फिलीपींस के सेबू शहर में पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों के साथ एक खास संवाद कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने देश की बढ़ती हुई ताकत और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूत होती स्थिति का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुनिया भर में भारत का मान-सम्मान और कद लगातार ऊपर उठा है। आज वैश्विक स्तर पर हालात ऐसे हैं कि जब भारत किसी मंच पर अपनी बात रखता है, तो दुनिया के बाकी देश उसे बेहद गौर से सुनते हैं।
समुदाय के लोगों से बातचीत करते हुए उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जब किसी भी देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ती है, तो उससे वहां के आम नागरिकों के भीतर गर्व और आत्मविश्वास की भावना अपने आप मजबूत हो जाती है। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि भारत ने हमेशा से वसुधैव कुटुंबकम की भावना को सर्वोपरि रखा है और पूरी दुनिया को एक ही परिवार के रूप में देखा है। यही विशिष्ट सोच और दृष्टिकोण भारत को वैश्विक पटल पर अन्य देशों से बिल्कुल अलग और अनूठी पहचान दिलाता है।
आर्थिक मोर्चे पर देश की तेज रफ्तार
कार्यक्रम के दौरान देश की अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए रक्षा मंत्री ने आंकड़ों के जरिए पिछले कुछ वर्षों में आए बड़े बदलाव को समझाया। उन्होंने बताया कि लगभग 12 साल पहले भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में काफी पीछे यानी 10वें या 11वें पायदान पर हुआ करता था। लेकिन आज कड़ी मेहनत और सुधारों के दम पर देश लंबी छलांग लगाकर पांचवें स्थान पर पहुंच चुका है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि समय रहते पश्चिम एशिया में गंभीर संकट पैदा नहीं हुआ होता, तो भारतीय अर्थव्यवस्था आज और भी अधिक गति से आगे निकल चुकी होती। अपनी इस बात के समर्थन में उन्होंने देश की आर्थिक मजबूती और सामरिक क्षमताओं का हवाला दिया।
आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय सेना द्वारा चलाई गई सैन्य कार्रवाई का भी विशेष तौर पर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह देश की सुरक्षा को ताक पर रखने वालों को करारा जवाब दिया गया। घटनाक्रम के मुताबिक 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम इलाके में आतंकवादियों ने कुछ निर्दोष लोगों पर बेहद कायराना और घातक हमला किया था। इस खौफनाक वारदात में कुल 26 नागरिकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। चश्मदीदों और रिपोर्टों के अनुसार, आतंकियों ने हमले से पहले लोगों का धर्म पूछा था और उसके बाद उन्हें मौत के घाट उतार दिया था। मारे जाने वाले इन लोगों में देश-विदेश से घूमने आए पर्यटकों की एक बहुत बड़ी संख्या शामिल थी, जिससे पूरे देश में गहरा आक्रोश फैल गया था।
ऑपरेशन सिंदूर और पड़ोसी देश की बौखलाहट
इस दिल दहला देने वाली और अमानवीय घटना के बाद भारतीय सेना ने बेहद कड़ा रुख अपनाया और 7 मई को आतंकवादियों के सफाए के लिए ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत की। भारतीय सेना की इस जबरदस्त जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके के भीतर बने कुल 9 आतंकी ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया। इन ठिकानों में मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हाफिद सईद के जमात-उद-दावा जैसे कुख्यात संगठनों के शिविर भी शामिल थे, जिन्हें इस ऑपरेशन में निशाना बनाया गया।
दूसरी तरफ, पाकिस्तानी सेना ने इस कार्रवाई से बौखलाकर भारत पर ड्रोन और मिसाइलों से जवाबी हमले करने की नापाक कोशिश की। हालांकि, भारतीय सीमा पर तैनात अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम्स जैसे कि आकाशतीर और एस-400 ने उन सभी खतरों को हवा में ही पूरी तरह नष्ट कर दिया। इसके बाद भारत ने अपनी रक्षात्मक ताकत का प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के भीतर 9 से 11 वायुसेना के ठिकानों को जमींदोज कर दिया। इस सख्त सैन्य प्रहार से पाकिस्तानी सेना बुरी तरह घबरा गई और उसने संघर्षविराम के लिए गुहार लगानी शुरू कर दी। पाकिस्तान के डीजीएमओ ने खुद भारतीय समकक्ष से संपर्क साधकर तनाव को तुरंत समाप्त करने का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद दोनों देशों के बीच अस्थायी युद्धविराम पर सहमति बनी। भारत ने अपनी इस पूरी सैन्य कार्रवाई के पुख्ता प्रमाण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने भी रखे, जिससे यह बिल्कुल साफ हो गया कि यह कदम केवल आत्मरक्षा तक सीमित नहीं था, बल्कि आतंकवाद के पूरे तंत्र को जड़ से उखाड़ फेंकने की एक ठोस नीति का हिस्सा था।

















