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संगरूर में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले बुजुर्ग की मौत पर बवाल, भाजपा ने भगवंत मान सरकार को घेरापंजाब
8 सित॰ 2026, 3:56 pm (59 दिन पहले)· 2

संगरूर में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले बुजुर्ग की मौत पर बवाल, भाजपा ने भगवंत मान सरकार को घेरा

संगरूर के दिरबा में नशे का मुद्दा उठाने के बाद प्रताड़ित पिता गुलजार सिंह की जहर खाने से मौत हो गई। इस घटना के बाद भाजपा ने पंजाब की भगवंत मान सरकार और आप मंत्री हरपाल सिंह चीमा पर तीखा हमला बोला है।

पंजाब के संगरूर जिले में एक बेबस पिता की दुखद मौत के बाद राज्य में नशे के कारोबार और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। दिरबा के रहने वाले गुलजार सिंह ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सामने गांव और राज्य में हेरोइन (चिट्टा) की खुलेआम बिक्री पर सवाल उठाए थे। इस घटनाक्रम के बाद उन पर कथित तौर पर दबाव बनाया गया, जिसके चलते उन्होंने जहरीला पदार्थ खा लिया। इलाज के दौरान 7 सितंबर को उनकी मृत्यु हो गई। इस त्रासदी ने पंजाब सरकार के नशा विरोधी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं और विपक्षी दलों को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौका दे दिया है।

संगरूर में त्रासदी और एक बेबस पिता का संघर्ष

संगरूर जिले के दिरबा गांव के रहने वाले गुलजार सिंह पिछले लंबे समय से अपने बेटे की नशे की लत से परेशान थे। नशीले पदार्थों की लत के कारण उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा गई थी। अपने बेटे के इलाज और नशा छुड़ाने की कोशिशों में परिवार को अपनी लगभग पूरी जायदाद और जमीन-जायदाद बेचनी पड़ गई थी। इसके बावजूद इलाके में नशे की सप्लाई थमी नहीं, जिससे तंग आकर गुलजार सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पंजाब के वित्त मंत्री और आप नेता हरपाल सिंह चीमा से सीधे सवाल पूछे थे। उन्होंने मंत्री के सामने गुहार लगाई थी कि उनके बेटे और पंजाब के युवाओं को नशे के इस जानलेवा जाल से बचाया जाए।

उत्पीड़न का आरोप और मौत से पहले रिकॉर्ड किया गया वीडियो

सार्वजनिक तौर पर मंत्री से तीखे सवाल पूछने के बाद गुलजार सिंह के लिए मुश्किलें और बढ़ गईं। परिजनों और स्थानीय दावों के अनुसार, समस्या का हल निकालने के बजाय गुलजार सिंह पर ही दबाव बनाया जाने लगा। गांव के स्थानीय नेतृत्व और सरपंच ने उन पर मंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए दबाव डाला। इस मानसिक उत्पीड़न और लगातार बढ़ते दबाव से क्षुब्ध होकर गुलजार सिंह ने घातक कदम उठा लिया।

जहर खाने से ठीक पहले गुलजार सिंह ने एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड किया, जिसमें उन्होंने अपनी इस खौफनाक हालत के लिए चार लोगों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। इस वीडियो में उन्होंने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और गांव के स्थानीय नेताओं के नामों का उल्लेख किया। जहर खाने के बाद उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद 7 सितंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया।

भारतीय जनता पार्टी का आम आदमी पार्टी पर तीखा हमला

गुलजार सिंह की मौत की खबर सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार को कड़े शब्दों में घेरा। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि इस दुखद घटना ने पंजाब में नशे के खिलाफ सरकार के तथाकथित सफल अभियानों के पीछे की कड़वी सच्चाई को दुनिया के सामने ला दिया है।

गौरव भाटिया ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में राज्य में नशे का अवैध कारोबार बेरोकटोक फल-फूल रहा है, लेकिन सरकार कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि एक लाचार पिता ने मंत्री से अपने बच्चे की जान बचाने की गुहार लगाई थी, जिसने नशे की वजह से अपनी सारी संपत्ति गंवा दी थी। लेकिन मदद करने के बजाय स्थानीय प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से पीड़ित पिता को ही प्रताड़ित किया गया और उन पर माफी मांगने का दबाव बनाया गया, जिसके कारण उन्हें अपनी जीवन लीला समाप्त करने पर मजबूर होना पड़ा।

