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सकलडीहा के बिसुंधरी में 20 साल बाद बन रही सड़क पर भड़के ग्रामीण, नाली न बनने पर खुद खोदाई करने का अल्टीमेटमउत्तर प्रदेश
16 अग॰ 2026, 8:45 am (28 दिन पहले)· 4

सकलडीहा के बिसुंधरी में 20 साल बाद बन रही सड़क पर भड़के ग्रामीण, नाली न बनने पर खुद खोदाई करने का अल्टीमेटम

उत्तर प्रदेश के चंदौली स्थित बिसुंधरी गांव में 20 साल बाद सड़क निर्माण शुरू हुआ है, लेकिन जल निकासी के लिए नाली न बनने पर ग्रामीणों में रोष है। लोगों का कहना है कि नाली के बिना सड़क जल्द खराब होगी और मांग न मानने पर वे खुद सड़क खोदकर नाली बनाएंगे।

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में सकलडीहा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिसुंधरी गांव में दो दशकों के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार सड़क निर्माण कार्य शुरू हुआ है। हालांकि, विकास की इस पहल के बीच ग्रामीणों में गहरा असंतोष फैल गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि सड़क के निर्माण के साथ ही जल निकासी के लिए नाली की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि रास्ते के किनारे पक्की नाली नहीं बनी, तो बारिश का पानी और घरों से निकलने वाला गंदा जल सड़क पर ही एकत्र होगा, जिससे यह मार्ग जल्द ही नष्ट हो जाएगा। आक्रोशित ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सड़क पूरा होने से पहले नाली का निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो वे स्वयं फावड़ा उठाकर नई सड़क को खोद देंगे और नाली बनाएंगे।

दो दशकों बाद शुरू हुआ काम, लेकिन बुनियादी जल निकासी की अनदेखी

गांव के निवासी मुराहू यादव ने अपनी चिंता साझा करते हुए बताया कि बिसुंधरी गांव के लोग पिछले 20 वर्षों से एक सुदृढ़ सड़क की आस लगाए बैठे थे। लंबे इंतजार के बाद अब विधायक निधि से इस सड़क का निर्माण कराया जा रहा है, परंतु नाली के बिना यह प्रयास निष्फल साबित होगा। उन्होंने कहा, "सड़क के साथ नाली बनना बेहद जरूरी है, क्योंकि जल निकासी नहीं होने पर सड़क जल्द खराब हो सकती है।" इसके साथ ही मुराहू यादव ने गांव की सफाई व्यवस्था की पोल खोलते हुए बताया कि पुरानी नालियों की सफाई के लिए प्रशासन का कोई कर्मचारी नहीं आता और ग्रामीणों को खुद आपस में संगठित होकर नालियों का कचरा हटाना पड़ता है। उन्होंने दोहराया कि यदि अधिकारियों ने सड़क के साथ नाली निर्माण को प्राथमिकता नहीं दी, तो ग्रामीण निर्मित सड़क को दोबारा खोदने के लिए विवश हो जाएंगे।

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मानसून में निर्माण और जल निगम के अधूरे कार्यों से बढ़ी चिंताएं

एक अन्य ग्रामीण अतुल सिंह ने निर्माण कार्य के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस समय बरसात का मौसम चल रहा है और ऐसे में डामरीकरण या सड़क निर्माण की गुणवत्ता कितने दिन टिक पाएगी, यह जांच का विषय है। उन्होंने जानकारी दी कि गांव वालों ने मिलकर क्षेत्रीय विधायक से पक्की सड़क बनवाने का अनुरोध किया था, जिसके बाद यह कार्य स्वीकृत होकर शुरू हुआ। हालांकि, नाली का प्रावधान न होने से लोगों की खुशी चिंता में बदल गई है। अतुल सिंह ने पूर्व के अनुभवों का जिक्र करते हुए बताया कि कुछ समय पहले जल निगम की ओर से भी पाइपलाइन या अन्य कार्यों के लिए गांव की सड़कों की खोदाई की गई थी। जल निगम ने काम पूरा किए बिना ही रास्तों को बदहाल छोड़ दिया, जिससे गांव की सड़कें पहले से ही जर्जर स्थिति में हैं। अब यदि नई सड़क के पानी की निकासी का प्रबंध नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में ग्रामीणों की समस्याएं और अधिक बढ़ जाएंगी।

