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सूखे से बेहाल महाराष्ट्र में किसानों का दर्द देख भावुक हुए देवेंद्र फडणवीस, खेत में रोते अन्नदाता को गले लगाकर दिया मदद का भरोसामहाराष्ट्र
23 सित॰ 2026, 11:55 pm (33 दिन पहले)· 2

सूखे से बेहाल महाराष्ट्र में किसानों का दर्द देख भावुक हुए देवेंद्र फडणवीस, खेत में रोते अन्नदाता को गले लगाकर दिया मदद का भरोसा

महाराष्ट्र के 18 जिलों में सूखे से फसलें तबाह हो चुकी हैं। लातूर में निरीक्षण के दौरान जब एक किसान रो पड़ा, तो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उसे गले लगाकर ढांढस बंधाया।

महाराष्ट्र के 18 जिले इस समय भयंकर सूखे के संकट से जूझ रहे हैं, जहां सामान्य की तुलना में 20 प्रतिशत तक कम बरसात दर्ज की गई है। अमरावती, सोलापुर, अहिल्यानगर, अकोला, बुलढाणा और लातूर जैसे जिलों की स्थिति और भी गंभीर है, जहां वर्षा का आंकड़ा सामान्य से लगभग 50% नीचे चला गया है। मराठवाड़ा, विदर्भ और नॉर्थ महाराष्ट्र के ग्रामीण अंचलों में पानी की भारी किल्लत पैदा हो चुकी है। खेतों में खड़ी फसलें पानी के अभाव में सूखने लगी हैं, सिंचाई के साधन ठप हैं और मवेशियों के लिए चारे का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

लातूर के खेतों में हालात देखने पहुंचे मुख्यमंत्री

संकट की इस घड़ी में महाराष्ट्र प्रशासन ने अगस्त के आखिरी सप्ताह से ही फसल नुकसान का व्यापक सर्वे शुरू कर रखा है ताकि पीड़ितों तक सहायता पहुंचाई जा सके। किसानों को राहत पहुंचाने के लिए सरकारी स्तर पर कार्ययोजना तैयार की गई है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस स्वयं जमीनी हकीकत परखने मैदान में उतरे। उन्होंने लातूर के कई गांवों का सघन दौरा किया। वहां उन्होंने सोयाबीन की खराब हो चुकी फसलों का मुआयना किया और सीधे किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनीं।

किसान की आंखों से छलके आंसू, सरकार ने बढ़ाया हाथ

जाउ गांव में निरीक्षण के दौरान एक भावुक कर देने वाला वाकया सामने आया। जब देवेंद्र फडणवीस सोयाबीन के खेत में एक काश्तकार से बातचीत कर रहे थे और नुकसान का ब्योरा मांग रहे थे, तभी अपनी बर्बाद मेहनत देखकर वह किसान खुद को रोक नहीं सका। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे और वह फफक कर रो पड़ा। यह देखकर मुख्यमंत्री ने तुरंत आगे बढ़कर किसान को गले लगा लिया। उन्होंने किसान को सांत्वना देते हुए कहा कि चिंता मत करो, सरकार किसानों की हर संभव मदद करेगी। इसी घटना को उन्होंने X पर साझा भी किया।

बुलढाणा में मक्का बर्बाद, केंद्र से सहायता की तैयारी

संकट से निपटने के लिए राज्य मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य भी सक्रिय हैं। इसी कड़ी में डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने बुलढाणा का दौरा कर जमीनी स्थिति की समीक्षा की। बुलढाणा में भी बेहद कम बारिश के चलते मक्के की पूरी खेती चौपट हो चुकी है। शिंदे ने स्पष्ट किया कि कई क्षेत्रों में हालात बेहद चिंताजनक हैं, जिसके चलते महाराष्ट्र सरकार अब केंद्र सरकार से भी विशेष आर्थिक और राहत सहायता की मांग करेगी ताकि संकटग्रस्त किसानों को जल्द राहत दी जा सके।

विधानसभा के विशेष सत्र की उठी मांग

दूसरी तरफ, विपक्ष सरकार के मौजूदा कदमों को नाकाफी बता रहा है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टिवार ने चेतावनी दी है कि मौजूदा समय में मौसम थोड़ा संभला हुआ दिख सकता है, लेकिन जैसे जैसे गर्मी बढ़ेगी, जल संकट और सूखा बेहद विकराल रूप धारण कर लेगा। उन्होंने मांग रखी कि प्रशासन को तत्काल विधानसभा का विशेष सत्र बुलाना चाहिए, जिसमें सभी दलों और जनप्रतिनिधियों की राय लेकर सूखे से पार पाने के लिए एक ठोस व दीर्घकालिक रणनीति तैयार की जाए।

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सवाल-जवाब

महाराष्ट्र के कितने जिले सूखे की चपेट में हैं?
महाराष्ट्र के 18 जिले इस समय सूखे की चपेट में हैं, जहां वर्षा सामान्य से 20 प्रतिशत तक कम रही है।
किन जिलों में 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है?
अमरावती, सोलापुर, अहिल्यानगर, अकोला, बुलढाणा और लातूर में सामान्य से लगभग 50% कम बारिश हुई है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किस जिले का दौरा किया?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने लातूर जिले के जाउ गांव सहित अन्य क्षेत्रों में जाकर सोयाबीन की फसलों के नुकसान का जायजा लिया।
बुलढाणा में कौन सी फसल चौपट हुई है?
बुलढाणा में कम बारिश की वजह से मक्के की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है, जिसका जायजा डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने लिया।
विपक्ष की मुख्य मांग क्या है?
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टिवार ने सरकार से सूखे की स्थिति पर रणनीति बनाने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·33 दिन पहले

पंजाब और हरियाणा के किसानों का दर्द भी कुछ ऐसा ही है जब बेमौसम बारिश या सूखा फसल तबाह कर देता है। अन्नदाता का यूं रोना वाकई दिल दहला देता है।

Ravikash Gupta@ravikash·33 दिन पहले

अमरावती और लातूर में बारिश का सामान्य से पचास प्रतिशत नीचे गिर जाना वाकई डरावना है। सिर्फ सांत्वना देने से घर नहीं चलेगा, इन किसानों को तुरंत वित्तीय मदद चाहिए।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·33 दिन पहले

रवि जी, पचास फीसदी की कमी वाकई बहुत है। लातूर में उस किसान को गले लगाने से तस्वीर तो ठीक दिखती है, पर बैंक खाते में पैसे कब आएंगे?

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 दिन पहले

बारह-चौदह जिलों में पचास प्रतिशत बारिश कम होना मतलब इस बार किसानों का बचना बहुत मुश्किल है।

Rohan Verma@rohan-verma·33 दिन पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है, लेकिन क्या सरकार की तरफ से इन अठारह जिलों के किसानों के कर्ज वसूली पर तुरंत रोक लगेगी?

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