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शांति हमारी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत है, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी मुल्क को चेतायाभारत
27 सित॰ 2026, 4:16 pm (27 मिनट पहले)· 0

शांति हमारी कमजोरी नहीं बल्कि ताकत है, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी मुल्क को चेताया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि भारत शांति का समर्थक है लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। उन्होंने आतंकवाद को लेकर पड़ोसी देशों को कड़ी चेतावनी दी और देश के बढ़ते रक्षा सामर्थ्य पर प्रकाश डाला।

देश की रक्षा नीति को स्पष्ट करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत शांति के रास्ते पर चलने में अटूट विश्वास रखता है, लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि देश अपनी सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता कर लेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि संवाद और बातचीत से हर समस्या का हल निकाला जा सकता है, बशर्ते सामने वाला देश आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद करे। यदि पड़ोसी मुल्क आतंकवाद को अपनी राज्य नीति बनाए रखेगा, तो भारत भी अपनी रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने के वास्ते पूरी तरह से स्वतंत्र रहेगा।

आतंकवाद और कूटनीति पर दो टूक संदेश

राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला देते हुए शंघाई सहयोग संगठन की बैठक का जिक्र किया और कहा कि जो राष्ट्र आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं और आतंकियों को संरक्षण देते हैं, उन्हें यह कड़ा संदेश देना जरूरी है कि आतंकवाद कभी भी किसी की रणनीतिक संपत्ति नहीं हो सकता। भारत सभी देशों के साथ सहयोग और सम्मानजनक संबंध चाहता है, लेकिन यह कभी भी राष्ट्रीय हितों की कीमत पर नहीं हो सकता। देश वैश्विक स्थिरता का समर्थक है, पर अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को ताक पर रखकर ऐसा नहीं किया जाएगा।

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शांति और कमजोरी में बड़ा अंतर

रक्षामंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत किसी भी देश की जमीन पर कब्जा करने की मंशा नहीं रखता और न ही वह किसी को धमकाना चाहता है। देश युद्ध की बजाय आपसी सद्भाव और सामूहिक सुरक्षा के मूल्यों में विश्वास करता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि शांति और कमजोरी के बीच एक स्पष्ट रेखा होती है। भारत शांत रहना जानता है, मगर जरूरत पड़ने पर अपनी सुरक्षा के लिए कड़े निर्णय लेने से पीछे नहीं हटेगा।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और नए उद्यम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि देश के रक्षा संस्थानों में अभूतपूर्व बदलाव आए हैं। डीआरडीओ अब केवल एक अनुसंधान केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यह उद्योगों, विश्वविद्यालयों, वैज्ञानिकों और नए उद्यमों को जोड़ने वाला एक राष्ट्रीय मंच बन चुका है। रक्षा मंत्रालय ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों और नए उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए 2400 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदारी को मंजूरी दी है। इसके अलावा 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाएं अत्याधुनिक तकनीक के विकास के लिए स्वीकृत की गई हैं।

युवाओं की भूमिका और रक्षा गलियारे

देश के युवा आज एआई, मानव रहित विमान, रोबोटिकी, क्वांटम तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अभूतपूर्व योगदान दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बनाए जा रहे रक्षा औद्योगिक गलियारों में लगभग 70,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं, जिनमें से करीब 10,000 करोड़ रुपए का निवेश धरातल पर उतर चुका है। भारतीय रक्षा उत्पाद आज दुनिया के 100 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं, जिसमें एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप के देश शामिल हैं। इसके अलावा सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता घटाने के लिए राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की शुरुआत की गई है।

सामूहिक विकास और आंतरिक सुरक्षा

भारत के उभार का उद्देश्य किसी अन्य राष्ट्र को पछाड़ना या वैश्विक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि यह सामूहिक और समावेशी विकास पर केंद्रित है। आंतरिक सुरक्षा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सीमाओं की रक्षा करना केवल जवानों का दायित्व नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का सामूहिक कर्तव्य है। समाज में जाति, धर्म, भाषा या क्षेत्र के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए और हर नागरिक को राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखना चाहिए। अंत में उन्होंने दोहराया कि भारत ग्लोबल साउथ के देशों के हितों की रक्षा के लिए हमेशा उनके साथ खड़ा है।

सवाल-जवाब

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शांति को लेकर क्या बयान दिया है?
उन्होंने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है और युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपनी सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
आतंकवाद के मुद्दे पर सरकार का क्या रुख है?
भारत का स्पष्ट रुख है कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति बनाते हैं, उनके साथ बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है और भारत हर तरह की कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है।
रक्षा मंत्रालय ने नए उद्यमों के लिए कितनी राशि स्वीकृत की है?
रक्षा मंत्रालय ने नए उद्यमों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से 2400 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदारी को मंजूरी दी है।
रक्षा गलियारे किन राज्यों में बनाए जा रहे हैं?
उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं।
भारतीय रक्षा उत्पादों का निर्यात कितने देशों तक पहुंच रहा है?
भारतीय रक्षा उत्पाद वर्तमान में एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप सहित दुनिया के 100 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·12 मिनट पहले

यूपी और तमिलनाडु के डिफेंस कॉरिडोर में सत्तर हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव आना वाकई बहुत बड़ी बात है।

Ravikash Gupta@ravikash·12 मिनट पहले

करण भाई, यूपी-तमिलनाडु के डिफेंस कॉरिडोर वाले सत्तर हजार करोड़ के आंकड़े ने वाकई चौंकाया है, निवेश जमीन पर भी उतर रहा है।

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