सिरोही जिले में इस वर्ष मानसून की सुस्ती के कारण पेयजल और सिंचाई व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है। जिले के प्रमुख जलाशयों में पानी की आवक का आंकड़ा पिछले वर्ष के मुकाबले काफी कम दर्ज किया गया है। शनिवार सुबह तक उपलब्ध कराए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले के प्रमुख पांच बांधों में से चार बांधों की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। इस स्थिति के कारण ग्रामीण इलाकों और कस्बों में रहने वाले आम नागरिकों के साथ-साथ स्थानीय किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें खींच गई हैं।
वेस्ट बनास और सुकली सेलवाडा डेम की वर्तमान स्थिति
जिले के सबसे बड़े जलाशय वेस्ट बनास डेम की बात करें तो धनारी स्थित इस बांध में पानी की स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है। इस बांध की कुल भराव क्षमता 1380 एमसीएफटी है, लेकिन शनिवार सुबह तक इसमें महज 276 एमसीएफटी पानी की आवक ही संभव हो पाई है। यह आंकड़ा बांध की कुल क्षमता का केवल 20 प्रतिशत हिस्सा है। इस विशाल जलाशय से मुख्य रूप से पिंडवाड़ा और आबूरोड तहसील क्षेत्र के किसानों को खेती-किसानी के लिए सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में पानी की बेहद सीमित आवक के कारण क्षेत्र के किसान अपनी फसलों के भविष्य को लेकर भारी असमंजस और परेशानी में हैं।
इसी क्रम में जिले के दूसरे सबसे बड़े जलाशय सुकली सेलवाडा डेम की स्थिति भी काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। रेवदर तहसील क्षेत्र में स्थित इस बांध के जल का उपयोग सिंचाई के अलावा स्थानीय आबादी के लिए पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में किया जाता है। सुकली सेलवाडा डेम की कुल जल भराव क्षमता 1042.46 एमसीएफटी निर्धारित है। हालांकि, शनिवार सुबह तक दर्ज किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, इसमें केवल 263.9 एमसीएफटी पानी ही दर्ज किया गया है, जो कि इसकी कुल भराव क्षमता के मुकाबले मात्र 25 प्रतिशत के स्तर पर है।
बत्तीसा नाला में सर्वाधिक पानी, अनगौर और टोकरा में निराशाजनक आंकड़े
जिले के देलदर तहसील क्षेत्र में बना बत्तीसा नाला बांध एकमात्र ऐसा जलाशय है जहां पानी की आवक अन्य सभी बांधों की तुलना में सबसे बेहतर दर्ज की गई है। यह सिरोही जिले का तीसरा सबसे बड़ा बांध माना जाता है, जहां से वर्तमान में पेयजल और सिंचाई दोनों प्राथमिकताओं के लिए पानी का उपयोग किया जा रहा है। 577.32 एमसीएफटी की कुल भराव क्षमता वाले इस बांध में शनिवार सुबह तक 393 एमसीएफटी पानी जमा हो चुका है, जो इसकी कुल भराव क्षमता का 68 प्रतिशत है। इस बांध के माध्यम से सिरोही, देलदर तथा पिंडवाड़ा तहसील के अंतर्गत आने वाले 3 प्रमुख शहरों और 36 ग्रामीण बस्तियों को पानी की आपूर्ति किया जाना प्रस्तावित है।
दूसरी तरफ, सिरोही के चौथे सबसे बड़े जलाशय अनगौर बांध में स्थिति काफी कमजोर बनी हुई है। 495 एमसीएफटी की कुल क्षमता वाले इस बांध में शनिवार सुबह तक केवल 60 एमसीएफटी पानी ही आ पाया है, जो इसकी कुल भराव क्षमता का मात्र 12 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इस बांध में अगस्त के महीने तक आधे से अधिक पानी आ चुका था, लेकिन इस बार कम आवक के चलते आसपास के गांवों के निवासी भारी पेयजल समस्या की आशंका से घिरे हुए हैं। इसी प्रकार रेवदर तहसील के टोकरा बांध की कुल भराव क्षमता 192 एमसीएफटी है, जिसमें शनिवार सुबह तक महज 43 एमसीएफटी पानी दर्ज किया गया है। यह इसकी कुल क्षमता का केवल 22 प्रतिशत है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इसमें काफी अच्छी आवक दर्ज की गई थी।
तहसीलों में बारिश के आंकड़े और औसत भराव का गणित
सिरोही जिले में मानसून के दौरान हुई वर्षा के कुल आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पर्वतीय स्थल माउंट आबू में सबसे अधिक 842 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। हालांकि, माउंट आबू के अपने ऐतिहासिक औसत वर्षा आंकड़ों से तुलना की जाए तो यह आंकड़ा सामान्य का मात्र 37 प्रतिशत ही बैठता है। वहीं दूसरी ओर, औसत बारिश के प्रतिशत के आधार पर आबूरोड तहसील क्षेत्र जिले में सबसे आगे रहा है, जहां औसत की 42 प्रतिशत यानी 420 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई है।
समूचे सिरोही जिले का परिदृश्य यह है कि अब तक किसी भी तहसील क्षेत्र में सामान्य औसत की 50 प्रतिशत बारिश का आंकड़ा भी पूरा नहीं हो सका है। कमजोर मानसून और बांधों में पानी के बेहद कम जमाव के कारण किसान लगातार बारिश की आस लगाए बैठे हैं ताकि आने वाले महीनों में फसलों की सिंचाई और पीने के जल का गंभीर संकट उत्पन्न न हो सके।



















