उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर शहर को राष्ट्रीय राजमार्ग 731 से जोड़ने वाला अमहट-गभड़िया संपर्क मार्ग इस समय बेहद दयनीय स्थिति में पहुंच चुका है। पूरी सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं, जिससे हर दिन इस रास्ते का इस्तेमाल करने वाले मुसाफिरों और चालकों को भारी जोखिम उठाकर गुजरना पड़ रहा है। यह मार्ग जिला मुख्यालय को सीधे नेशनल हाईवे से जोड़ता है, इसलिए दिन-रात यहां वाहनों की भारी आवाजाही रहती है। लगातार बढ़ती टूट-फूट और प्रशासनिक अनदेखी के चलते स्थानीय नागरिकों का गुस्सा बढ़ रहा है, क्योंकि लंबे समय से की जा रही शिकायतों के बावजूद मार्ग के कायाकल्प को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बरसात के दिनों में जलभराव से जानलेवा साबित होते हैं गड्ढे
बारिश के मौसम में इस मार्ग की दुर्दशा चरम पर पहुंच जाती है। सड़क के गहरे गड्ढों में गंदा पानी भर जाने के कारण चालकों को उनकी वास्तविक गहराई का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं लग पाता। स्थानीय राहगीर मोहम्मद यासीन के अनुसार, सड़क के पूरी तरह टूट जाने से आवाजाही बहुत कठिन हो गई है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह अहम सड़क सुल्तानपुर मुख्यालय को सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग से मिलाती है और इस पर हर रोज 20 हजार से अधिक लोग सफर तय करते हैं। जलभराव के बीच गड्ढों से बचकर निकलने की कोशिश में गाड़ियां अनियंत्रित होने लगती हैं, जिससे दोपहिया चालकों के गिरने का अंदेशा बना रहता है। कई जगहों पर जलजमाव और संकरे हो चुके रास्ते के चलते दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है।
दैनिक यात्रियों और छात्रों को सफर में लग रहा अतिरिक्त समय
अमहट-गभड़िया मार्ग सुल्तानपुर के प्रमुख संपर्क तंत्र का बेहद अहम हिस्सा माना जाता है। इस सड़क से स्थानीय रहवासियों के अलावा दफ्तर जाने वाले नौकरीपेशा लोग, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी, व्यापारी वर्ग और मालवाहक वाहन नियमित तौर पर निकलते हैं। बदहाल सड़क के कारण लोगों को अपने गंतव्य, कार्यस्थल या शिक्षण संस्थानों तक पहुंचने में सामान्य से काफी अधिक समय खर्च करना पड़ रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि सड़क पर बने जानलेवा गड्ढों से बचने के लिए उन्हें लगातार गाड़ी को इधर-उधर मोड़ना पड़ता है। अचानक दिशा बदलने के कारण सामने से तेज गति में आ रहे अन्य वाहनों से सीधी भिड़ंत होने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि प्रशासन इस मार्ग की अविलंब मरम्मत कराकर लोगों को राहत प्रदान करे।
अधिकारियों से बार-बार गुहार, पर अब तक नहीं हुआ स्थायी समाधान
क्षेत्रीय निवासियों का स्पष्ट आरोप है कि इस मार्ग की जर्जर हालत को लेकर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई टिकाऊ हल नहीं निकाला गया। नागरिकों का कहना है कि खानापूर्ति के लिए महज कुछ गड्ढों में मलबा या गिट्टी डाल देने से समस्या नहीं सुलझेगी, बल्कि पूरी सड़क का व्यवस्थित पुनर्निर्माण जरूरी है ताकि कुछ ही महीनों में डामर दोबारा न उखड़े। वहीं दूसरी तरफ, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता का कहना है कि बरसात का दौर समाप्त होने के बाद सड़कों पर पैचिंग का कार्य शुरू करा दिया जाएगा। अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस व्यस्ततम मार्ग को गड्ढामुक्त कर हजारों राहगीरों की परेशानी दूर करता है।
















