मणिपुर में जारी सुरक्षा संकट और कानून व्यवस्था की जटिल चुनौतियों के बीच राज्य कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को नई दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय विचार-विमर्श में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी शामिल रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में लंबे समय से चली आ रही हिंसा, सामान्य जनजीवन को बहाल करने में आ रही कठिनाइयों और अगले वर्ष होने वाले मणिपुर विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी की सांगठनिक तैयारियों का आकलन करना था।
शीर्ष नेतृत्व के साथ गंभीर विषयों पर बातचीत
इस महत्वपूर्ण मंथन में मणिपुर कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता ओ. इबोबी सिंह, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र, मणिपुर के एआईसीसी प्रभारी सप्तगिरि शंकर उलाका और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा पार्टी महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल तथा प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष विक्टर कीशिंग और मंगा वैफेई ने भी राष्ट्रीय राजधानी में हुई इस बैठक में हिस्सा लिया। सभी नेताओं ने राज्य के मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में आवश्यक राजनीतिक और प्रशासनिक कदमों पर अपने विचार साझा किए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए प्रदेश अध्यक्ष कीशम मेघचंद्र ने बैठक के बिंदुओं की जानकारी दी। उन्होंने रेखांकित किया कि मुख्य ध्यान राज्य में मौजूदा कानून और व्यवस्था की स्थिति, लगातार जारी हिंसा तथा अशांति पर रहा। मेघचंद्र ने कहा, “मणिपुर का भविष्य और स्थायी शांति की बहाली हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है।” उन्होंने आगे कहा कि आगामी मणिपुर विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सांगठनिक मजबूती और चुनावी रणनीति तैयार करने को लेकर भी व्यापक विचार विमर्श किया गया है।
जवाबदेह शासन और शांति की मांग
बैठक के दौरान राज्य के नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि मणिपुर के नागरिक सुरक्षा, स्थिरता और एक पारदर्शी शासन प्रणाली के हकदार हैं। पार्टी पदाधिकारियों ने रेखांकित किया कि आम जनता की चिंताओं और आकांक्षाओं को हर पहल के केंद्र में रखा जाना चाहिए। स्थायी शांति की बहाली के बिना राज्य में आर्थिक और सामाजिक विकास को पटरी पर लाना संभव नहीं है, इसलिए सभी स्तरों पर जवाबदेही तय होना आवश्यक माना गया।
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर मई 2023 से ही गंभीर जातीय संघर्ष का सामना कर रहा है। घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और पहाड़ी इलाकों में बसे कुकी समुदाय के बीच भड़की हिंसा के कारण स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी रही है। इस जातीय संघर्ष में अब तक कम से कम 306 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 49 लोग लापता बताए गए हैं। इसके अलावा हजारों नागरिकों को अपना घर बार छोड़कर विस्थापित होने पर मजबूर होना पड़ा है। हाल के दिनों में कुकी और नगा समुदायों के बीच भी टकराव की घटनाएं सामने आई हैं, जिसने पूर्वोत्तर के इस राज्य में सुरक्षा बलों और प्रशासन की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है।



















