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सिरोही के मगरीवाड़ा में कुदरत ने तराशी गणपति की छवि, 1200 फीट ऊंची पहाड़ी बनी आस्था का केंद्रराजस्थान
19 सित॰ 2026, 2:30 pm (6 दिन पहले)· 1

सिरोही के मगरीवाड़ा में कुदरत ने तराशी गणपति की छवि, 1200 फीट ऊंची पहाड़ी बनी आस्था का केंद्र

राजस्थान के सिरोही जिले में अरावली की 1200 फीट ऊंची पहाड़ी पर चट्टानों की प्राकृतिक बनावट से भगवान गणेश का स्वरूप उभरता है, जहां स्थित गुफा में प्राचीन आपेश्वर महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।

राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर उपखंड में स्थित मगरीवाड़ा गांव इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अरावली की सुरम्य पर्वत श्रृंखलाओं के बीच लगभग 1200 फीट ऊंची एक पहाड़ी पर चट्टानों की प्राकृतिक संरचना बिल्कुल भगवान गणेश के स्वरूप जैसी दिखाई देती है। इस विशाल स्वरूप को किसी मूर्तिकार ने छैनी या हथौड़े से नहीं गढ़ा, बल्कि यह पूरी तरह कुदरती बनावट की देन है। पहाड़ी की चट्टानों में भगवान गणेश के मस्तक, सूंड, कान और उनके विशाल उदर का आकार इतनी स्पष्टता से दिखाई देता है कि तीन से चार किलोमीटर की दूरी से भी लोग इस अलौकिक छवि को आसानी से पहचान लेते हैं।

चरवाहों ने सबसे पहले देखा था यह प्राकृतिक स्वरूप

मंडार के रहने वाले श्रद्धालु रामसिंह के अनुसार, इस क्षेत्र में कई छोटी-बड़ी पहाड़ियां फैली हुई हैं, जिन्हें स्थानीय बोली में 'मगरी' पुकारा जाता है। इन्हीं पहाड़ियों की बहुलता के कारण इस गांव की पहचान मगरीवाड़ा के रूप में स्थापित हुई। पहाड़ी पर बने इस अनूठे स्वरूप को लोग 'मगरी वाले गणेश' के नाम से पूजते हैं। पुराने दौर में जब चरवाहे अपनी बकरियां चराने इन दुर्गम टीलों पर जाते थे, तब उनकी नजर चट्टानों की इस खास बनावट पर पड़ी थी। समय बीतने के साथ यह खबर आसपास फैली और यह स्थल एक बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित हो गया। साल 2006 से श्रद्धालुओं की एक अटूट परंपरा शुरू हुई, जिसके तहत हर साल लोग पथरीले रास्तों की चढ़ाई पूरी कर पहाड़ी के शिखर पर ध्वजा फहराते हैं।

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प्राचीन गुफा में स्थापित है आपेश्वर महादेव मंदिर

इस पावन पहाड़ी पर एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है, जिसके भीतर आपेश्वर महादेव का मंदिर स्थापित है। यह शांत और एकांत स्थल लंबे समय से तपस्वियों की साधना स्थली रहा है। करीब 80 वर्ष पहले यहां के प्रतिष्ठित संत मुनिजी महाराज ने इसी गुफा के भीतर लगातार 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र स्थल के दर्शन मात्र से भक्तों के समस्त संकट दूर हो जाते हैं और उनके घरों में सुख, शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

सालाना विशेष पूजा और दूर-दराज से पहुंचते श्रद्धालु

धार्मिक परंपरा के तहत हर वर्ष रावल पुजारी ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधि और स्थानीय ग्रामीण पहाड़ी की चोटी पर जाकर पारंपरिक रीति-रिवाज से विशेष पूजा-अर्चना संपन्न करते हैं। मगरीवाड़ा गांव के अलावा रेवदर, मंडार तथा आसपास के अनेक इलाकों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु यहां मत्था टेकने आते हैं। भक्तजन पहाड़ी पर बनी संकरी एवं पथरीली पगडंडियों के सहारे कठिन चढ़ाई पूरी करते हैं और भगवान गणेश व महादेव की आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

