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जालौर के देसू गांव में स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर, सिरदर्द से लेकर केसर की बारिश तक के चमत्कारराजस्थान
27 सित॰ 2026, 3:17 pm (27 मिनट पहले)· 0

जालौर के देसू गांव में स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर, सिरदर्द से लेकर केसर की बारिश तक के चमत्कार

राजस्थान के जालौर जिले के देसू गांव में स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर अपनी अनोखी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां सिरदर्द के झाड़े से लेकर महाशिवरात्रि पर केसर की बारिश तक के चमत्कारों की चर्चा दूर-दूर तक फैली हुई है।

राजस्थान के जालौर जिले से लगभग 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देसू गांव में एक ऊंची पहाड़ी पर संकट मोचन हनुमान जी का प्राचीन मंदिर स्थापित है। यह धार्मिक स्थल इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच अपार श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर केवल सामान्य पूजा-पाठ या आराधना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां से जुड़ी हुई कई रहस्यमयी और चमत्कारिक मान्यताएं इसे दूर-दूर तक प्रसिद्ध बनाती हैं। पहाड़ी की चोटी पर बने इस ऐतिहासिक मंदिर में माथा टेकने और अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए न सिर्फ जालौर बल्कि अन्य दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

बीमारियों से राहत दिलाने वाला चमत्कारी झाड़ा

इस संकट मोचन हनुमान मंदिर की सबसे बड़ी और लोकप्रिय विशेषता यहां होने वाले स्वास्थ्य लाभ से जुड़ी है। स्थानीय निवासियों और यहां आने वाले दर्शनार्थियों का यह दृढ़ विश्वास है कि यदि कोई व्यक्ति गंभीर सिरदर्द या माइग्रेन जैसी पुरानी समस्याओं से जूझ रहा है, तो इस मंदिर में हनुमान जी के नाम का झाड़ा लगवाने मात्र से उसे चमत्कारी रूप से आराम मिल जाता है। इसी गहरी आस्था के कारण माइग्रेन और सिरदर्द से परेशान तमाम मरीज नियमित रूप से देसू गांव की इस पहाड़ी पर आते हैं और संकट मोचन के चरणों में झाड़ा लगवाकर आरोग्य की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं।

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वर्ष 1701 ईस्वी में हुआ था प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार

इस धार्मिक स्थल का इतिहास सदियों पुराना माना जाता है। मंदिर से जुड़े जानकारों और वहां नियमित रूप से आने वाले भक्तों का कहना है कि देसू के इस संकट मोचन हनुमान मंदिर के साथ कई प्राचीन और चमत्कारी प्रसंग जुड़े हुए हैं। इस ऐतिहासिक संरचना के जीर्णोद्धार को लेकर यह तथ्य सामने आता है कि वर्ष 1701 ईस्वी में महंत श्री फतेह गिरी जी महाराज और उस समय के तत्कालीन ठाकुर साहब द्वारा इसका पुनर्निर्माण कराया गया था। तब से लेकर आज तक यह पवित्र स्थान लगातार लोगों की आस्था और विश्वास का एक बहुत बड़ा केंद्र बना हुआ है।

शिव परिवार की स्थापना और महाशिवरात्रि पर केसर की वर्षा

इस मंदिर परिसर का धार्मिक दायरा केवल हनुमान जी तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अन्य देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां भी स्थापित हैं जो इसकी महत्ता को और अधिक बढ़ा देती हैं। इस परिसर में भगवान शिव और माता पार्वती अपने संपूर्ण परिवार के साथ विराजमान हैं। इसके अलावा, इस मंदिर से जुड़ा सबसे अनोखा और रहस्यमयी दावा महाशिवरात्रि के पावन पर्व को लेकर किया जाता है। स्थानीय पुजारियों और श्रद्धालुओं का ऐसा मानना है कि महाशिवरात्रि के खास दिन पर इस मंदिर और इसके आसपास की पूरी पहाड़ी पर प्राकृतिक रूप से केसर की वर्षा होती है। मान्यता के अनुसार उस खास दिन पर संपूर्ण वातावरण और पहाड़ी का क्षेत्र केसरिया रंग में रंगा हुआ नजर आता है, जिसे भक्त किसी बड़े चमत्कार से कम नहीं मानते हैं।

सवाल-जवाब

संकट मोचन हनुमान मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर राजस्थान के जालौर जिले से लगभग 13 किलोमीटर दूर देसू गांव की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है।
इस मंदिर में किस बीमारी के इलाज की मान्यता है?
यहां सिर में तेज दर्द और माइग्रेन जैसी पुरानी समस्याओं से पीड़ित लोग हनुमान जी के नाम का झाड़ा लगवाने आते हैं।
मंदिर का जीर्णोद्धार कब हुआ था?
इस ऐतिहासिक मंदिर का जीर्णोद्धार वर्ष 1701 ईस्वी में महंत श्री फतेह गिरी जी महाराज और तत्कालीन ठाकुर साहब ने करवाया था।
महाशिवरात्रि पर इस मंदिर से जुड़ी क्या मान्यता है?
स्थानीय लोगों और पुजारियों का दावा है कि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर और आसपास की पहाड़ी पर केसर की बारिश होती है।
मंदिर में हनुमान जी के अलावा कौन से भगवान विराजमान हैं?
इस मंदिर परिसर में भगवान शिव और माता पार्वती अपने पूरे परिवार के साथ विराजमान हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·14 मिनट पहले

केसर की बारिश वाली बात पर थोड़ा यकीन करनामुश्किल है, क्योंकि मौसम या प्रकृति से जुड़ी ऐसी बातें अक्सर लोगों की आस्था तक ही सीमित होती हैं। बाकी झाड़े वाली मान्यता पर भी हर कोई भरोसा नहीं करता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 मिनट पहले

रोहन भाई, केसर वाली बात तो अजीब है ही, पर क्या कभी किसी वैज्ञानिक ने या मौसम विभाग ने इस कथित केसर की कभी जाँच की है?

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