दीवाली की रात राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में जश्न का माहौल धीरे-धीरे प्रदूषण की घनी चादर में तब्दील हो गया। रात गहराने के साथ ही पूरे इलाके में धुएं का गुबार फैल गया और सड़कों तथा रिहायशी बस्तियों में दृश्यता का स्तर काफी कम हो गया। लोगों ने आंखों में चुभन, सांस लेने में तकलीफ और हवा में बारूद की तेज महक की शिकायतें दर्ज कराईं। हालांकि प्रशासन की ओर से पटाखों के इस्तेमाल पर रोक लगाने और केवल हरित पटाखों का उपयोग करने की हिदायत दी गई थी, फिर भी तमाम बस्तियों में धड़ल्ले से आतिशबाजी का दौर जारी रहा। इस भारी प्रदूषण के कारण रात के दस बजते-बजते राष्ट्रीय राजधानी के बीस निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई गंभीर श्रेणी में जा पहुंचा, जबकि उस समय औसत एक्यूआई तीन सौ इकहत्तर दर्ज किया गया।
सोनिया विहार और जहांगीरपुरी में सबसे खराब स्थिति
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को रात दस बजे के समय राष्ट्रीय राजधानी के कुल उनसठ निगरानी केंद्रों में से बीस जगहों पर हवा की स्थिति गंभीर पाई गई। इसके अलावा छह केंद्रों पर यह खराब और बाकी तैंतीस जगहों पर बेहद खराब श्रेणी में रिकॉर्ड की गई। सोनिया विहार में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक दर्ज किया गया जहां एक्यूआई चार सौ तरेसठ तक जा पहुंचा, जबकि जहांगीरपुरी में यह आंकड़ा चार सौ पचास पर पहुंच गया। इसके अलावा बुराड़ी, अलीपुर और पंजाबी बाग जैसे इलाकों में भी हवा की गुणवत्ता बेहद चिंताजनक बनी रही। सोनिया विहार, जहांगीरपुरी, पंजाबी बाग, बुराड़ी, ओखला और रोहिणी वे प्रमुख इलाके रहे जहां पूरे दिन हवा की सेहत गंभीर श्रेणी के दायरे में ही टिकी रही।
शाम ढलते ही तेज हुई आतिशबाजी
दिन के वक्त शहर की अधिकांश सड़कें और रास्ते काफी हद तक शांत नजर आए, लेकिन शाम को पांच से छह बजे के बीच अचानक आतिशबाजी का सिलसिला जोर पकड़ने लगा। जैसे-जैसे रात आगे बढ़ी, पटाखों का शोर और उनसे निकलने वाला धुआं भी बढ़ता चला गया, जिससे कई क्षेत्रों में धुंध की परत जम गई। पीतमपुरा, बुराड़ी, मयूर विहार और लुटियंस दिल्ली के कुछ हिस्सों से लगातार पटाखे चलाए जाने की खबरें सामने आती रहीं। स्थानीय निवासियों के बयानों के मुताबिक बाहरी दिल्ली के पीतमपुरा और बुराड़ी में आतिशबाजी का दौर काफी देर तक चला, जिसमें बुराड़ी में इसकी तीव्रता सबसे ज्यादा महसूस की गई। मयूर विहार के साथ-साथ बिशंबरदास मार्ग और लुटियंस दिल्ली के लोगों ने भी देर रात तक तेज आवाज में पटाखे फोड़े जाने की बात कही। हालांकि कुछ चुनिंदा जगहों पर रात बीतने के साथ इसकी तीव्रता में थोड़ी कमी जरूर आई।
प्रशासनिक पाबंदियां और लोगों की चिंताएं
दिल्ली सरकार की ओर से दीवाली के पर्व से पहले ही नागरिकों से उच्चतम न्यायालय के दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने और केवल हरित पटाखों का ही इस्तेमाल करने की अपील की गई थी। पूर्वी दिल्ली के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए आदेशों के मुताबिक सात और आठ नवंबर को सुबह छह से सात बजे तथा रात आठ से दस बजे तक का समय ही हरित पटाखे जलाने के लिए तय किया गया था। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। हवा की गुणवत्ता के खराब होने पर नागरिकों ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी गहरी चिंताएं जाहिर कीं। कई उपयोगकर्ताओं ने हवा में धुएं की तेज गंध, घटती दृश्यता और सांस लेने में हो रही परेशानियों का खुलकर जिक्र किया। कुछ जगहों पर धुएं का घनत्व इतना अधिक था कि सड़क के किनारे लगे खंभों की रोशनियां भी धुंधली नजर आने लगीं।
आगे और गंभीर हो सकते हैं हालात
वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली की तरफ से यह आशंका जताई गई है कि नौ नवंबर से राष्ट्रीय राजधानी की हवा एक बार फिर गंभीर श्रेणी में लौट सकती है और अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम से जुड़ी प्रतिकूल दशाएं प्रदूषक तत्वों को वायुमंडल में घुलने-मिलने से रोक रही हैं। इसके साथ ही गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, दीवाली पर छोड़े गए पटाखे और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाए जाने की घटनाएं मिलकर प्रदूषण के स्तर को लगातार ऊपर उठा रही हैं। चेतावनी प्रणाली के नियमों के मुताबिक यदि वेंटिलेशन इंडेक्स छह हजार वर्ग मीटर प्रति सेकंड से नीचे चला जाता है और हवा की औसत गति दस किलोमीटर प्रति घंटे से कम रहती है, तो हवा में मौजूद कचरा और कण आसानी से बिखर नहीं पाते। नियंत्रण बोर्ड के तय पैमानों के अनुसार शून्य से पचास तक का एक्यूआई अच्छा, इक्यावन से सौ संतोषजनक, एक सौ एक से दो सौ मध्यम, दो सौ एक से तीन सौ खराब, तीन सौ एक से चार सौ बेहद खराब और चार सौ एक से पांच सौ के बीच का आंकड़ा गंभीर श्रेणी में गिना जाता है।