सवाल-जवाब

मगरीवाड़ा गांव किस जिले और उपखंड में स्थित है?
मगरीवाड़ा गांव राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर उपखंड में स्थित है।
पहाड़ी पर स्थित गणेश स्वरूप की क्या विशेषता है?
यह 1200 फीट ऊंची पहाड़ी पर पूरी तरह प्राकृतिक चट्टानों से बना है, जिसमें गणेश जी के सिर, सूंड, कान और पेट की आकृति 3 से 4 किलोमीटर दूर से दिखाई देती है।
इस गांव का नाम मगरीवाड़ा कैसे पड़ा?
स्थानीय बोली में पहाड़ियों को 'मगरी' कहा जाता है, और गांव के चारों ओर कई पहाड़ियां होने के कारण इसका नाम मगरीवाड़ा पड़ा।
इस पहाड़ी पर कौन सा प्राचीन मंदिर स्थित है?
पहाड़ी की गुफा में प्राचीन आपेश्वर महादेव मंदिर स्थित है।
पहाड़ी पर स्थित गुफा में किस संत ने तपस्या की थी?
प्रसिद्ध संत मुनिजी महाराज ने लगभग 80 वर्ष पहले इस गुफा में 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की थी।
पहाड़ी की चोटी पर ध्वजा चढ़ाने की परंपरा कब शुरू हुई?
श्रद्धालुओं द्वारा पहाड़ी की चोटी पर हर वर्ष ध्वजा चढ़ाने की यह परंपरा वर्ष 2006 से लगातार जारी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Meera Joshi@meera-joshi·5 दिन पहले

अरावली की पहाड़ियों में स्थित यह प्राकृतिक स्थल केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि यह आधुनिक तनावभरी जीवनशैली से दूर मानसिक शांति और प्रकृति से जुड़ने का एक बेहतरीन माध्यम है। कठिन चढ़ाई और एकांत वातावरण आगंतुकों को माइंडफुलनेस और आंतरिक संतुलन का अनूठा अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे उनके भावनात्मक कल्याण को बढ़ावा मिलता है।

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

अरावली की पहाड़ियों में स्थित मगरीवाड़ा का यह प्राकृतिक गणेश स्वरूप और आपेश्वर महादेव मंदिर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आतिथ्य सत्कार के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर प्रस्तुत करता है। यदि स्थानीय प्रशासन यहां बुनियादी ढांचे जैसे बेहतर मार्ग, पेयजल और कनेक्टिविटी का विकास करे, तो इस क्षेत्र में धार्मिक यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है, जिससे छोटे व्यवसायों और रोजगार को सीधा बढ़ावा मिलेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

अरावली क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन की यह संभावना सिर्फ आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास का एक सशक्त माध्यम बन सकती है। चूंकि रेवदर उपखंड में हर साल श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को मिलकर यहां 'पिलग्रिमेज टूरिज्म' का एक सुव्यवस्थित मॉडल तैयार करना चाहिए। यदि सड़क मार्ग, पेयजल और बुनियादी सुविधाओं का विकास होता है, तो इससे सिरोही जिले के दूरदराज के इन इलाकों में होमस्टे और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे लघु व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे पलायन रुकेगा और स्थानीय युवाओं के लिए आजीविका के नए रास्ते खुलेंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

यह रिपोर्ट राजस्थान के सिरोही जिले में धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक धरोहर के अनूठे संगम को सामने लाती है। इस तरह के स्थल ग्रामीण अंचल में स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ-साथ ईको-टूरिज्म और आस्था आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएं रखते हैं। यदि प्रशासन इन कठिन रास्तों और पगडंडियों पर बुनियादी सुविधाओं का विकास करे, तो क्षेत्र में श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुगम हो सकेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

यह स्थान न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का है, बल्कि दुर्गम पहाड़ी और पथरीले रास्तों के कारण यहाँ सार्वजनिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम करने की भी गंभीर आवश्यकता है। चूंकि हर साल सैकड़ों श्रद्धालु संकरी पगडंडियों से चढ़ाई करते हैं, इसलिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग को भीड़ नियंत्रण, आपातकालीन चिकित्सा सेवा और ट्रेकिंग सुरक्षा के लिहाज से एक विशेष कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।

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