमाचल प्रदेश में दीपावली को लेकर अग्निशमन विभाग मुस्तैद, कर्मचारियों के अवकाश किए गए रद्दउदयपुर के रवि कंधारी के पास है 108 ब्रिटिशकालीन बाइकों का म्यूजियम, सोने-चांदी से सजी इन मशीनों की कीमत 5000 करोड़उत्तराखंड के बागेश्वर में तैयार होता है खास पहाड़ी शहद, नवंबर के महीने में क्यों बढ़ जाती है इसकी कीमत
ऋषिकेश में चुनावी वादे साबित हुए फेल, जलभराव और 52 फीट ऊंचे कूड़े के ढेर से जनता परेशानउत्तराखंड
24 अग॰ 2026, 8:17 am (74 दिन पहले)· 3

ऋषिकेश में चुनावी वादे साबित हुए फेल, जलभराव और 52 फीट ऊंचे कूड़े के ढेर से जनता परेशान

ऋषिकेश में चुनावों के दौरान किए गए वादे धरातल पर उतरते नहीं दिख रहे हैं। शहर में जलभराव, टूटी सड़कें और 52 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़ स्थानीय लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं।

ऋषिकेश में जब भी चुनाव आते हैं, तब विकास के तमाम बड़े दावे किए जाते हैं। जनता को यह भरोसा दिलाया जाता है कि शहर की सूरत बदल जाएगी, शानदार सड़कें बनेंगी, पेयजल की समस्या दूर होगी, गलियों की दशा सुधरेगी और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लेकिन चुनावी शोरगुल थमने के बाद जब जमीनी हकीकत का जायजा लिया जाता है, तो वादों और दावों की कलई खुलती नजर आती है। आज शहर की तस्वीर कुछ ऐसी है कि जरा सी बारिश में ही पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है, मुख्य सड़कों से लेकर अंदरूनी गलियों तक पानी भर जाता है, और टूटे-फूटे रास्तों के बीच 52 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़ प्रशासन के दावों पर बड़ा सवालिया निशान लगा रहा है।

गलियों से लेकर मुख्य मार्गों तक पानी का कब्जा

हल्की सी बारिश होते ही शहर के विभिन्न इलाकों में जलभराव एक गंभीर समस्या के रूप में उभरकर सामने आता है। गलियों में पानी इस कदर भर जाता है कि लोगों का अपने घरों से बाहर निकलना तक दूभर हो जाता है। यही गंदा और बरसाती पानी बहकर मुख्य सड़कों पर आ जाता है, जिससे पैदल चलने वाले राहगीरों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए भी सफर करना जोखिम भरा हो जाता है। हर साल बरसात के मौसम में कमोबेश यही स्थिति बनती है और हालात जस के तस बने रहते हैं। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण सड़कों पर भरा पानी उतरने में कई घंटे लग जाते हैं, जिसके चलते आम नागरिकों को अपने रोजमर्रा के जरूरी कामकाज के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ये भी पढ़ें

सड़कों के गड्ढे और कचरे का विकराल रूप

जलभराव की इस गंभीर समस्या के अलावा शहर की सड़कों की जर्जर हालत भी स्थानीय निवासियों के लिए गहरी चिंता का विषय बनी हुई है। कई प्रमुख मार्गों और गलियों में गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जो बारिश के दौरान पानी भर जाने के कारण पूरी तरह छुप जाते हैं। ऐसे में वाहन चालकों को इन गड्ढों का बिल्कुल अंदाजा नहीं लग पाता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए तो यह स्थिति आए दिन हादसों का कारण बनती है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नई सड़कें बना देने से इस समस्या का समाधान नहीं होने वाला है, बल्कि सड़क निर्माण के साथ-साथ जल निकासी के पुख्ता इंतजाम करने बेहद जरूरी हैं जब तक पानी के निकास का सही सिस्टम नहीं बनेगा, तब तक हर बारिश में यही हाल रहना तय है। इन तमाम परेशानियों के बीच शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवालिया निशान वह विशालकाय 52 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़ खड़ा करता है, जो दूर से ही अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है। कचरे का यह अंबार यह बताने के लिए काफी है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर शहर में स्थिति कितनी विकट और चिंताजनक है। स्थानीय जनता के लिए यह केवल गंदगी का मसला भर नहीं है, बल्कि यह उनके स्वास्थ्य, इलाके की छवि और रोजमर्रा की बड़ी मुसीबत से जुड़ा हुआ संवेदनशील मुद्दा है।

जनता का दर्द और अधूरे वादों की दास्तान

स्थानीय निवासियों का कहना है कि चुनावों के दौरान नेताओं द्वारा किए गए वादे सिर्फ कागजों और भाषणों तक ही सीमित रह गए हैं। स्थानीय निवासी उमराव सिंह ने खुलकर अपनी बात रखते हुए बताया कि चुनाव के वक्त जितने भी वादे किए गए थे, उनमें से ज्यादातर पूरे नहीं हो पाए हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकारा कि कुछ छिटपुट विकास कार्य जरूर हुए हैं और पहले के मुकाबले मामूली बदलाव देखने को मिला है, लेकिन आज भी कई ऐसे गंभीर मुद्दे हैं जिन पर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को पूरी गंभीरता से काम करने की सख्त जरूरत है। खासकर बरसात के दिनों में होने वाला जलभराव और खराब सड़कें आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। वहीं, एक अन्य स्थानीय निवासी प्रेम सिंह का दर्द भी कुछ ऐसा ही बयां होता है। उनका साफ कहना है कि चुनाव के दौरान जो लुभावने और बड़े-बड़े वादे जनता से किए गए थे, वे जमीन पर कहीं भी फलीभूत होते हुए नजर नहीं आते हैं। श्याम ने इस बात पर जोर दिया कि यदि विकास के वादे केवल फाइलों और भाषणों तक ही सीमित रह जाएंगे, तो आखिर आम आदमी को उसका क्या लाभ मिलेगा। जनता का अब यही मानना है कि उन्हें कोरे दावों और आश्वासनों से ज्यादा जमीनी काम और ठोस परिणाम चाहिए।

सवाल-जवाब

ऋषिकेश में मुख्य समस्याएं क्या हैं?
ऋषिकेश में बारिश के दौरान जलभराव, टूटी हुई और गड्ढों से भरी सड़कें तथा लगभग 52 फीट ऊंचा कूड़े का पहाड़ मुख्य समस्याएं हैं।
स्थानीय निवासी उमराव सिंह ने चुनाव के वादों के बारे में क्या कहा?
उमराव सिंह ने बताया कि चुनाव के समय किए गए सभी वादे पूरे नहीं हुए हैं, हालांकि कुछ काम जरूर हुए हैं लेकिन अभी भी कई गंभीर मुद्दों पर काम बाकी है।
प्रेम सिंह के अनुसार चुनावी वादों की क्या स्थिति है?
प्रेम सिंह का कहना है कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन जमीन पर वैसा कोई काम दिखाई नहीं देता और वादे केवल कागजों तक सीमित हैं।
शहर में जलभराव के कारण लोगों को क्या परेशानी होती है?
बारिश होते ही गलियों और सड़कों पर पानी भर जाता है, जिससे पैदल और वाहन चालकों को निकलने में भारी कठिनाई होती है और पानी उतरने में घंटों लगते हैं।
कूड़े के ढेर की ऊंचाई कितनी है?
शहर में मौजूद कूड़े का पहाड़ लगभग 52 फीट ऊंचा है जो सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp