पंजाब के सियासी गलियारों में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से गर्माने लगी है। राज्य में बुधवार, 4 नवंबर की तारीख काफी अहम होने जा रही है, जब दो प्रमुख राजनीतिक दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर जनता के बीच अपनी आवाज बुलंद करेंगे। एक तरफ लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी संगरूर जिले से पार्टी के जनसंपर्क अभियान की शुरुआत करेंगे, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने चंडीगढ़ में 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के पीड़ितों के समर्थन में एक विशेष आयोजन की रूपरेखा तैयार की है।
मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र से कांग्रेस का अभियान
कांग्रेस पार्टी ने अपनी जनसभा के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर के अंतर्गत आने वाले फग्गूवाला गांव को चुना है। 4 नवंबर को सुबह 10 बजे आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय इंदर सिंगला ने इस सभा को अगले विधानसभा चुनाव की औपचारिक शुरुआत करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी की मौजूदगी में होने वाला यह जुटान राज्य की राजनीति को नया मोड़ देगा।
इस सभा के जरिए कांग्रेस मौजूदा राज्य सरकार को कई मोर्चों पर घेरने का मन बना चुकी है। पार्टी का मुख्य जोर पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था, नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता और नौजवानों के बीच बढ़ती बेरोजगारी जैसे ज्वलंत सवालों पर रहेगा। विजय इंदर सिंगला ने आरोप लगाया है कि मौजूदा सत्ता के पांच वर्षों के दौरान नशा हर घर की दहलीज तक जा पहुंचा है। उन्होंने कहा, "2027 के चुनाव में AAP को 10 से ज्यादा सीटें नहीं मिलेंगी।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य में बेखौफ गैंगस्टर फिरौती मांग रहे हैं और दिनदहाड़े आम नागरिकों व पुलिसकर्मियों की जान ली जा रही है। सिंगला के अनुसार यदि राज्य में उनकी सरकार बनती है तो नशा तस्करों पर कड़ा शिकंजा कसा जाएगा और रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।
चंडीगढ़ में गूंजेंगे सिख दंगों के अनसुलझे दर्द
जिस वक्त संगरूर में कांग्रेस की जनसभा चल रही होगी, ठीक उसी समय पंजाब भाजपा चंडीगढ़ के सेक्टर-24 स्थित होटल पार्कव्यू में एक विशेष मंथन सत्र चलाएगी। ‘जख्म 84 के’ शीर्षक से आयोजित यह सम्मेलन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। भाजपा का कहना है कि इस मंच का उद्देश्य 1984 के उस काले दौर, पीड़ितों द्वारा दशकों से लड़ी जा रही अदालती जंग और उनके पुनर्वास के जरूरी मुद्दों को सामने लाना है।
इस आयोजन में कई प्रमुख हस्तियां अपने विचार साझा करने पहुंचेंगी। वक्ताओं की सूची में पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन ढींगरा, वरिष्ठ वकील एचएस फूलका, सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी और मनजिंदर सिंह सिरसा जैसे चेहरे शामिल हैं। मंच पर उन परिवारों और प्रत्यक्षदर्शियों को भी अपनी दास्तान बयां करने का अवसर दिया जाएगा जिन्होंने इस त्रासदी का संत्रास खुद झेला है।
अलग-अलग सत्रों में न्याय और पुनर्वास पर चर्चा
दिनभर चलने वाले इस कार्यक्रम को कई सत्रों में बांटा गया है। इनमें 1984 की घटनाओं, प्रशासनिक व कानूनी जांच में रह गई बुनियादी कमियों, षड्यंत्र के पहलुओं और प्रभावितों के पुनर्वास के लिए अब तक उठाए गए कदमों पर बारीकी से बात होगी। सम्मेलन के आखिरी सत्र में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब भाजपा के कई बड़े चेहरे शिरकत करेंगे।
4 नवंबर का यह सियासी टकराव दिखाता है कि राज्य में अभी से राजनीतिक जमीन तलाशने की होड़ शुरू हो चुकी है। कांग्रेस जहां मौजूदा सरकार की नाकामियों को उजागर कर मुख्य विपक्षी ताकत के तौर पर खुद को स्थापित करना चाहती है, वहीं भाजपा 1984 के ऐतिहासिक सिख नरसंहार की टीस को उभारकर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रही है।






















