राजस्थान के सीकर जिले के स्मृति वन ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है, जिसने इस क्षेत्र को वैश्विक पटल पर एक अलग पहचान दिला दी है। इस स्थान पर एक विशाल मेटल पर्गोला वॉकवे का निर्माण किया गया है जो अपनी अनूठी बनावट और हरियाली के कारण खासी चर्चा में है। यह संरचना जीवित हरी बेलों से पूरी तरह आच्छादित है और इसकी लंबाई 685.393 मीटर मापी गई है। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने इस अनूठे प्रोजेक्ट को जीवित हरी बेलों से ढके सबसे लंबे मेटल पर्गोला वॉकवे के रूप में मान्यता दी है। इस विशाल निर्माण को खड़ा करने में लगभग 20,736.82 किलोग्राम लोहे का इस्तेमाल किया गया है और इसकी ऊंचाई 4.76 मीटर से लेकर 4.88 मीटर तक है। इस पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने वाले शख्स सेवानिवृत्त चिकित्सक डॉक्टर विनोद कुमार जैन हैं, जिन्होंने कई वर्षों के निरंतर समर्पण और परिश्रम के बाद इसे मूर्त रूप दिया है।
माता की स्मृति से जुड़ा भावनात्मक सफर
इस अद्भुत ग्रीन वॉकवे के पीछे की कहानी बेहद प्रेरणादायक और भावनात्मक है। डॉक्टर विनोद कुमार जैन ने इस पर्गोला के निर्माण कार्य की शुरुआत 27 जून 2021 को की थी। यह विशेष तारीख उनकी माताजी की पुण्यतिथि से जुड़ी हुई है, जिनका निधन 27 जून 1981 को हुआ था। डॉक्टर जैन ने अपनी मां की याद को चिरस्थाई बनाने के लिए इस बड़े प्रोजेक्ट को प्रकृति संरक्षण की दिशा में आगे बढ़ाया। मां के प्रति अगाध श्रद्धा और पर्यावरण प्रेम का यह संगम अब सीकर के स्मृति वन की पहचान बन चुका है, जहां प्रकृति और भावनाओं का अनूठा मेल देखने को मिलता है।
नागरिकों के लिए उपयोगी और छायादार मार्ग
तैयार किया गया यह लगभग 685 मीटर लंबा वॉकवे केवल एक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम जनता के लिए बेहद उपयोगी जनसुविधा भी साबित हो रहा है। तेज धूप और गर्मी से राहत पाने के साथ-साथ लोग यहां सुकून से टहल सकते हैं, जॉगिंग कर सकते हैं, मॉर्निंग वॉक का आनंद ले सकते हैं, मैराथन आयोजित कर सकते हैं और विभिन्न खेल गतिविधियों में हिस्सा ले सकते हैं। लोहे के मजबूत ढांचे पर प्राकृतिक रूप से विकसित हुई हरी बेलें इस पर एक जीवंत छत का अहसास कराती हैं, जिससे स्मृति वन की प्राकृतिक सुंदरता में भी कई गुना वृद्धि हो गई है।
प्रशासन और स्थानीय सहयोग से मिली सफलता
सीकर के स्मृति वन के इस समग्र विकास और रिकॉर्ड की इस शानदार श्रृंखला के पीछे कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस कार्य में विधायक और पूर्व मंत्री राजेंद्र पारीक के विशेष प्रयासों के साथ-साथ वन विभाग और जिला प्रशासन ने भी पूरा सहयोग प्रदान किया। प्रमाणीकरण के एक विशेष समारोह के दौरान कलेक्टर आशीष मोदी और उप वन संरक्षक प्रदीप कुमार ने आधिकारिक प्रमाण-पत्र प्राप्त किए। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की तरफ से प्रतिनिधि भुवनेश माथुरिया ने यह प्रमाण-पत्र सौंपे। इस बड़ी उपलब्धि के साथ ही डॉक्टर विनोद कुमार जैन के नाम पहले से ही पांच इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स भी दर्ज हो चुके हैं, जो उनकी रचनात्मकता को दर्शाते हैं।
डॉक्टर जैन के अन्य अनूठे निर्माण कार्य
रिकॉर्ड कायम करने का यह सिलसिला डॉक्टर जैन के लिए कोई नया नहीं है। इससे पहले भी वे कई ऐसे कार्य कर चुके हैं जो अपने आप में अनूठे हैं। अहिंसा स्थल पर बने जर्मन सिल्वर के सर्वधर्म द्वार पर कुल 30 धर्मों के नाम और प्रतीक उकेरे गए हैं। इसके अलावा अहिंसा स्थल पर ही संगमरमर के पत्थरों पर 84 अलग-अलग प्रकार के स्वास्तिक चिह्न बनाए गए हैं। स्मृति वन के भीतर ही एक ही परिसर में धार्मिक महत्व रखने वाले एक हजार से अधिक पीपल के पौधे लगाए गए हैं। साथ ही राजकीय साइंस कॉलेज का इलिप्टिकल गेट भारत में सबसे ऊंचा बताया जाता है, जिसकी अपनी एक अलग विशेषता है। कॉलेज की बाहरी दीवार पर विज्ञान के तमाम सिद्धांतों और फार्मूलों को उकेरकर उसे एक ज्ञानवर्धक और विशाल दीवार के रूप में विकसित किया गया है। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में सबसे लंबे पर्गोला का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड नीदरलैंड्स के पास दर्ज है।





















