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शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश, सीजेआई सूर्यकांत बोले पुलिस कार्रवाई का औचित्य नहींभारत
27 जुल॰ 2026, 12:37 pm (66 दिन पहले)· 1

शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त संदेश, सीजेआई सूर्यकांत बोले पुलिस कार्रवाई का औचित्य नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को संवैधानिक गारंटी बताते हुए पुलिस ज्यादतियों पर चिंता जताई है। शीर्ष अदालत ने देशभर के लिए एक समान प्रदर्शन प्रोटोकॉल बनाने का संकेत दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि नागरिक अधिकार के तौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संविधान द्वारा दी गई पूर्ण गारंटी है, जिसे रोका नहीं जा सकता। अदालत ने संकेत दिए हैं कि वह देश भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को व्यवस्थित करने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर का प्रोटोकॉल तैयार करने पर विचार कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत प्रदर्शनकारियों के लिए स्थान निर्धारित किए जाएंगे, जबकि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटने की छूट दी जाएगी।

संवैधानिक संरक्षण और राष्ट्रीय प्रोटोकॉल की आवश्यकता

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले पर विचार-विमर्श किया। सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की, "शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान में पूरी तरह से गारंटीकृत है और इसे नकारा नहीं जा सकता।" अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि केवल किसी आंदोलन या प्रदर्शन का होना पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग या ज्यादती को सही ठहराने का आधार नहीं बन सकता।

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मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जब लोग शांतिपूर्वक अपनी मांग रखना चाहते हैं, तो उनके लिए एक तय नियम और स्थान होना चाहिए। इससे प्रदर्शनकारियों को बिना किसी रुकावट के अपनी बात कहने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, यदि प्रदर्शन के दौरान कोई असामाजिक तत्व माहौल खराब करने की कोशिश करता है, तो प्रशासन उससे निपटने के लिए स्वतंत्र रहेगा।

छात्र प्रदर्शन और लाठीचार्ज के खिलाफ याचिकाएं

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर की गई याचिकाएं मुख्य रूप से NEET-UG पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली तथा परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में उतरे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़ी थीं। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर पुलिस अधिकारियों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

छात्रों पर कथित हमलों के जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन, कॉलिन गोंसाल्वेस और विकास सिंह ने पीठ के समक्ष दलीलें रखीं। उन्होंने अदालत से मांग की कि शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे छात्रों पर बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।

सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा और बेकाबू भीड़ की हिंसा पर चिंता

पुलिस की कार्रवाई की समीक्षा करने के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों पर होने वाले हमलों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। एक अन्य याचिका का उल्लेख करते हुए वकील ने अदालत को अवगत कराया कि उपद्रवी तत्वों की भीड़ ने पुलिसकर्मियों और उनके परिजनों को निशाना बनाया, जिससे कई जवान घायल हुए।

इस पहलू पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, "पुलिसकर्मियों को चोट पहुंचना भी उतनी ही चिंता का विषय है।" उन्होंने संकेत दिया कि अदालत राज्यों से यह जवाब मांग सकती है कि ड्यूटी पर तैनात जवानों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए गए। पीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय प्रोटोकॉल में प्रदर्शनकारियों के अधिकारों के साथ-साथ सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा को भी समान प्राथमिकता दी जाएगी।

समग्र दृष्टिकोण और मंगलवार को अगली सुनवाई

शीर्ष अदालत ने दोहराया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों और उनसे जुड़े विवादों से निपटने के लिए पूरे देश में एक समान व्यवस्था लागू करना आवश्यक है। दिशानिर्देश तैयार करने से राज्यों के बीच एकरूपता आएगी और कानून का अनुपालन सुनिश्चित होगा। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर मंगलवार को पुनः सुनवाई करेगा, जिसमें प्रोटोकॉल की रूपरेखा और संबंधित पक्षों की दलीलों पर आगे विचार किया जाएगा।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के बारे में क्या कहा?
अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान द्वारा गारंटीकृत है जिसे नकारा नहीं जा सकता और प्रदर्शनों के नाम पर पुलिस की ज्यादती सही नहीं ठहराई जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट किस तरह के प्रोटोकॉल पर विचार कर रहा है?
कोर्ट देश भर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए एक समान राष्ट्रीय प्रोटोकॉल बनाने पर विचार कर रहा है, जिसमें प्रदर्शन के लिए तय स्थान और असामाजिक तत्वों से निपटने के नियम शामिल होंगे।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कैसे पहुंचा?
NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की अनियमितताओं का विरोध कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों की सुरक्षा पर क्या कहा?
पीठ ने प्रदर्शनों के दौरान पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों पर होने वाले हमलों पर चिंता जताई और कहा कि जवानों को चोट पहुंचना भी गंभीर मामला है।
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