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सुल्तानपुर का ऐतिहासिक घंटाघर 34 लाख रुपये से होगा हाईटेक, दुर्गा पूजा से पहले लगेंगी डिजिटल घड़ियां और फसाद लाइटेंभारत
26 अग॰ 2026, 10:59 am (64 दिन पहले)· 1

सुल्तानपुर का ऐतिहासिक घंटाघर 34 लाख रुपये से होगा हाईटेक, दुर्गा पूजा से पहले लगेंगी डिजिटल घड़ियां और फसाद लाइटें

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में ब्रिटिशकाल के प्रसिद्ध लाल पत्थर वाले घंटाघर के कायाकल्प के लिए नगर पालिका ने 34 लाख रुपये का बजट मंजूर किया है, जिसके तहत चार नई डिजिटल घड़ियां और आधुनिक फसाद लाइटिंग लगाई जाएगी।

उत्तर प्रदेश का सुल्तानपुर शहर अपने मध्यकालीन इतिहास के साथ-साथ ब्रिटिश शासन के दौरान बनी ऐतिहासिक इमारतों के लिए भी विशेष पहचान रखता है। शहर के ठीक बीचों-बीच स्थित लाल पत्थर का प्रसिद्ध घंटाघर वर्षों से इस ऐतिहासिक पहचान का प्रमुख केंद्र रहा है। अब नगर पालिका प्रशासन ने इस जर्जर हो चुके घंटाघर की सूरत बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। लगभग 34 लाख रुपये की लागत से इस इमारत का व्यापक जीर्णोद्धार कराया जाएगा, जिससे शहर के मुख्य चौक की रौनक पूरी तरह बदलने वाली है।

स्मार्ट तकनीक से सजेगा ऐतिहासिक चौक

लंबे समय से रखरखाव के अभाव से जूझ रहे इस घंटाघर को अब पूरी तरह आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी की जा रही है। जीर्णोद्धार योजना के तहत इमारत में लगी पुरानी पारंपरिक घड़ियों को हटा दिया जाएगा। उनकी जगह चार नई डिजिटल घड़ियां स्थापित की जाएंगी, जो लोगों को सटीक समय बताने के साथ इमारत को नया लुक भी प्रदान करेंगी। इसके अलावा भवन की दीवारों, पत्थरों और मुख्य संरचना की आवश्यक मरम्मत का कार्य भी शुरू किया जा रहा है।

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लखनऊ के विशेषज्ञों की टीम ने किया निरीक्षण

परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए लखनऊ से आए तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों और विद्युतकर्मियों के एक विशेष दल ने बृहस्पतिवार को घंटाघर का बारीकी से निरीक्षण किया। टीम ने भवन की मौजूदा स्थिति का आकलन करते हुए प्रस्तावित कार्यों का खाका तैयार किया है। नगर पालिका प्रशासन ने पूरे काम को पूरा करने के लिए 20 सितंबर की समय सीमा निर्धारित की है। इस समय सीमा का मुख्य उद्देश्य शहर में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध दुर्गा पूजा महोत्सव और आगामी त्योहारों से पहले सौंदर्यीकरण का काम पूरा करना है।

वर्ष 2007-08 के बाद पहला बड़ा जीर्णोद्धार

घंटाघर के इतिहास और वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए नगर पालिकाध्यक्ष प्रवीन कुमार अग्रवाल ने बताया कि इस ऐतिहासिक इमारत का पिछला सुंदरीकरण वर्ष 2007-08 में कराया गया था। उसके बाद से लंबे समय तक इस दिशा में कोई बड़ा काम नहीं हुआ था, जिससे इमारत की स्थिति खराब हो रही थी और घड़ियों को बदलने की जरूरत महसूस की जा रही थी। उन्होंने बताया कि नगर पालिका ने इसे प्राथमिकता पर रखते हुए काम शुरू कराया है और सभी संबंधित अधिकारियों को तय समय में काम पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

संसद भवन और हावड़ा ब्रिज की तर्ज पर होगी लाइटिंग

इमारत को रात के समय बेहद खूबसूरत और आकर्षक रूप देने के लिए अत्याधुनिक फसाद लाइटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। अधिशासी अधिकारी लाल चंद्र सरोज ने जानकारी दी कि ये विशेष लाइटें महज कुछ ही सेकंड में अपना रंग बदल सकती हैं। उन्होंने बताया कि इसी तरह की आधुनिक फसाद लाइटिंग का प्रयोग दिल्ली के संसद भवन, सिग्नेचर ब्रिज और कोलकाता के प्रसिद्ध हावड़ा ब्रिज पर किया गया है। जल्द ही सुल्तानपुर का यह ऐतिहासिक घंटाघर भी इन्हीं राष्ट्रीय धरोहरों की तर्ज पर रात के अंधेरे में रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगाएगा।

सवाल-जवाब

सुल्तानपुर घंटाघर के कायाकल्प के लिए कितना बजट तय किया गया है?
नगर पालिका प्रशासन ने घंटाघर की मरम्मत, जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण के लिए लगभग 34 लाख रुपये का बजट निर्धारित किया है।
घंटाघर में कौन-कौन से मुख्य बदलाव किए जाएंगे?
पुराने पारंपरिक घड़ियों की जगह चार नई डिजिटल घड़ियां लगाई जाएंगी, इमारत की आवश्यक मरम्मत होगी और रंग बदलने वाली आधुनिक फсад लाइटें स्थापित की जाएंगी।
सुल्तानपुर घंटाघर का काम कब तक पूरा होगा?
नगर पालिका ने इस काम को 20 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है ताकि दुर्गा पूजा और त्योहारों से पहले काम संपन्न हो सके।
घंटाघर का पिछला सुंदरीकरण कब हुआ था?
नगर पालिकाध्यक्ष प्रवीन कुमार अग्रवाल के अनुसार घंटाघर का पिछला सुंदरीकरण वर्ष 2007-08 में कराया गया था।
घंटाघर में लगने वाली फсад लाइटिंग की क्या खासियत है?
यह लाइटिंग कुछ ही सेकंड में अपना रंग बदल सकती है। इसी तरह की तकनीक दिल्ली के संसद भवन, सिग्नेचर ब्रिज और कोलकाता के हावड़ा ब्रिज पर इस्तेमाल की गई है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·63 दिन पहले

सुल्तानपुर के ब्रिटिशकालीन घंटाघर के जीर्णोद्धार का यह कदम क्षेत्रीय प्रशासन की शहरी सौंदर्यीकरण प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। 20 सितंबर की सख्त समय सीमा इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि आगामी दुर्गा पूजा महोत्सव से पहले कार्य पूरा हो सके, जिससे स्थानीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन और जन-भागीदारी को सीधा प्रोत्साहन मिलेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·63 दिन पहले

ब्रिटिशकालीन घंटाघर के इस जीर्णोद्धार और फसाद लाइटिंग जैसी आधुनिक तकनीकों के प्रयोग से न केवल ऐतिहासिक धरोहर को नया जीवन मिलेगा, बल्कि सितंबर तक तय समय सीमा के भीतर कार्य पूरा होने से सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर भी प्रशासन का ध्यान रहना चाहिए, क्योंकि दुर्गा पूजा जैसे बड़े आयोजनों के दौरान मुख्य चौक पर भारी भीड़ उमड़ती है और ऐसे में संरचनात्मक मजबूती अत्यंत आवश्यक है।

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