जामिया मिल्लिया इस्लामिया में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए राहत भरा फैसला सामने आया है. पिछले कई दिनों से डिजिटल माध्यम से चल रही कक्षाओं और आगामी परीक्षाओं के स्वरूप को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को समाप्त करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी पूर्व आदेश निरस्त कर दिए हैं. रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी ताजा अधिसूचना के तहत कैंपस में अब सुचारू रूप से परंपरागत तरीके से पढ़ाई कराई जाएगी, जिससे लंबे समय से चल रहा डिजिटल सत्र समाप्त होने जा रहा है.
पुराने सभी सर्कुलर निरस्त, रजिस्ट्रार कार्यालय ने जारी किया नया आदेश
विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर मो. महताब आलम रिजवी ने 30 अक्टूबर को संशोधित परिपत्र जारी कर स्थिति स्पष्ट की. इस ताजा निर्देश के प्रभावी होने के साथ ही पूर्व में 24, 26 और 28 अक्टूबर को जारी किए गए सभी आदेश तत्काल प्रभाव से निष्प्रभावी घोषित कर दिए गए हैं. पिछले आदेशों के चलते छात्र लगातार इस बात को लेकर उलझन में थे कि उनकी आगामी पढ़ाई और आंतरिक मूल्यांकन डिजिटल माध्यम से होंगे या उन्हें संस्थान परिसर में उपस्थित होना होगा. प्रशासन द्वारा अपनी पुरानी रूपरेखा में किए गए इस बड़े बदलाव से हजारों विद्यार्थियों ने राहत की सांस ली है.
9 नवंबर तक ही ऑनलाइन सत्र, अगले दिन से क्लासरूम में जुटेंगे छात्र
नवीन शैक्षणिक कार्यक्रम के अनुसार डिजिटल माध्यम से व्याख्यानों का संचालन केवल 9 नवंबर 2026 तक ही जारी रहेगा. इसके उपरांत 10 नवंबर 2026 से सभी संकायों, विभागों और विभिन्न केंद्रों में भौतिक रूप से कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया जाएगा. इस कदम से शिक्षक और विद्यार्थी लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर आमने-सामने संवाद स्थापित कर सकेंगे. खासतौर पर प्रयोगशाला आधारित प्रायोगिक कार्य, समूह चर्चा और शोध परियोजनाओं से जुड़े छात्रों को इसका व्यापक लाभ मिलेगा, जिन्हें डिजिटल सत्र के दौरान व्यावहारिक विषयों को समझने में काफी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा था.
16 से 21 नवंबर के बीच पेन-पेपर माध्यम से द्वितीय मिड-टर्म
प्रशासन ने केवल दैनिक कक्षाओं की कार्यप्रणाली ही नहीं बदली, बल्कि आंतरिक मूल्यांकन के तौर-तरीकों को लेकर भी अहम दिशानिर्देश दिए हैं. रजिस्ट्रार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि संस्थान की सेकंड मिड-टर्म परीक्षाएं किसी भी दशा में वर्चुअल मोड में नहीं कराई जाएंगी. यह परीक्षाएं 16 नवंबर से 21 नवंबर 2026 के मध्य आयोजित की जाएंगी. सभी शिक्षार्थियों को निर्धारित समय-सारणी के अनुरूप अपने संबंधित विभागों में भौतिक रूप से उपस्थित होकर पेन और पेपर के माध्यम से पर्चे हल करने होंगे.
28 अक्टूबर के सर्कुलर से कितना अलग है नया फैसला
संस्थान द्वारा 28 अक्टूबर को जारी किए गए पुराने परिपत्र और वर्तमान निर्देश के बीच स्पष्ट अंतर देखा जा सकता है. पूर्व आदेश में डिजिटल पढ़ाई की अवधि को 24 नवंबर तक आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई थी, साथ ही दिसंबर महीने में होने वाली सत्र-अंत की परीक्षाओं को भी वर्चुअल माध्यम से कराने की बात कही गई थी. हालांकि परिसर के शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाने, शिक्षण की गुणवत्ता बनाए रखने और विद्यार्थियों की चिंताओं को देखते हुए प्रशासन ने इस पूरे ढांचे को पलट दिया. अब सभी अकादमिक गतिविधियां पूर्णतः जमीनी स्तर पर संचालित की जाएंगी.
2026-27 के शैक्षणिक कैलेंडर और उपस्थिति पर सख्त निर्देश
विश्वविद्यालय प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान सत्र की शेष शैक्षणिक गतिविधियां, जिनमें प्रैक्टिकल वर्क, सेमिनार और प्रोजेक्ट असेसमेंट शामिल हैं, वर्ष 2026-27 के मूल शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार ही पूरी की जाएंगी. इसके अतिरिक्त सभी डीन, विभागाध्यक्षों और केंद्र निदेशकों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे विद्यार्थियों के दैनिक उपस्थिति रजिस्टर और परीक्षा रिकॉर्ड को पूर्ण पारदर्शिता के साथ संरक्षित रखें. परिसर खुलने के बाद कक्षाओं में न्यूनतम उपस्थिति के स्थापित नियमों में किसी भी तरह की शिथिलता प्रदान नहीं की जाएगी.





















