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सर्दियों में खाली पड़े कमरे से करें मशरूम की पैदावार, 85 फीसदी तक सब्सिडी दे रहा बागवानी महकमाहरियाणा
1 नव॰ 2026, 7:24 pm (5 दिन पहले)· 0

सर्दियों में खाली पड़े कमरे से करें मशरूम की पैदावार, 85 फीसदी तक सब्सिडी दे रहा बागवानी महकमा

अंबाला में किसानों को कम जगह में मशरूम उगाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जहां बुनियादी शेड से लेकर उन्नत लैब पर सरकारी सहायता और निशुल्क प्रशिक्षण मिल रहा है।

खेतों में रबी फसलों की बुआई के बीच ग्रामीण परिवारों के लिए घर के भीतर से अतिरिक्त आय जुटाने की ठोस राह तैयार हो रही है। बिना किसी बड़े खेत या उपजाऊ जमीन के, महज एक बंद कमरे अथवा छोटी सी कच्ची झोपड़ी के जरिए मशरूम उगाने का काम आसानी से खड़ा किया जा सकता है। उपभोक्ताओं की थाली में पनीर के विकल्प के रूप में मशरूम की बढ़ती खपत को देखते हुए अंबाला जिले का बागवानी महकमा काश्तकारों को इस दिशा में आगे लाने के लिए वित्तीय रियायतें और तकनीकी हुनर मुहैया करा रहा है।

सीजनल पैदावार या बारहमासी वातानुकूलित प्लांट

काश्तकार अपनी जेब और सहूलियत के आधार पर दो अलग-अलग मॉडलों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं। पहला ढांचा मौसमी उत्पादन का है, जिसे 20 गुणा 20 फुट के शेड अथवा बांस की झोपड़ी में खड़ा किया जा सकता है। साधारण रिहायशी कमरे में 100 से 150 बैग सजाकर भी इसका श्रीगणेश मुमकिन है। दूसरा प्रारूप वातानुकूलित यानी एसी संयंत्र का है, जिसमें तापमान को कृत्रिम तौर पर नियंत्रित रखकर पूरे बारह महीने नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है।

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अंबाला के जिला बागवानी अधिकारी डॉ. सत्यनारायण ने बताया कि "किसान मशरूम की खेती दो तरीकों से कर सकते हैं।" उनके अनुसार सामान्य मौसमी शेड तैयार करने पर लगभग 51 हजार रुपये का खर्च बैठता है। इस लागत पर पात्र उत्पादकों को 85 प्रतिशत तक की सरकारी रियायत दी जा रही है, जबकि सामान्य श्रेणी के आवेदकों को 50 प्रतिशत वित्तीय मदद का लाभ मिलता है।

आरक्षित वर्ग के लिए विशेष सहायता और बड़े प्रोजेक्ट

अनुसूचित जाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाले काश्तकारों के लिए विशेष राहत का ढांचा तय किया गया है। इसके अंतर्गत बांस की झोपड़ी के निर्माण हेतु 25,500 रुपये और फफूंद उगाने वाली ट्रे की खरीद पर 25,500 रुपये की सीधी आर्थिक मदद तय की गई है। दोनों मदों को मिलाकर इस वर्ग के पात्र किसान को कुल 51 हजार रुपये तक का सहयोग प्राप्त हो जाता है।

व्यावसायिक स्तर पर बड़ा उद्यम लगाने की सोच रखने वाले उद्यमियों के लिए भी रियायतें मौजूद हैं। मशरूम का बीज तैयार करने वाली स्पॉन लैब लगाने पर 40 प्रतिशत की दर से अनुदान दिया जाता है, जिसके प्रोजेक्ट की कुल लागत 15 लाख रुपये आंकी गई है। इसके समानांतर, 20-20 लाख रुपये के बजट वाले कंपोस्ट खाद यूनिट और प्रोडक्शन यूनिट पर भी 40 प्रतिशत की छूट देय है। किसान अपनी कार्यक्षमता के मुताबिक एक, दो या तीनों संयंत्रों को एक साथ स्थापित कर निरंतर आपूर्ति चक्र बहाल रख सकते हैं।