लाखों रुपये के बजटीय नुकसान को रोकने के लिए प्रशासनिक निरीक्षण की मांग

बिसुंधरी गांव के लोगों की मुख्य मांग है कि कम से कम बरसात के पानी के बहाव के लिए तुरंत सड़क के समानांतर नाली का निर्माण कराया जाए। ग्रामीणों का मानना है कि घरेलू जल निकासी का प्रबंध बाद के चरणों में भी किया जा सकता है, परंतु बारिश के पानी को सड़क पर रुकने देना पूरी परियोजना को बर्बाद कर देगा। उन्होंने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों और अभियंताओं से अपील की है कि वे अविलंब मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लें। ग्रामीणों ने मांग रखी कि ठेकेदार और संबंधित विभाग को निर्देश दिए जाएं कि सड़क और नाली का कार्य एक साथ पूरा किया जाए, ताकि सरकार के लाखों रुपये खर्च होने के बाद सड़क को दोबारा खोदने जैसी नौबत न आए और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा हो सके।

सवाल-जवाब

बिसुंधरी गांव में सड़क निर्माण को लेकर क्या विवाद है?
ग्रामीणों का विरोध इस बात पर है कि 20 साल बाद बन रही सड़क के साथ जल निकासी के लिए नाली नहीं बनाई जा रही है, जिससे बारिश का पानी सड़क पर ही जमा होगा।
यह सड़क किस मद या फंड से बनाई जा रही है?
यह सड़क स्थानीय विधायक की विधायक निधि से निर्मित की जा रही है।
नाली न बनने की स्थिति में ग्रामीणों ने क्या चेतावनी दी है?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सड़क से पहले नाली नहीं बनाई गई, तो वे जरूरत पड़ने पर सड़क को खुद खोदकर नाली का निर्माण करेंगे।
जल निगम को लेकर ग्रामीणों की क्या शिकायत रही है?
ग्रामीणों का कहना है कि पहले जल निगम ने गांव में खोदाई की थी लेकिन काम पूरा नहीं किया, जिससे गांव के रास्ते पहले से ही खराब पड़े हैं।
ग्रामीण प्रशासन और अधिकारियों से क्या मांग कर रहे हैं?
ग्रामीण मांग कर रहे हैं कि अधिकारी तुरंत मौके का निरीक्षण करें और सड़क के साथ ही नाली निर्माण सुनिश्चित करें, ताकि लाखों रुपये का बजट बर्बाद न हो।
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टिप्पणियाँ 3

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

चंदौली के बिसुंधरी गांव का यह मामला उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी ढांचे की लचर प्लानिंग को उजागर करता है। जब विधायक निधि से दो दशक बाद सड़क बन रही है, तो तकनीकी पक्ष और जल निकासी की अनदेखी होना हैरान करने वाला है। मानसून के समय डामरीकरण और जल निगम के अधूरे काम पहले से ही निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग ने समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया, तो यह प्रशासनिक लापरवाही न सिर्फ जनता के टैक्स के पैसों की बर्बादी बनेगी, बल्कि क्षेत्र में राजनीतिक असंतोष को भी और ज्यादा भड़काएगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 दिन पहले

यह प्रकरण केवल एक गांव की स्थानीय नाराजगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विकेंद्रीकृत विकास योजनाओं में अभिसरण (कन्वर्जेंस) की कमी का स्पष्ट प्रमाण है। विधायक निधि जैसे संसाधनों के उपयोग के दौरान यदि सड़क निर्माण और जल निकासी जैसी परस्पर जुड़ी जरूरतों को एक साथ नहीं जोड़ा जाएगा, तो सरकारी धन का दुरुपयोग तय है। मानसून के दौरान इस तरह के निर्माण कार्य से ज़मीनी स्तर पर जनता का भरोसा टूटता है, जो आगामी राजनीतिक समीकरणों और जन-प्रतिनिधियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप कर जल निगम के अधूरे कार्यों और ड्रेनेज के संकट को सुलझाना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

बिसुंधरी गांव का यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और लचर योजना का स्पष्ट उदाहरण है। मानसून के दौरान बिना जल निकासी के सड़क निर्माण से सार्वजनिक धन की भारी बर्बादी तय है। यदि समय रहते स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग ने हस्तक्षेप कर इस परियोजना में नाली निर्माण को शामिल नहीं किया, तो कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है और ग्रामीणों का अल्टीमेटम टकराव का कारण बन सकता है।

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