सिंह राशिफल 22 सितंबर 2026: आठवें भाव में शनि का प्रभाव, धैर्य और व्यवस्थित दिनचर्या से बनेंगे कामन्यूयॉर्क में वैश्विक तनाव पर बोले एस. जयशंकर, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में तुरंत बदलाव जरूरीकिश्त की मूल कंपनी वनईएमआई टेक्नोलॉजीज की बाजार में मजबूत एंट्री, 12 फीसदी प्रीमियम पर हुई लिस्टिंगदलाल स्ट्रीट पर शुक्रवार को लौटी रौनक, रियल्टी और मिडकैप की अगुवाई में सेंसेक्स और निफ्टी मजबूतअमेरिकी डॉलर के सामने कनाडाई डॉलर 5 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर फिसला, व्यापार तनाव से बढ़ा दबावकच्चे तेल में चार दिनों की गिरावट थमी, एशियाई कारोबार में कीमतें संभलींशेयर बाजार में आज 64 कंपनियों का एक्स-डेट एक्शन: टीएएएल टेक का स्टॉक स्प्लिट और 63 शेयरों पर डिविडेंड का मौकाराजस्थान के देशनोक में खेत की डिग्गी में डूबे तीन सगे भाई, एक-दूसरे को बचाने के प्रयास में गई जानलखनऊ में 3,567 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को बांटे गए नियुक्ति पत्र, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोरबैंक ऑफ बड़ौदा और केनरा बैंक के कर्जदारों पर बढ़ा ब्याज का बोझ, 12 जून से लागू होंगी नई दरें
ऋषिकेश में पांच दशक पहले कैसा था राम झूला का स्वरूप, बुजुर्गों ने बयां किया शांत माहौल और कच्ची सड़कों का दौरउत्तराखंड
20 सित॰ 2026, 12:36 pm (2 दिन पहले)· 0

ऋषिकेश में पांच दशक पहले कैसा था राम झूला का स्वरूप, बुजुर्गों ने बयां किया शांत माहौल और कच्ची सड़कों का दौर

ऋषिकेश के राम झूला क्षेत्र में पचास वर्ष पूर्व सीमित दुकानें, कच्चे रास्ते और बेहद शांत वातावरण था, जिसकी तुलना में वर्तमान बाजार अत्यधिक व्यस्त हो चुका है।

ऋषिकेश का विख्यात राम झूला वर्तमान समय में पूरे नगर की एक प्रमुख पहचान बन चुका है, जहां का संपूर्ण बाजार दिनभर स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों की चहल-पहल से गुलजार रहता है। इसके विपरीत, लगभग 50 वर्ष पूर्व इस पूरे परिक्षेत्र का दृश्य आज के माहौल से सर्वथा भिन्न दिखाई देता था। उस पुराने दौर में न तो वर्तमान जैसी असीम भीड़भाड़ मौजूद थी, न ही व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की अंतहीन कतारें थीं, और न ही इस बाजार तक आवागमन के लिए आधुनिक शैली की चौड़ी और पक्की सड़कें तैयार थीं। उस जमाने को प्रत्यक्ष देखने वाले बुजुर्ग बताते हैं कि उस समय राम झूला के समीपवर्ती क्षेत्र में असाधारण शांति और खुलापन पसरा रहता था, जहां स्थापित गिनी-चुनी दुकानों के जरिए स्थानीय रहवासियों और सुदूर क्षेत्रों से पधारने वाले श्रद्धालुओं की बुनियादी आवश्यकताएं पूरी हो जाती थीं।

सीमित व्यावसायिक ठिकाने और आपसी आत्मीयता का वातावरण

क्षेत्रीय निवासी राम नाथ के अनुसार, करीब 50 वर्ष पहले राम झूला के आसपास का बाजार आज की भांति दूर-दराज तक फैला हुआ नहीं था। उस दौर में व्यावसायिक परिसर बेहद सीमित संख्या में हुआ करते थे, जिससे पूरे इलाके के बाशिंदे एक-दूसरे को व्यक्तिगत रूप से बहुत अच्छी तरह पहचानते थे। दूरदराज से आने वाले यात्रियों तथा दर्शनार्थियों को कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय करके पहुंचना पड़ता था, क्योंकि उस वक्त मजबूत और चौड़े सड़क मार्गों का अभाव था। बाजार के चारों तरफ खाली व खुला क्षेत्र दिखाई देता था, जो इस स्थान को एक प्राकृतिक सुकून प्रदान करता था।

