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समारदुंग की सुरंग में भूस्खलन से मजदूर फंसे, आठ की मौत की पुष्टि, मीथेन गैस के चलते 19 को बचाना मुश्किलभारत
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समारदुंग की सुरंग में भूस्खलन से मजदूर फंसे, आठ की मौत की पुष्टि, मीथेन गैस के चलते 19 को बचाना मुश्किल

सिक्किम के नामची ज़िले में हाइड्रोपावर सुरंग निर्माण स्थल पर हुए भूस्खलन में कम से कम आठ मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि बचाव दल सुरंग के भीतर घने मीथेन गैस से जूझते हुए 19 अन्य फंसे मजदूरों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.

सिक्किम में एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में हुए भूस्खलन में अब तक कम से कम आठ मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 19 अन्य मजदूर अब भी सुरंग के भीतर फंसे हैं और बचाव दल भारी मीथेन गैस से जूझते हुए उन तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. यह सुरंग नामची ज़िले में समारदुंग और झोलुंगे के पास बनाई जा रही है और इसका निर्माण तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के तहत पटेल इंजीनियरिंग कर रही है. ज़िला प्रशासन ने पुष्टि की है कि घटनास्थल से आठ शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि बाकी फंसे मजदूरों की तलाश लगातार जारी है.

शव अस्पताल भेजे गए, कई एजेंसियां बचाव में जुटीं

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के एक बयान के मुताबिक, अब तक बरामद किए गए शवों को गंगटोक के सिंगतम ज़िला अस्पताल (STNM) और नमची ज़िला अस्पताल भेजा गया है. नमची ज़िला प्रशासन, ज़िला अधिकारियों, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर बचाव अभियान चला रहा है. बयान में यह भी कहा गया है कि सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसएसडीएमए) पूरी स्थिति पर बारीकी से नज़र बनाए हुए है और आगे की जानकारी ज़रूरत के हिसाब से दी जाएगी.

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अंदर कितने लोग फंसे हैं, आंकड़ा बार-बार बदल रहा

नमची ज़िला कलेक्टर अनुपा तामलिंग ने घटना के तुरंत बाद बताया था कि समारदुंग सुरंग के भीतर करीब 27 कर्मचारियों के फंसे होने की आशंका है, हालांकि उन्होंने साफ किया कि सुरंग के अंदर की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न होने के कारण यह संख्या अभी पुख्ता नहीं मानी जा सकती. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की एक टीम सुरंग के अंदर जाकर बचाव कार्य में जुट चुकी है, और जब तक यह टीम वापस नहीं लौटती, तब तक अंदर फंसे लोगों की सही संख्या और उनकी हालत के बारे में पक्के तौर पर कुछ कहना मुश्किल होगा.

बाद में तामलिंग ने बताया कि यह आंकड़ा किस तरह जोड़ा गया. उनके मुताबिक शुरुआती जानकारी में करीब 19 मजदूरों के सुरंग में फंसे होने की बात सामने आई थी. इसके बाद बचाव में मदद के लिए पटेल इंजीनियरिंग के तीन और कर्मचारी सुरंग में गए, जिनमें से दो खुद भी अंदर फंस गए, जिससे कंपनी के कुल 21 लोगों के अंदर फंसे होने का अनुमान लगाया जा रहा है. इसके अलावा एनएचपीसी के छह कर्मचारी भी सुरंग के भीतर होने की बात कही जा रही है, जिससे कुल संख्या 27 तक पहुंच जाती है. तामलिंग ने यह भी कहा कि असल संख्या इससे कम या ज़्यादा भी हो सकती है, और जब तक एनडीआरएफ टीम फंसे लोगों के ठीक-ठीक स्थान तक नहीं पहुंच जाती, तब तक कुछ भी पुख्ता तौर पर नहीं कहा जा सकता.

