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सैदपुर तहसील में बुनियादी सुविधाओं का घोर संकट, पीने के साफ पानी और बैठने की जगह को तरस रहे वकील और फरियादीभारत
23 सित॰ 2026, 2:26 pm (8 दिन पहले)· 0

सैदपुर तहसील में बुनियादी सुविधाओं का घोर संकट, पीने के साफ पानी और बैठने की जगह को तरस रहे वकील और फरियादी

गाजीपुर की सैदपुर तहसील में आठ सालों से मूलभूत ढांचे की भारी कमी है, जहां नल में अत्यधिक आयरन और बैठने की पक्की व्यवस्था न होने से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

गाजीपुर जिले की सैदपुर तहसील में अपने मुकदमों और कानूनी कार्यों के सिलसिले में पहुंचने वाले आम नागरिकों और अधिवक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक स्तर पर किए जाने वाले दावों के उलट जमीनी स्तर पर यहां बुनियादी सुविधाओं की भारी किल्लत बनी हुई है। परिसर में वकीलों और दूरदराज से आने वाले वादकारियों के बैठने के लिए कोई पक्का ढांचा या समुचित व्यवस्था तक मौजूद नहीं है।

टीन शेड और टेंट के सहारे बीत रहे साल

तहसील परिसर में कार्य करने वाले अधिवक्ता राजेश सिंह के अनुसार, पिछले 7-8 वर्षों से अधिवक्ता और अपने मामलों की पैरवी के लिए आने वाले पक्षकार टीन शेड तथा खांप के टेंट के नीचे बैठने को विवश हैं। मौसम की मार के बीच इस प्रकार की व्यवस्था में कामकाज संभालना बेहद कठिन हो जाता है। विशेष रूप से बारिश के मौसम में स्थिति अत्यंत विकट और नारकीय रूप धारण कर लेती है, जिससे लोगों के लिए वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है।

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दूषित पानी की मार और रोज का आर्थिक बोझ

परिसर के भीतर पेयजल की व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई हुई है। सरकारी स्तर पर परिसर में स्वच्छ पेयजल मुहैया कराने के लिए न तो कोई नया हैंडपंप लगाया गया है और न ही पानी की कोई टंकी स्थापित की गई है। जो नल मौजूद हैं, उनके पानी में आयरन की मात्रा इतनी ज्यादा है कि वह स्वास्थ्य के लिहाज से पीने योग्य नहीं रह गया है। इस वजह से वकीलों और आम फरियादियों को प्यास बुझाने के लिए प्रतिदिन 20 रुपये खर्च करके सीलबंद पानी का डिब्बा खरीदना पड़ता है।

आठ वर्षों की शिकायतों के बाद भी प्रशासन बेपरवाह

अधिवक्ताओं का कहना है कि वे इस गंभीर संकट को लेकर कई बार स्थानीय अधिकारियों से वार्ता कर चुके हैं और मामले को जिलाधिकारी के संज्ञान में भी लाया गया है। इसके बावजूद लगभग आठ वर्षों की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक मशीनरी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। जनप्रतिनिधियों की अनदेखी और प्रशासनिक सुस्ती के कारण यहां आने वाले लोगों को अपने मौलिक नागरिक अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।

स्थायी समाधान को लेकर वकीलों में नाराजगी

सैदपुर तहसील में रोजाना बड़ी संख्या में लोग अपने मुकदमों की सुनवाई, भूमि संबंधी मामलों और अन्य आवश्यक प्रशासनिक कार्यों के लिए आते हैं। अधिवक्ताओं का स्पष्ट कहना है कि न्यायालयीन वातावरण में पीने के स्वच्छ पानी और बैठने का पर्याप्त इंतजाम अनिवार्य है। लंबे समय से बनी इस लचर व्यवस्था और प्रशासनिक बेरुखी को लेकर अधिवक्ताओं में गहरा रोष व्याप्त है, जो अब इस समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं।

सवाल-जवाब

सैदपुर तहसील परिसर में मुख्य रूप से किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
परिसर में वकीलों और फरियादियों के बैठने के लिए पक्के शेड का अभाव है और पीने के लिए सुरक्षित व स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है।
वकील और पक्षकार पिछले कितने समय से टेंट और टीन शेड में बैठ रहे हैं?
अधिवक्ताओं के अनुसार वे पिछले 7 से 8 वर्षों से टीन शेड और टेंट के नीचे बैठने को मजबूर हैं।
परिसर में मौजूद नल के पानी में क्या खराबी है?
नल के पानी में आयरन की मात्रा अत्यधिक है, जिसके कारण वह पीने योग्य नहीं है।
पीने के पानी के लिए वकीलों और आम जनता को क्या करना पड़ता है?
प्यास बुझाने के लिए लोगों को रोजाना 20 रुपये खर्च करके पानी का डिब्बा खरीदना पड़ता है।
क्या इस समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया गया है?
जी हां, अधिवक्ताओं ने कई बार स्थानीय अधिकारियों और जिलाधिकारी से वार्ता की है, लेकिन आठ वर्षों में कोई समाधान नहीं निकला।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·7 दिन पहले

पिछले महीने जब मैं गाजीपुर गई थी, तब सैदपुर तहसील में वकीलों और दूरदराज से आए लोगों को धूप और बारिश से बचने के लिए टेंटों के सहारे बैठे देखा था। आठ साल से पानी में आयरन की समस्या और बैठने की कोई पक्की व्यवस्था न होना वाकई बहुत कष्टदायक है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·7 दिन पहले

मुझे वो दिन याद आ गया जब मैं खुद एक स्थानीय तहसील गया था और घंटों धूप में खड़े रहने के बाद गले को तर करने के लिए पैसे देकर पानी खरीदना पड़ा था।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·7 दिन पहले

अर्जुन जी, सच में बहुत दर्दनाक है ये। जब अदालत परिसर में ही पानी और बैठने का इंतजाम न हो, तो आम आदमी की क्या ही इज्जत होगी वहां।

Karan Malhotra@karan-malhotra·7 दिन पहले

आठ साल से लोग बिना पानी और टीन शेड के रह रहे हैं, फिर भी किसी अधिकारी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

Ravikash Gupta@ravikash·7 दिन पहले

करण, आप सही कह रहे हैं, लेकिन कोई अधिकारी तब तक क्यों नहीं सुनता जब तक बात आठ साल लंबी खिंच न जाए?

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