ये भी पढ़ें

राम नाथ का कहना है कि उस युग में लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरत की सामग्री क्रय करते थे, निकटवर्ती देवालयों व मंदिरों में दर्शन पूजन करते थे और बिना किसी जल्दबाजी के सहज भाव से अपने गंतव्य की ओर लौट जाते थे। आवागमन के लिए अधिकांश संपर्क मार्ग पूरी तरह कच्चे बने हुए थे। आज जिस प्रकार राम झूला के इर्द-गिर्द चारों दिशाओं में दुकानों की भरमार और निरंतर लोगों का तांता नजर आता है, वैसा दृश्य उस समय बिल्कुल नहीं था। दुकानदारों और ग्राहकों का संबंध केवल क्रय-विक्रय तक सीमित नहीं रहता था, बल्कि बाहर से आने वाले कई आगंतुक घंटों दुकानों के चबूतरे पर बैठकर परस्पर आत्मीय बातचीत किया करते थे। भले ही उस कालखंड में बाजार का दायरा बहुत छोटा था, परंतु उसकी अपनी एक विशिष्ट पहचान और गरिमा थी।

धीमी जीवनशैली और भागदौड़ से मुक्त दिनचर्या

स्थानीय निवासी और व्यवसायी रवि कुमार ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि पचास साल पहले राम झूला परिक्षेत्र में बेहद सुकून और ठहराव का वातावरण बना रहता था। गिने-चुने व्यापारिक केंद्रों पर धार्मिक अनुष्ठानों की पूजा सामग्री, खान-पान की साधारण वस्तुएं तथा नित्य उपयोग में आने वाली चीजें ही उपलब्ध होती थीं। बाहर से आने वाले यात्री भी इन्हीं पारंपरिक दुकानों पर अपनी थकान मिटाने के लिए रुका करते थे।

रवि कुमार के विवरण के अनुसार, उस वक्त आधुनिक काल जैसी अंधी भागदौड़ नहीं देखने को मिलती थी। लोग शांत गति से पैदल चलते थे और बाजार में बैठकर सामाजिक संवाद करने के लिए हर व्यक्ति के पास पर्याप्त समय उपलब्ध रहता था। राम झूला तक पहुंच मार्ग भी वर्तमान जितना सुगम और त्वरित नहीं था, क्योंकि आसपास की सड़कों और पगडंडियों का क्रमिक विकास धीरे-धीरे हो रहा था। कई कठिन हिस्सों में आवागमन के लिए केवल पैदल रास्तों का ही सहारा लेना पड़ता था।

वाहनों का कम दबाव, न्यूनतम ध्वनि और संध्याकालीन रौनक

उस पुराने जमाने में मोटर वाहनों का संचालन आज की तुलना में नगण्य था। यातायात कम रहने के कारण बाजार के वातावरण में शोरगुल नहीं के बराबर होता था और संपूर्ण परिक्षेत्र शांत व आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण महसूस होता था। शाम ढलते ही यहां की छटा एक अलग ही सादगी भरे आकर्षण से सराबोर हो जाती थी। यद्यपि दुकानों की संख्या कम थी, फिर भी श्रद्धालुओं व नागरिकों का सहज आवागमन निरंतर बना रहता था। आज भले ही राम झूला का पूरा इलाका एक विशाल और निरंतर व्यस्त व्यापारिक केंद्र में तब्दील हो चुका है, परंतु पचास वर्ष पूर्व यह स्थान अपनी अल्प दुकानों, कच्चे रास्तों और निश्चल शांति के लिए विख्यात था।

