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तीन बहनों को पढ़ाया और रेलवे दरोगा बने रांची के विकास की 6 महीने में नौकरी छूटी, झलका दर्दझारखंड
21 अग॰ 2026, 7:55 am (35 दिन पहले)· 1

तीन बहनों को पढ़ाया और रेलवे दरोगा बने रांची के विकास की 6 महीने में नौकरी छूटी, झलका दर्द

अपनी तीन बहनों की पढ़ाई और शादी का खर्च उठाने वाले रांची के विकास ने रेलवे दरोगा की नौकरी गंवाने के बाद अपना दर्द बयां किया है।

झारखंड के रांची शहर से एक बेहद भावुक और संघर्षपूर्ण कहानी सामने आई है, जहां अपनी काबिलियत से रेलवे दरोगा बने विकास को महज 6 से 7 महीने के भीतर अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है। अपने पिता की कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद ट्यूशन पढ़ाकर तीन बहनों की पढ़ाई और शादी का खर्च उठाने वाले विकास के सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। नौकरी चले जाने के बाद विकास गहरे मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं और उन्होंने अपने इस अप्रत्याशित दर्द को बयां किया है।

गरीबी और मजबूरी के बीच बहनों की जिम्मेदारी

विकास के पारिवारिक बैकग्राउंड पर नजर डालें तो उनके पिता पेशे से राजमिस्त्री थे। घर में आर्थिक तंगी इतनी ज्यादा थी कि बच्चों की सही ढंग से परवरिश कर पाना भी मुमकिन नहीं हो पा रहा था। संसाधनों के अभाव के कारण विकास की तीनों बहनों को बचपन में अपनी नानी के घर रहना पड़ा था। जब विकास थोड़े बड़े हुए, तो उन्होंने हार मानने के बजाय खुद जिम्मेदारी संभालने का फैसला किया। उन्होंने छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और जैसे ही कुछ पैसे हाथ में आने लगे, अपनी तीनों बहनों को वापस घर ले आए।

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ट्यूशन से होने वाली सीमित कमाई के सहारे ही विकास ने न केवल अपनी बहनों की शिक्षा पूरी करवाई, बल्कि उनकी शादी कराकर उन्हें अपने-अपने घरों में स्थापित भी किया। इस पूरे संघर्ष के दौरान विकास ने अपनी पढ़ाई का सिलसिला भी जारी रखा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे रहे।

₹200 की कोचिंग से रेलवे दरोगा तक का सफर

विकास की लगन और पढ़ाई के प्रति समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे कोचिंग संस्थान की निर्धारित 500 रुपये की फीस देने में असमर्थ थे। हालांकि, उनकी मेहनत और ईमानदारी को देखते हुए उनके शिक्षकों ने एक मिसाल पेश की और उन्हें सिर्फ 200 रुपये की फीस में पढ़ने की अनुमति दी। अध्यापकों के इसी सहयोग और अपनी दिन-रात की मेहनत के बल पर विकास ने कठिन मानी जाने वाली रेलवे दरोगा परीक्षा में सफलता हासिल की।

6 महीने का सम्मान और मन में आत्महत्या के विचार

परीक्षा पास करने के बाद विकास को समाज में सम्मान मिला और परिवार को उम्मीद थी कि अब दुखों के दिन खत्म हो चुके हैं। लेकिन जब उनकी खुद की शादी की बारी आई, तो अचानक नौकरी चले जाने से उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। विकास का कहना है कि उन्हें मिलने वाला यह सम्मान केवल 6 से 7 महीने ही टिक सका। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि अपनी मेहनत और योग्यता से परीक्षा पास करने के बावजूद उनके साथ यह अन्याय क्यों हो रहा है।

विकास ने भारी मन से कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है मानो कोई उनसे बदला ले रहा हो। नौकरी छिन जाने के बाद उन्हें भविष्य का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा है और उनके मन में निराशाजनक एवं आत्महत्या जैसे बुरे विचार आ रहे हैं। इसके बावजूद, वे इस उम्मीद के सहारे टिके हैं कि शायद आने वाले दिनों में सब कुछ फिर से ठीक हो जाएगा।

सवाल-जवाब

रांची के विकास का पारिवारिक बैकग्राउंड क्या था?
विकास के पिता एक राजमिस्त्री थे। घर की खराब आर्थिक स्थिति के कारण उनकी तीन बहनें बचपन में नानी के घर रहती थीं।
विकास ने रेलवे दरोगा की परीक्षा की तैयारी कैसे की?
विकास ने बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर पैसे जुटाए। उनकी लगन देखकर कोचिंग संस्थान के शिक्षकों ने उन्हें 500 रुपये के बजाय 200 रुपये की फीस में पढ़ने दिया।
विकास ने रेलवे में कितने समय तक नौकरी की?
विकास ने रेलवे दरोगा के पद पर केवल 6 से 7 महीने ही सेवा दी, जिसके बाद उनकी नौकरी चली गई।
नौकरी जाने के बाद विकास की मानसिक स्थिति कैसी है?
नौकरी छूटने से विकास अत्यधिक निराश हैं और भविष्य को लेकर भ्रमित हैं, जिससे उनके मन में आत्महत्या तक के विचार आ रहे हैं।
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