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सत्य निकेतन हादसे ने खोली पोल, दिल्ली में मंजिलों की सीमा को लेकर हैं ये सख्त नियमभारत
7 सित॰ 2026, 1:34 pm (53 दिन पहले)· 2

सत्य निकेतन हादसे ने खोली पोल, दिल्ली में मंजिलों की सीमा को लेकर हैं ये सख्त नियम

दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को गिरी पांच मंजिला अवैध हॉस्टल बिल्डिंग में अब तक 7 छात्रों की मौत हो चुकी है और 12 को बचाया गया है, इस हादसे के बाद जानिए राजधानी में मकान की मंजिलों और ऊंचाई को लेकर क्या नियम हैं।

राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जब एक पांच मंजिला हॉस्टल की इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इस हादसे में अब तक सात छात्रों की जान जा चुकी है, जबकि कई घायल छात्रों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे अब भी कुछ छात्र दबे हो सकते हैं, इसी वजह से राहत और बचाव टीमें युद्धस्तर पर काम में जुटी हुई हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि यह इमारत बिना जरूरी मंजूरियों के, यानी पूरी तरह अवैध तरीके से खड़ी की गई थी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि आखिर राजधानी में मकान बनवाते वक्त मंजिलों की संख्या और ऊंचाई को लेकर कानून असल में कहते क्या हैं।

प्लॉट के आकार पर टिकी है मंजिलों की गिनती

दिल्ली के भवन उपनियमों के मुताबिक अगर किसी प्लॉट का आकार 50 वर्ग मीटर से बड़ा है, तो मालिक अधिकतम पांच मंजिल तक निर्माण करवा सकता है। लेकिन इसके साथ एक शर्त जुड़ी हुई है, ग्राउंड फ्लोर पर स्टिल्ट पार्किंग बनवाना अनिवार्य है। अगर कोई परिवार स्टिल्ट पार्किंग नहीं बनवाना चाहता, तो उसे चार मंजिल तक ही सीमित रहना पड़ेगा। इसके अलावा नियमों में यह भी साफ तौर पर तय है कि पूरी इमारत की ऊंचाई किसी भी सूरत में 17.5 मीटर, यानी करीब 57.4 फीट से ज्यादा नहीं हो सकती। यही ऊंचाई सीमा तय करती है कि जमीन कितनी भी बड़ी क्यों न हो, इमारत मनमाने ढंग से ऊपर नहीं बढ़ सकती और शहर के भवन ढांचे में एक तरह का संतुलन बना रहता है।

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छोटे प्लॉट वालों के लिए सीमाएं और सख्त

वहीं जिन लोगों के पास 50 वर्ग मीटर से छोटा प्लॉट है, उनके लिए दायरा और तंग हो जाता है। ऐसे प्लॉट पर ग्राउंड फ्लोर के अलावा सिर्फ दो और मंजिलें, यानी कुल मिलाकर तीन मंजिल तक ही निर्माण की इजाजत मिलती है। यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि घनी बसी संकरी गलियों और छोटे प्लॉट पर ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी होकर सुरक्षा और भीड़भाड़ जैसी दिक्कतें पैदा न करें।

बिना नक्शा पास कराए बना मकान माना जाता है अवैध

दिल्ली में कोई भी नया घर बनवाने से पहले नगर निगम, यानी MCD से नक्शा पास कराना एक अनिवार्य कदम है। जो लोग बिना नक्शा पास कराए निर्माण कर लेते हैं, उनकी इमारत कानूनी तौर पर अवैध मानी जाती है और ऐसे ढांचों पर आगे चलकर ध्वस्तीकरण जैसी सख्त कार्रवाई भी हो सकती है। इसके साथ ही निर्माण के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण, यानी DDA से भी मंजूरी लेनी होती है। कई मामलों में फायर विभाग से भी NOC लेना जरूरी होता है और Dust Control पोर्टल पर पंजीकरण कराना भी इस पूरी प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा है। सत्य निकेतन में गिरी इमारत के बारे में बताया जा रहा है कि यह इन्हीं जरूरी मंजूरियों को दरकिनार कर बनाई गई थी, जिसकी वजह से हादसे के बाद पूरा निगरानी तंत्र सवालों के घेरे में आ गया है।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, मुख्यमंत्री ने दी चेतावनी

हादसे वाली जगह से अब तक 12 छात्रों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता खुद मौके पर पहुंचीं और बचाव अभियान की पल-पल की जानकारी लेती रहीं। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी अधिकारी इस अवैध निर्माण के लिए जिम्मेदार पाए जाएंगे, उन सभी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटनास्थल पर बचाव दल, फायर ब्रिगेड और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार मलबा हटाने में जुटी हैं, ताकि अगर कोई छात्र अब भी अंदर फंसा हो तो उसे जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।

सवाल-जवाब

सत्य निकेतन हादसे में अब तक कितनी मौतें हुई हैं?
अब तक 7 छात्रों की मौत हो चुकी है, जबकि कुछ घायलों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
यह हादसा कब और कहां हुआ?
रविवार को दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पांच मंजिला हॉस्टल की इमारत ढह गई।
बिल्डिंग गिरने की वजह क्या बताई जा रही है?
हादसे के वक्त बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था और यह इमारत अवैध तरीके से बनी हुई थी, पूरी वजह की जांच जारी है।
अब तक कितने छात्रों को बचाया गया है?
12 छात्रों को मलबे से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है।
50 वर्ग मीटर से बड़े प्लॉट पर दिल्ली में कितनी मंजिल बना सकते हैं?
स्टिल्ट पार्किंग होने पर अधिकतम 5 मंजिल, बिना स्टिल्ट पार्किंग सिर्फ 4 मंजिल की इजाजत है।
50 वर्ग मीटर से छोटे प्लॉट के लिए क्या नियम है?
ऐसे प्लॉट पर ग्राउंड फ्लोर सहित अधिकतम 3 मंजिल तक ही निर्माण की इजाजत है।
दिल्ली में मकान की अधिकतम ऊंचाई सीमा कितनी है?
मकान की ऊंचाई 17.5 मीटर, यानी लगभग 57.4 फीट से ज्यादा नहीं हो सकती।
दिल्ली में घर बनवाने के लिए कौन-कौन सी मंजूरियां जरूरी हैं?
MCD से नक्शा पास कराना, DDA से अनुमति, कुछ मामलों में फायर विभाग से NOC और Dust Control पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन जरूरी होता है।
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