वहीं भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए पंजाब सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। मालवीय ने आरोप लगाया कि पंजाब में सत्तासीन दल एक गिरोह की तरह बर्ताव कर रहा है। उन्होंने कहा कि मान सरकार जमीनी स्तर पर नशे की सप्लाई और वितरण नेटवर्क को नष्ट करने के बजाय केवल प्रचार-प्रसार और विज्ञापनों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो सरकार नशे जैसे गंभीर मुद्दे पर आम नागरिकों के सवाल बर्दाश्त नहीं कर सकती और सवाल पूछने वालों को डराती-धमकाती है, उसे जनता के सामने जवाब देना ही होगा।

'आप' सरकार का दावा और पुलिस कार्रवाई

विपक्ष के चौतरफा हमलों के बीच आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने नशा विरोधी अभियानों का बचाव किया है। सरकार का तर्क है कि राज्य में 'युद्ध नशे के विरुद्ध' अभियान के तहत नशा तस्करों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है और ड्रग्स के बड़े-बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया गया है। हालांकि, विपक्षी दल इन दावों को पूरी तरह खोखला बता रहे हैं।

दूसरी तरफ, इस मामले में संगरूर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस ने गांव के एक सरपंच और दो अन्य व्यक्तियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और प्रताड़ित करने की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पटियाला रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) कुलदीप सिंह चहल ने मीडिया से बातचीत करते हुए पुष्टि की कि मृतक का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। डीआईजी चहल ने पुलिस द्वारा उत्पीड़न किए जाने के आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की जा रही है तथा जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

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सवाल-जवाब

संगरूर में गुलजार सिंह की मौत कैसे हुई?
नशे के खिलाफ सार्वजनिक रूप से मंत्री से सवाल पूछने के बाद कथित उत्पीड़न और दबाव के कारण गुलजार सिंह ने जहर खा लिया था, जिससे 7 सितंबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
गुलजार सिंह ने किस मंत्री से सवाल पूछे थे?
उन्होंने पंजाब के वित्त मंत्री और आप नेता हरपाल सिंह चीमा से अपने गांव में 'चिट्टा' (हेरोइन) की बिक्री को लेकर सवाल पूछे थे।
इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
संगरूर पुलिस ने एक गांव के सरपंच और दो अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और प्रताड़ित करने का मामला दर्ज किया है।
भाजपा ने पंजाब सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
भाजपा नेताओं गौरव भाटिया और अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि भगवंत मान सरकार के शासन में नशे का कारोबार फल-फूल रहा है और सवाल पूछने वाले नागरिकों को डराया-धमकाया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·59 दिन पहले

यह घटना प्रशासनिक उदासीनता और धमकियों के गंभीर आपराधिक पहलू को उजागर करती है। पीड़ित द्वारा सार्वजनिक मंच पर ड्रग्स के खिलाफ आवाज़ उठाने के बाद स्थानीय स्तर पर उस पर दबाव बनाया गया और मौत से पहले वीडियो में नामजद आरोप लगाए गए। कानून-व्यवस्था की यह स्थिति आपराधिक जाँच की माँग करती है। यदि पुलिस ने समय रहते प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग के इस एंगल पर निष्पक्ष कार्रवाई की होती, तो एक नागरिक की जान बचाई जा सकती थी। अब इस मामले में कानूनी जाँच का दायरा सिर्फ आत्महत्या तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वीडियो साक्ष्यों के आधार पर नामजद आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·59 दिन पहले

यह त्रासदी दर्शाती है कि पंजाब में ड्रग्स माफिया और स्थानीय तंत्र की सांठगांठ किस हद तक आम आदमी को तोड़ चुकी है। जब एक पीड़ित पिता अपनी फरियाद लेकर सत्ता के शीर्ष तक पहुँचता है और न्याय के बजाय उसे मानसिक प्रताड़ना व माफी मांगने के दबाव का सामना करना पड़ता है, तो यह शासन प्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। वीडियो साक्ष्यों के आधार पर यदि इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह राज्य में न्याय व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास पूरी तरह डगमगा देगा। आगामी दिनों में यह मुद्दा क्षेत्रीय राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित करेगा।

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