पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और भू-राजनीतिक तनाव से यूरो पस्त, डॉलर मजबूतगोवा वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का रुख साफ, मतदाता सूची संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवालनागोया में भारत के पास आज कई मेडल पक्के करने का मौका, निशानेबाजी और कबड्डी पर टिकी निगाहेंशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायबिटगेट पर बड़ा साइबर हमला, हॉट वॉलेट से उड़ाए गए 351 मिलियन डॉलर
सोनिया गांधी के संस्मरण का बदला पब्लिशर, हार्परकॉलिन्स छापेगी बिलॉन्गिंगबिहार
4 सित॰ 2026, 2:16 pm (21 दिन पहले)· 2

सोनिया गांधी के संस्मरण का बदला पब्लिशर, हार्परकॉलिन्स छापेगी बिलॉन्गिंग

सोनिया गांधी की आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव' अब पेंगुइन की जगह हार्परकॉलिन्स इंडिया द्वारा 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। पब्लिशर बदलने के बावजूद पुस्तक की रिलीज की तारीख में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आने वाली संस्मरण पुस्तक को लेकर बने असमंजस की स्थिति अब साफ हो गई है। पहले इस किताब को पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित किया जाना तय किया गया था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी हार्परकॉलिन्स इंडिया को सौंप दी गई है। सोनिया गांधी के इस संस्मरण का आधिकारिक शीर्षक ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ रखा गया है। हार्परकॉलिन्स ने शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को इस संबंध में औपचारिक घोषणा कर दी है। सबसे खास बात यह है कि पब्लिशर बदलने के बाद भी पुस्तक के बाजार में आने की समय-सीमा पर कोई असर नहीं पड़ा है। यह किताब पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक ही 10 नवंबर 2026 को पाठकों के हाथों में पहुंचेगी। यानी प्रकाशक भले ही बदल गया हो, लेकिन प्रकाशन की तारीख पूरी तरह से वही पुरानी है। पिछले कुछ दिनों से पब्लिशिंग इंडस्ट्री में इस किताब को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे थे।

विवाद और पेंगुइन का पीछे हटना

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब न्यूयॉर्क स्थित अल्फ्रेड ए. नॉफ, जो कि पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक हिस्सा है, ने 18 अगस्त को सोनिया गांधी की इस पुस्तक के प्रकाशन का एलान किया था। उस शुरुआती घोषणा के दौरान ही 10 नवंबर की तारीख तय कर दी गई थी और यह भी बताया गया था कि इस किताब की पहली प्रिंटिंग में करीब एक लाख कॉपियां छापी जाएंगी। हालांकि, कुछ ही समय बाद पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इस किताब को छापने से अपने कदम पीछे खींच लिए। उस दौरान अंदरखाने से संपादकीय प्राथमिकताओं में बदलाव और सामग्री को लेकर मतभेद जैसी बातें सामने आईं। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का अपना पक्ष था कि लेखक द्वारा संपादकीय बदलावों को स्वीकार न किए जाने को ही एकमात्र कारण बताना उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि किसी भी किताब के हित में तथ्यात्मक जांच करना और जरूरी सुझाव देना उनकी पेशेवर जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसके विपरीत, पब्लिशिंग इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों ने यह दावा किया था कि कुछ संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों की सामग्री को लेकर दोनों पक्षों के बीच असहमति पैदा हो गई थी। अब हार्परकॉलिन्स की इस पूरे मामले में एंट्री होने से यह विवाद और इसकी चर्चाएं फिर से सुर्खियों में आ गई हैं।