ग्रामीण इलाकों में बढ़ता दायरा और प्रशिक्षण की अनिवार्यता

जिले के साहा तथा सोलर इलाकों में काश्तकार खाद खुद तैयार करके उत्पादन लागत घटाने में जुटे हैं, जबकि बनाना क्षेत्र में भी कई लोग इस काम से जुड़ चुके हैं। योजना के नियमानुसार बैंक से मंजूर कर्ज की प्रक्रिया पूरी होने पर सब्सिडी की रकम दो अलग-अलग किस्तों में सीधे संबंधित ऋण खाते में भेजी जाती है। स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और मजदूरी के नए रास्ते खोलने में यह कवायद मददगार बन रही है।

अनुदान का लाभ हासिल करने के लिए इच्छुक व्यक्ति को कृषि विज्ञान केंद्र अथवा अन्य मान्यता प्राप्त संस्थानों से चार से पांच दिन का निशुल्क प्रशिक्षण सत्र पूरा कर प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है। इसके साथ ही प्रार्थी के पास फैमिली आईडी होनी चाहिए और बागवानी विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर डिजिटल पंजीकरण होना जरूरी है। आवेदन की औपचारिकताएं विभागीय वेबसाइट के जरिए अथवा सीधे जिला कार्यालय पहुंचकर पूरी की जा सकती हैं।

सवाल-जवाब

मशरूम उत्पादन के लिए शेड तैयार करने पर कितना अनुमानित खर्च आता है?
मौसमी मशरूम की खेती के लिए 20 गुणा 20 फुट का शेड बनाने में लगभग 51 हजार रुपये का खर्च आता है।
सामान्य और आरक्षित वर्ग के किसानों को शेड पर कितनी सब्सिडी मिलती है?
सामान्य वर्ग को 50 प्रतिशत तथा पात्र किसानों को 85 प्रतिशत तक सहायता मिलती है, जिसमें अनुसूचित जाति के किसानों को झोपड़ी और ट्रे के लिए कुल 51 हजार रुपये का प्रावधान है।
मशरूम बीज प्रयोगशाला यानी स्पॉन लैब के प्रोजेक्ट पर कितनी मदद दी जा रही है?
स्पॉन लैब के लिए 15 लाख रुपये की लागत तय की गई है, जिस पर सरकार द्वारा 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जाता है।
कंपोस्ट और प्रोडक्शन यूनिट लगाने की परियोजना लागत क्या है?
मशरूम कंपोस्ट यूनिट और प्रोडक्शन यूनिट के लिए 20-20 लाख रुपये का प्रोजेक्ट निर्धारित है, जिस पर 40 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है।
सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए कौन सा प्रशिक्षण लेना जरूरी है?
कृषि विज्ञान केंद्र या मान्यता प्राप्त संस्थानों से चार से पांच दिन की निशुल्क ट्रेनिंग पूरी करके प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य है।
अनुदान के लिए आवेदन करते समय किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है?
आवेदक के पास प्रशिक्षण प्रमाण पत्र, फैमिली आईडी और बागवानी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर डिजिटल पंजीकरण होना अनिवार्य है।
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टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·4 दिन पहले

हमारे एक पड़ोसी ने पिछले साल कमरे में ही मशरूम उगाए थे। शुरुआत में थोड़ा डर था कि खराब न हो जाएं, पर बाद में अच्छी कमाई हो गई।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

अंबाला के किसानों के लिए तो सर्दियों में खाली कमरों से कमाई का बढ़िया जरिया बन रहा है। 85 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलने से लागत की चिंता काफी हद तक कम हो जाती है। बस यह देखना बाकी है कि छोटे शहरों और गांवों के किसान इस तकनीक को खुद अपनाने में कितने कामयाब होते हैं और बाजार में इसकी सही कीमत कितनी मिलती है?

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

अर्जुन जी, बात तो सही है आपकी। वैसे भी कृषि स्टार्टअप्स और एग्री-टेक में ऐसी सब्सिडी से छोटे किसानों को शुरुआती रिस्क लेने में काफी मदद मिल जाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

सर्दियों में खाली कमरों का ऐसा इस्तेमाल बढ़िया है। सरकारी मदद मिलने से छोटे किसानों के लिए हाथ आजमाना आसान हो जाएगा, खासकर कम जगह वालों के लिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

रोहन भाई, बात तो सही है। वैसे भी खाली कमरों का गलत इस्तेमाल रोकने और किसानों को अतिरिक्त कमाई देने के लिए यह बढ़िया कदम है।

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