दीमापुर पुलिस ने आगामी त्योहारों के मद्देनजर पटाखों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए एक नई एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत दीमापुर, चुमौकेदिमा और नियूलैंड जिलों में दीपावली और गुरुपर्व के अवसर पर केवल रात 8 बजे से 10 बजे के बीच ही पटाखे जलाने की अनुमति दी जाएगी।
बुधवार को दीमापुर के पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी इस निर्देश में स्थानीय नागरिकों से अपील की गई है कि वे त्योहारों को जिम्मेदारी से मनाएं और पर्यावरण अनुकूल तरीकों को अपनाएं ताकि वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम किया जा सके। तय नियमों के अनुसार, क्रिसमस की पूर्व संध्या और नए साल की पूर्व संध्या पर रात 11:55 बजे से रात 12:30 बजे तक ही आतिशबाजी करने की छूट दी गई है।
पुलिस ने अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, शैक्षणिक संस्थानों, अदालतों और धार्मिक स्थलों से 100 मीटर के दायरे में आने वाले सभी क्षेत्रों को साइलेंस जोन घोषित किया है और वहां किसी भी तरह के पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इसके अलावा ऐसे पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर भी रोक रहेगी जिनका आवाज स्तर चार मीटर की दूरी से मापने पर 125 डीबीए या 145 डीबीसी पीक से अधिक हो।
ऑनलाइन बाजार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इन तीनों जिलों के भीतर पटाखों के किसी भी ऑर्डर को प्रोसेस न करें और न ही उनकी होम डिलीवरी करें। यदि कोई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म प्रतिबंधित पटाखों की डिलीवरी करते पाया गया तो उसके खिलाफ प्रासंगिक कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
केवल उन्हीं व्यापारियों को अनुमत ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति दी जाएगी जिनके पास वैध लाइसेंस और परमिट होंगे। घनी आबादी वाले इलाकों में व्यक्तिगत रूप से पटाखे जलाने की बजाय स्थानीय प्रशासन द्वारा चिह्नित खुले मैदानों में आयोजित होने वाले सामुदायिक आतिशबाजी कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए नागरिकों को प्रोत्साहित किया गया है ताकि प्रदूषण और भीड़भाड़ पर नियंत्रण रखा जा सके।
पुलिस कमिश्नर ने सभी थानों के प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में कड़ी नजर रखें, स्थानीय बाजारों का नियमित निरीक्षण करें और इन नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराएं। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई की जाएगी और जनता से अपील की गई है कि वे त्योहारों के दौरान जनस्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा को प्राथमिकता दें।





















