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श्रीनगर के दुर्बल में आधी रात भड़की आग से 80 झोपड़ियां खाक, दो लोगों ने गंवाई जानजम्मू-कश्मीर
4 नव॰ 2026, 10:55 am (2 दिन पहले)· 0

श्रीनगर के दुर्बल में आधी रात भड़की आग से 80 झोपड़ियां खाक, दो लोगों ने गंवाई जान

बेमिना के दुर्बल इलाके में आधी रात अचानक भड़की भीषण आग ने 80 अस्थायी झोपड़ियों को राख कर दिया, जिसमें दो लोगों की जान चली गई।

जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर स्थित बेमिना के दुर्बल क्षेत्र में आधी रात को अचानक भड़की लपटों ने भारी तबाही मचाई। तीन और चार नवंबर के बीच की रात लगभग 12:23 बजे शुरू हुई इस तबाही ने देखते ही देखते पूरी बस्ती को अपने आगोश में ले लिया। इस दर्दनाक हादसे में कचरा बीनकर गुजर-बसर करने वाले दो कामगारों की जान चली गई, जबकि करीब 80 कच्चे आशियाने पूरी तरह जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गए।

लकड़ी और तिरपाल के कारण तेजी से भड़की लपटें

दुर्बल की यह घनी बस्ती मुख्य रूप से लकड़ी के तख्तों, बांस और तिरपाल के सहारे खड़ी की गई थी। मौके पर भारी मात्रा में अत्यधिक ज्वलनशील वस्तुएं मौजूद थीं, जिस वजह से चिंगारी भड़कते ही आग ने अत्यंत विकराल रूप धारण कर लिया। जब तक स्थानीय निवासी कुछ समझ पाते या राहत बचाव के लिए कोई सूचना बाहर भेजते, तब तक लपटें एक छप्पर से दूसरे छप्पर में तेजी से फैल चुकी थीं। इस भीषण तपन की चपेट में आकर पास में बना एक गैर-आबाद पोल्ट्री फार्म भी बुरी तरह झुलस गया और पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

कई दमकल केंद्रों ने मिलकर चलाया राहत अभियान

घटना की जानकारी मिलते ही जेवीसी और रावलपोरा अग्निशमन केंद्रों के कर्मी फौरन मौके के लिए रवाना हुए। आग की भयावहता को देखते हुए बटामालू स्थित फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज मुख्यालय से भी अतिरिक्त दमकल गाड़ियां और विशेष बचाव दस्ते घटनास्थल पर भेजे गए। इस वृहद राहत अभियान का नेतृत्व श्रीनगर के डिप्टी डायरेक्टर कमांड और मोबिलाइजिंग ऑफिसर एजाज अहमद शाह ने किया। डीएफओ सिटी तथा डीएफओ मुख्यालय के परस्पर तालमेल के साथ कई फायर स्टेशनों के दमकलकर्मियों ने घंटों पानी की बौछारें कर स्थिति पर नियंत्रण पाया।

मलबे से बरामद हुए दो जले हुए शव

ज्वाला शांत होने के उपरांत जब बचाव दलों ने राख और मलबे की सघन छानबीन शुरू की, तो वहां से दो अत्यंत बुरी तरह झुलसे हुए शव बरामद किए गए। पड़ताल के बाद मृतकों की शिनाख्त दिल्ली के मूल निवासी 27 वर्षीय मोहम्मद नूर आलम (पुत्र अब्दल वहाब) और 16 वर्षीय किशोर अल अमीन (पुत्र मोहम्मद रफी) के रूप में हुई। मोहम्मद नूर आलम दुर्बल में ही रहकर कबाड़ बीनते थे, जबकि मूल रूप से दिल्ली के निवासी अल अमीन वर्तमान में कुपवाड़ा में डेरा डाले हुए थे।

फॉरेंसिक जांच और कानूनी प्रक्रियाएं जारी

फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की तकनीकी टीम ने घटनास्थल का विस्तृत मुआयना किया और साक्ष्य जुटाए। इसके बाद औपचारिक कानूनी कार्रवाई पूरी करते हुए दोनों शवों को स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि शव परीक्षण की प्रक्रिया संपन्न होने के पश्चात पार्थिव शरीरों को उनके परिजनों को सौंप दिया जाएगा, साथ ही इस भीषण अग्निकांड के कारणों का पता लगाने के लिए आधिकारिक जांच शुरू कर दी गई है। इससे पूर्व अक्टूबर माह में भी जम्मू रेलवे स्टेशन के सामने स्थित शिवा मार्केट में भीषण आग लगी थी, जिसमें 35 से 40 दुकानें जलकर स्वाहा हो गई थीं।

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सवाल-जवाब

श्रीनगर में आगजनी की यह घटना कब और कहां हुई?
यह हादसा 3 और 4 नवंबर की दरमियानी रात करीब 12:23 बजे श्रीनगर के बेमिना स्थित दुर्बल इलाके में हुआ।
इस अग्निकांड में कितने लोग हताहत हुए?
आग में झुलसकर दो लोगों की मौत हो गई, जिनकी पहचान 27 वर्षीय मोहम्मद नूर आलम और 16 वर्षीय अल अमीन के रूप में हुई।
हादसे में कुल कितना नुकसान हुआ है?
करीब 80 अस्थायी झोपड़ियां पूरी तरह जलकर खाक हो गईं और पास में स्थित एक खाली पोल्ट्री फार्म भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
आग पर काबू पाने के लिए किन केंद्रों से मदद बुलाई गई?
राहत कार्य के लिए जेवीसी, रावलपोरा और बटामालू स्थित मुख्यालय से दमकल गाड़ियां और विशेष टीमें मौके पर भेजी गईं।
जांच को लेकर प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य एकत्र किए हैं और पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·2 दिन पहले

आधी रात को इतनी जल्दी 80 झोपड़ियां जल गईं, यह बात थोड़ी अजीब लगती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

आधी रात को अचानक आग लगने से दो गरीबों की जान चली गई, बहुत बुरा हुआ।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

अर्जुन, बात गरीबों की जान जाने की तो सही है, पर आधी रात को अचानक आग लगने वाली बात पर पूरा यकीन नहीं होता।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

आधी रात को ऐसी भयानक आग और दो लोगों की जान जाना बेहद दुखद है। कबाड़ बीनने वाले गरीबों के आशियाने जलने से उनके सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन को तुरंत इनकी मदद करनी चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

रोहन भाई, मदद तो मिलनी ही चाहिए, पर सवाल यह है कि आधी रात को लकड़ी और तिरपाल की इस बस्ती में अचानक आग लगी कैसे?

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