ऋतु परिवर्तन के दौर में दिन के समय हल्की धूप और सुबह तथा देर रात की ठंडक मानव स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रही है। भीलवाड़ा जिले के सबसे बड़े चिकित्सालय सहित ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य केंद्रों के आउटडोर में सर्दी-जुकाम, खांसी, वायरल बुखार और श्वास संबंधी दिक्कतों से जूझ रहे मरीजों की कतारें लंबी हो रही हैं। दरअसल तापमान में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव के बीच मानव शरीर को नए मौसम के अनुकूल ढलने में वक्त लगता है। इसी कारण आती और जाती सर्दी के दौरान थोड़ी सी भी असावधानी लोगों को गंभीर संक्रमण की चपेट में धकेल देती है।
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले वर्ग पर दोहरा जोखिम
मौसम के इस बदलाव का सबसे त्वरित और प्रतिकूल प्रभाव छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर देखा जा रहा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा के अनुसार, इन दोनों आयु वर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी अपेक्षाकृत कमजोर होती है, जिससे संक्रामक वायरस और बैक्टीरिया उन पर जल्दी हावी हो जाते हैं। सुबह और शाम के वक्त तापमान गिरते ही सर्दी-जुकाम और सांस से जुड़ी तकलीफों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे संवेदनशील समय में घर के बड़े सदस्यों को बच्चों और वृद्धजनों की दिनचर्या तथा पहनावे पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है।
सीधी ठंडी हवा से बचाव और कपड़ों का चयन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दिनचर्या में मामूली सतर्कता बरतकर मौसमी बीमारियों से पूरी तरह सुरक्षित रहा जा सकता है। प्रातःकाल और देर शाम जब वातावरण में गलन अधिक होती है, उस समय गर्म ऊनी कपड़े अनिवार्य रूप से पहनने चाहिए ताकि शरीर सीधी ठंडी हवा के संपर्क में न आए। छोटे बच्चों को सुबह या देर शाम बिना गर्म कपड़ों के बाहर ले जाने से बचना चाहिए। यदि किसी बच्चे को लगातार खांसी, तेज बुखार या सांस लेने में कठिनाई के लक्षण नजर आएं, तो घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने के बजाय तुरंत नजदीकी योग्य चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।
बुजुर्गों की दिनचर्या और संक्रमण से सुरक्षा
बुजुर्ग नागरिकों को भी अपनी नियमित आदतों में मौसम के अनुरूप फेरबदल करने की हिदायत दी गई है। डॉ. संजीव शर्मा ने वरिष्ठ नागरिकों को भोर में जल्दी अथवा देर शाम ठंड के समय घर से बाहर टहलने से बचने की सलाह दी है। उन्हें पर्याप्त विश्राम करने, गर्म कपड़े पहनने और पौष्टिक तत्वों से भरपूर भोजन लेने पर जोर देना चाहिए। इसके अतिरिक्त, अस्पतालों में भर्ती मरीजों और उनकी तीमारदारी में जुटे परिजनों के लिए हाथों की नियमित सफाई रखना बेहद जरूरी है, जिससे एक-दूसरे में फैलने वाले क्रॉस-इंफेक्शन पर लगाम लगाई जा सके।
संतुलित खानपान और हाइड्रेशन का महत्व
सर्द मौसम में शरीर का आंतरिक तापमान स्थिर रखने के लिए भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देना अनिवार्य हो जाता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि दैनिक आहार में ताजी हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, दालें और सुपाच्य पौष्टिक व्यंजन शामिल किए जाने चाहिए। शरीर को अंदर से ऊर्जावान बनाए रखने के लिए हमेशा ताजा और गर्म भोजन ही ग्रहण करना उचित है। दिन की शुरुआत में सुबह का पौष्टिक नाश्ता कभी न छोड़ें और ठंड के बावजूद पर्याप्त मात्रा में पानी पीने का नियम बनाए रखें। बच्चों और बुजुर्गों को बाजार की खुली खाद्य सामग्री, बासी खाना और फ्रिज में रखी अत्यधिक ठंडी चीजों से दूर रखना चाहिए।
