ये भी पढ़ें

किताब में क्या होगा खास

हार्परकॉलिन्स इंडिया ने इस किताब को एक बेहद मोहक और दिलचस्प संस्मरण करार दिया है। नए प्रकाशक के मुताबिक इस पुस्तक के पन्नों पर सोनिया गांधी की निजी जिंदगी के साथ-साथ उनके राजनीतिक जीवन के सफर को भी प्रमुखता से जगह मिलेगी। किताब की शुरुआत उनके युद्ध के बाद के इटली के वेनेटो क्षेत्र में बीते बचपन से लेकर भारत की तरफ उनके रुख करने तक की कहानी से होगी। इसके अलावा उस ऐतिहासिक प्रेम कहानी का भी विशेष जिक्र किया जाएगा, जिसने उन्हें खींचकर भारत तक पहुंचाया। इस सफर के बाद उनकी निजी जिंदगी में आए बड़े बदलावों और झेले गए निजी दुखों को भी इस किताब का अहम हिस्सा बनाया गया है।

राजनीतिक हलकों में बढ़ती उत्सुकता

हार्परकॉलिन्स का ऐसा मानना है कि सोनिया गांधी, जिन्हें देश की राजनीति में लंबे समय तक सार्वजनिक मंचों पर बेहद नपा-तुला और कम बोलने वाली नेता के रूप में देखा जाता रहा है, इस संस्मरण के जरिए अपने जीवन के पन्नों को पूरी खुलासे के साथ सामने रखेंगी। इसमें उनके निजी अनुभवों को सीधे तौर पर राजनीतिक घटनाओं और उतार-चढ़ाव के साथ जोड़कर पाठकों के सामने पेश किया जाएगा। यही मुख्य वजह है कि इस पुस्तक को लेकर राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ प्रकाशन जगत में भी भारी उत्सुकता और कौतूहल बना हुआ है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि जब सोनिया गांधी की यह कृति पाठकों के सामने आती है, तो वे अपने व्यक्तिगत जीवन और राजनीतिक यात्रा के अध्यायों को किस अनोखे अंदाज में बयां करती हैं।

सवाल-जवाब

सोनिया गांधी की आत्मकथा का क्या नाम है?
सोनिया गांधी के संस्मरण का नाम ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ है।
इस किताब को अब कौन सा पब्लिशर छाप रहा है?
इस किताब को अब हार्परकॉलिन्स इंडिया प्रकाशित करेगी।
यह किताब बाजार में कब आएगी?
यह किताब 10 नवंबर 2026 को पाठकों के बीच आएगी।
पहले इस किताब को कौन प्रकाशित करने वाला था?
पहले इस पुस्तक को पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित किया जाना था।
पेंगुइन ने किताब छापने से क्यों मना किया?
सामग्री को लेकर मतभेद और संपादकीय बदलावों पर असहमति के चलते पेंगुइन पीछे हट गया।
इस किताब में सोनिया गांधी के जीवन के किस हिस्से का जिक्र होगा?
इसमें इटली के वेनेटो में बचपन, भारत आने की कहानी और निजी दुखों के साथ राजनीतिक सफर को जगह मिलेगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·20 दिन पहले

सोनिया गांधी के संस्मरण के प्रकाशक बदलने का यह घटनाक्रम केवल एक कॉर्पोरेट निर्णय नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ भी गहरे हैं। जब देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवारों में से एक की आत्मकथा को लेकर वैचारिक और संपादकीय असहमतियों की चर्चाएं सार्वजनिक होती हैं, तो यह सीधे तौर पर चुनावी राजनीति और सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित करता है। उत्तर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी राजनीति के केंद्र में रहने वाली नेता की इस किताब के आने से राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों और चर्चाओं का दौर शुरू होना तय है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·20 दिन पहले

संपादकीय असहमति और सामग्री को लेकर उपजा यह विवाद महज व्यावसायिक बदलाव नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे। जब मुख्यधारा की राजनीति से जुड़े किसी बड़े व्यक्तित्व की किताब में राजनीतिक मामलों और संवेदनशील प्रसंगों को लेकर पब्लिशर और लेखक में ठन जाती है, तो कानूनी और वैधानिक दृष्टिकोण से यह विमर्श का नया विषय बन जाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस किताब के बाजार में आने से सियासी हलकों में कोई कानूनी खींचतान या राजनीतिक बयानबाजी का दौर शुरू होता है या नहीं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp