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सागर में जहरीली शराब कांड पर सख्त हुए मोहन यादव, आईजी और कमिश्नर बदले गएमध्य प्रदेश
10 सित॰ 2026, 12:28 am (3 दिन पहले)· 2

सागर में जहरीली शराब कांड पर सख्त हुए मोहन यादव, आईजी और कमिश्नर बदले गए

मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश देते हुए अधिकारियों को सख्त कार्रवाई करने की पूरी छूट दी है।

भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सागर जिले में जहरीली शराब के सेवन से हुई दुखद मौतों के मामले में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। राज्य सरकार ने इस गंभीर घटना का संज्ञान लेते हुए न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही प्रशासनिक लापरवाही और कुप्रबंधन पर कड़ा रुख अपनाते हुए सागर के आईजी और कमिश्नर को तत्काल प्रभाव से हटाकर नए अधिकारियों को तैनात कर दिया गया है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अवैध शराब के अवैध कारोबार और इसमें लिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ बेहद कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक फेरबदल और नए अधिकारियों की तैनाती

घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दिलीप कुमार को सागर संभाग का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है, जिन्होंने कार्यभार भी संभाल लिया है। वहीं, कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी इरशाद वली को सागर रेंज का महानिरीक्षक यानी आईजी बनाया गया है। हालांकि सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं, लेकिन अभी तक यह आधिकारिक रूप से तय नहीं किया गया है कि इस न्यायिक जांच की अगुवाई कौन करेगा या फिर जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए क्या समय-सीमा निर्धारित की गई है।

मृतकों का आंकड़ा बढ़ा और घायलों का इलाज जारी

पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक मंगलवार को सागर जिले में जहरीली शराब त्रासदी के कारण मरने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 15 तक पहुंच गया है। अस्पताल में उपचार के दौरान दो और पीड़ितों ने दम तोड़ दिया। दुखद पहलू यह भी है कि इस त्रासदी में जान गंवाने वालों में से एक व्यक्ति खुद अवैध शराब के कारोबार से जुड़े नेटवर्क का आरोपी बताया जा रहा है। स्थानीय अस्पतालों में अभी भी लगभग 40 लोग भर्ती हैं जिनका इलाज चल रहा है, जिनमें से 3 मरीजों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं।

अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री और पीड़ितों से मुलाकात

स्थिति का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का दौरा किया। वहां उन्होंने भर्ती मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों से भी मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। डॉक्टरों और पीड़ित परिवारों से बातचीत कर उन्होंने इलाज की प्रगति की पूरी जानकारी ली। इसके बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सरकार सभी घायलों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी और प्रभावित परिवारों की अन्य सभी जरूरी आवश्यकताओं को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। राज्य सरकार पहले ही यह ऐलान कर चुकी है कि इस घटना में जान गंवाने वाले मृतकों के निकटतम परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी।

अधिकारियों को सख्त कार्रवाई की खुली छूट

जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करने के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्रशासन को दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की खुली छूट दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस अवैध धंधे में शामिल जो भी व्यक्ति पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सबसे कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह के घिनौने कृत्यों से लोगों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न जुटा सके।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अवैध शराब के कारोबार और अन्य सभी प्रकार की गैर-कानूनी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए तुरंत सख्त कानूनी और अतिक्रमण-विरोधी कार्रवाई अमल में लाई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी किसी भी दर्दनाक घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पूरे मध्य प्रदेश राज्य में विशेष निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहें।

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सवाल-जवाब

सागर जहरीली शराब कांड में अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?
इस जहरीली शराब त्रासदी में मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 15 हो गई है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कौन से प्रशासनिक बदलाव किए हैं?
मुख्यमंत्री ने सागर के आईजी और कमिश्नर को हटा दिया है, जिसमें वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दिलीप कुमार को कमिश्नर और आईपीएस अधिकारी इरशाद वली को आईजी नियुक्त किया गया है।
घायलों और पीड़ितों के लिए सरकार ने क्या सहायता की घोषणा की है?
सरकार ने मृतकों के निकटतम परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है और सभी घायलों के इलाज का खर्च उठाने का फैसला किया है।
वर्तमान में कितने लोग अस्पताल में भर्ती हैं?
लगभग 40 लोग अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 3 की हालत गंभीर बनी हुई है।
इस मामले में किस तरह की जांच के आदेश दिए गए हैं?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·2 दिन पहले

सागर की यह जहरीली शराब त्रासदी प्रशासनिक लापरवाही और अवैध शराब के नेटवर्क की गहराई को उजागर करती है। मुख्यमंत्री द्वारा आईजी और कमिश्नर को हटाना तथा न्यायिक जांच के आदेश देना तात्कालिक कदम हैं, लेकिन यह घटना भारतीय राज्यों में शराब माफिया के खिलाफ स्थायी नीतिगत सुधार और पुलिस-प्रशासनिक जवाबदेही की पुरानी मांग को फिर से केंद्र में ले आती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

सागर जहरीली शराब कांड में आईजी और कमिश्नर जैसे शीर्ष अधिकारियों का तत्काल फेरबदल और न्यायिक जांच के आदेश सरकार के कड़े रुख को दर्शाते हैं। हालांकि, अवैध शराब के इस संगठित कारोबार पर रोक लगाने के लिए सिर्फ प्रशासनिक फेरबदल काफी नहीं होगा; जब तक ज़मीनी स्तर पर पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत खत्म नहीं होती, तब तक ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकना मुश्किल रहेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

अर्जुन के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना आवश्यक है कि ऐसी मानवीय और आर्थिक त्रासदियाँ केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और राजस्व प्रणालियों की गहरी कमजोरी को उजागर करती हैं। जब तक अवैध शराब के इस समानांतर और असंगठित कारोबार के वित्तीय स्रोतों और आपूर्ति श्रृंखला की जड़ों पर सीधा प्रहार नहीं किया जाता, तब तक इस तरह की आपदाओं को रोकना असंभव होगा। शीर्ष अधिकारियों के तबादलों से तात्कालिक संदेश तो जाता है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए आबकारी तंत्र में बुनियादी सुधार और कठोर आर्थिक निगरानी की सख्त जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा व्यापार पर वित्तीय और कानूनी दोनों मोर्चों पर लगाम लगाई जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

सागर की यह घटना प्रशासनिक चूक और अवैध शराब माफिया के गठजोड़ को बेनकाब करती है। मुख्यमंत्री द्वारा आईजी और कमिश्नर को हटाना तात्कालिक राहत तो है, लेकिन असली चुनौती धरातल पर सिंडिकेट की कमर तोड़ना होगी। न्यायिक जांच की समय-सीमा तय न होना भविष्य की जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है, जबकि ज़हरीली शराब के इस नेटवर्क को जड़ से मिटाने के लिए सिर्फ तबादलों से आगे बढ़कर आबकारी और पुलिस तंत्र में गहरी सफाई की आवश्यकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

यह त्रासदी दर्शाती है कि प्रशासनिक फेरबदल और शीर्ष अधिकारियों के तबादले केवल शुरुआती कदम हैं। जब तक आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत की गहराई से जाँच कर निचले स्तर के तंत्र को जवाबदेह नहीं बनाया जाता, तब तक ऐसे आपराधिक सिंडिकेट्स पर स्थायी लगाम लगाना असंभव होगा। न्यायिक जाँच की कोई समय-सीमा तय न होना मामले की गति और गंभीरता पर भी सवाल उठाता है।

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