भूस्खलन की वजह अब तक साफ नहीं, धमाके जैसी आवाज़ सुनने का दावा

प्रशासन अभी तक यह पता नहीं लगा पाया है कि भूस्खलन आखिर किस वजह से हुआ. ज़िला कलेक्टर के मुताबिक, सुरंग से बाहर निकलने में कामयाब रहे कुछ मजदूरों ने बताया कि अंदर से उन्हें धमाके जैसी तेज आवाज़ सुनाई दी थी, जिसके फौरन बाद वे बाहर की ओर भागे. लेकिन इनके कई साथी समय रहते बाहर नहीं निकल पाए और अब भी सुरंग के भीतर ही फंसे हुए हैं.

मीथेन गैस की मात्रा ज़्यादा होने से बचाव कार्य बेहद मुश्किल

तामलिंग ने बताया कि सुरंग के भीतर मीथेन गैस की मात्रा असामान्य रूप से ज़्यादा है, जिसकी वजह से बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है. एनडीआरएफ की पहली टीम ने सबसे पहले उन अग्निशमनकर्मियों को सुरक्षित बाहर निकाला, जो घटना के फौरन बाद खुद सुरंग के अंदर चले गए थे. इसके बाद एनडीआरएफ की दूसरी टीम सुरंग में दाखिल हुई और बचाव अभियान अब भी जारी है. अधिकारियों का कहना है कि गैस का स्तर इतना ज़्यादा है कि बचावकर्मी अभी तक उस जगह तक नहीं पहुंच पाए हैं, जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है. कई बचावकर्मियों को तो अंदर फंसे लोगों से संपर्क स्थापित करने से पहले ही वापस लौटना पड़ा.

घटना की खबर मिलते ही चंद मिनटों में टीमें अलर्ट कर दी गईं

तामलिंग के मुताबिक, घटना की सूचना मिलते ही सिलिगुड़ी और पाक्योंग में तैनात एनडीआरएफ टीमों के साथ-साथ एसडीआरएफ को भी तुरंत अलर्ट कर दिया गया था. उन्होंने बताया कि भूस्खलन 20 जुलाई की दोपहर करीब 3:09 बजे हुआ, और अधिकारी जब समारदुंग की ओर बढ़ ही रहे थे, तभी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीमों को इसकी जानकारी दे दी गई थी. अग्निशमन विभाग और पुलिसकर्मियों ने बिना किसी खास सुरक्षा उपकरण के दो बार सुरंग के भीतर जाने की कोशिश की, लेकिन अंदर के खतरनाक हालात की वजह से वे फंसे हुए मजदूरों तक नहीं पहुंच सके.

सवाल-जवाब

सुरंग हादसा कहां हुआ?
यह हादसा सिक्किम के नामची ज़िले में समारदुंग और झोलुंगे के पास बन रही एक सुरंग में हुआ, जो तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है.
अब तक कितने मजदूरों की मौत हुई है?
ज़िला प्रशासन के मुताबिक अब तक आठ मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं.
अभी कितने मजदूर सुरंग में फंसे हैं?
अधिकारियों के मुताबिक करीब 19 मजदूर अभी भी फंसे हैं, हालांकि शुरुआती अनुमान में पटेल इंजीनियरिंग और एनएचपीसी के कर्मचारियों को मिलाकर कुल संख्या 27 तक बताई गई थी.
सुरंग का निर्माण कौन कर रहा है?
तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना के तहत यह सुरंग पटेल इंजीनियरिंग बना रही है.
भूस्खलन की वजह क्या थी?
अभी तक इसका सटीक कारण पता नहीं चल पाया है, हालांकि बाहर निकलने में कामयाब कुछ मजदूरों ने अंदर से धमाके जैसी तेज आवाज़ सुनने की बात कही है.
बचाव अभियान में इतनी देरी क्यों हो रही है?
सुरंग के भीतर मीथेन गैस की मात्रा असामान्य रूप से ज़्यादा होने के कारण बचावकर्मी अब तक उस जगह तक नहीं पहुंच पाए हैं जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है.
यह हादसा कब हुआ?
भूस्खलन 20 जुलाई की दोपहर करीब 3:09 बजे हुआ.
बचाव में कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल हैं?
एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिक्किम पुलिस, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं, स्वास्थ्य विभाग और नमची ज़िला प्रशासन इस अभियान में जुटे हैं, जिसकी निगरानी सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण कर रहा है.
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