सवाल-जवाब

लगभग पचास साल पहले राम झूला के आसपास का बाजार कैसा था?
उस समय बाजार में गिनी-चुनी दुकानें थीं, सड़कें कच्ची थीं और चारों तरफ खुला व शांत वातावरण रहता था।
पुराने समय में राम झूला के आसपास किस तरह की दुकानें मौजूद थीं?
वहां मुख्यतः पूजा-पाठ की सामग्री, खान-पान की चीजें और रोजमर्रा की जरूरत का सामान बेचने वाली कुछ सीमित दुकानें थीं।
उस दौर में आने वाले यात्रियों को बाजार तक कैसे पहुंचना पड़ता था?
पक्की सड़कों के अभाव के कारण उस समय बाहर से आने वाले लोगों को काफी दूर तक पैदल रास्तों के सहारे ही चलना पड़ता था।
दुकानदारों और ग्राहकों के बीच कैसा संबंध होता था?
दुकानदारों और ग्राहकों के बीच केवल खरीद-बिक्री का रिश्ता नहीं था, बल्कि लोग दुकानों पर बैठकर आत्मीय बातचीत भी किया करते थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·1 दिन पहले

राम झूला क्षेत्र के इस ऐतिहासिक परिवर्तन का विश्लेषण स्थानीय जीवनशैली और पर्यटन ढांचे के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। पैदल मार्गों और खुले वातावरण से एक व्यस्त व्यावसायिक केंद्र बनने की यह यात्रा दर्शाती है कि समय के साथ जनसुविधाओं और आवागमन का स्वरूप कैसे बदला है। ऐतिहासिक बदलावों का यह विवरण भविष्य में खेल-कूद, साहसिक गतिविधियों और पैदल पर्यटन के लिए बेहतर योजना बनाने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

पचास वर्षों में राम झूला क्षेत्र का यह बदलाव धार्मिक पर्यटन आधारित स्थानीय अर्थव्यवस्था के विस्तार को दर्शाता है। अनौपचारिक और सीमित व्यापार से एक व्यस्त वाणिज्यिक केंद्र में परिवर्तन स्थानीय रोज़गार और बाज़ार मूल्य को तो बढ़ाता है, लेकिन इसके साथ ही टिकाऊ अवसंरचना, यातायात प्रबंधन और अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों को संतुलित करने की आवश्यकता भी पैदा होती है ताकि आर्थिक प्रगति और सांस्कृतिक पहचान दोनों बनी रहें।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

रविकाश के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, लोक नीति और शासन के दृष्टिकोण से यह बदलाव धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्रों के लिए विशेष नीतिगत ढांचे की आवश्यकता को रेखांकित करता है। जब कोई पारंपरिक तीर्थ स्थल बड़े वाणिज्यिक केंद्र में बदलता है, तो स्थानीय निकायों के समक्ष क्षेत्र की वहन क्षमता, अपशिष्ट प्रबंधन और यातायात नियंत्रण की गंभीर चुनौतियां खड़ी होती हैं। राज्य सरकार को दीर्घकालिक मास्टर प्लान और नीतिगत सुधारों के जरिए बुनियादी ढांचे के विस्तार और मूल धरोहर के संरक्षण में तालमेल बिठाना होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

यह रिपोर्ट धार्मिक पर्यटन स्थलों में अनियंत्रित विकास और बुनियादी ढांचे के तेजी से बदलते स्वरूप की अहम चुनौती को रेखांकित करती है। राम झूला परिक्षेत्र का पचास वर्षों में एक शांत आध्यात्मिक केंद्र से अत्यधिक वाणिज्यिक बाज़ार में बदलना स्थानीय अर्थव्यवस्था को तो मजबूती देता है, लेकिन साथ ही यह नगर नियोजन, यातायात प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन की गंभीर आवश्यकता को भी उजागर करता है। तीर्थ स्थलों पर अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए सतत विकास नीति और आधुनिक भीड़ प्रबंधन व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

रोहन की बात को आगे बढ़ाते हुए, सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के नज़रिए से यह बदलाव बेहद गंभीर सवाल खड़े करता है। राम झूला क्षेत्र में अनियंत्रित व्यावसायिक विस्तार और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से भगदड़ का जोखिम, आपातकालीन वाहनों का रास्ता रुकना और छिटपुट अपराधों की संभावना काफी बढ़ जाती है। अत्यधिक अतिक्रमण के कारण सुरक्षा बलों के लिए भीड़ प्रबंधन और त्वरित राहत कार्य पहुंचाना कठिन हो जाता है। इसलिए स्थानीय प्रशासन को सुरक्षा ऑडिट, निरंतर सीसीटीवी निगरानी, अतिक्रमण हटाव और आपातकालीन निकासी मार्गों का कड़ाई से पालन कराना चाहिए ताकि क्षेत्र में शांति व सुरक्षा बनी रहे।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp