उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में स्थित गंगोह विधानसभा क्षेत्र का बसी कुंडा गांव इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की कमी और गंभीर जलभराव से जूझ रहा है। राज्य सरकार हर गांव तक विकास योजनाएं पहुंचाने का दावा करती है, लेकिन बसी कुंडा की जमीनी हकीकत इन दावों के विपरीत नजर आती है। गांव की गलियों और मुख्य रास्तों पर गंदा पानी जमा होने से सड़कें तालाब में तब्दील हो चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि उन्हें अपने घरों से बाहर कदम रखने से पहले कई बार सोचना पड़ता है। लगातार जलभराव और गंदे पानी की निकासी न होने से पूरे क्षेत्र में फैली गंदगी के कारण ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित, स्कूल और मदरसे के रास्ते बंद
जलभराव की इस गंभीर समस्या ने ग्रामीणों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित किया है। गांव के रास्तों पर जमा गंदा पानी 12 महीने इसी तरह बना रहता है, जिसके कारण बच्चों का स्कूल और कॉलेज जाना बेहद कठिन हो गया है। प्राथमिक स्कूल और मदरसे के बिल्कुल सामने जलजमाव होने की वजह से रास्ते बेहद खराब हो चुके हैं। पानी में गिरकर बच्चों के चोटिल होने और गंदे पानी के संपर्क में आने से बीमारियां फैलने का डर बना रहता है। महिलाओं का कहना है कि लगातार गंदगी बढ़ने से गांव में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। जलभराव और बदबू के कारण रिश्तेदारों और मेहमानों ने भी गांव में आना-जाना बंद कर दिया है।
जनाजे ले जाने में लाचारी और मांगलिक आयोजनों पर संकट
गांव के रास्तों की जर्जर हालत और जलभराव का असर अंतिम संस्कारों पर भी पड़ रहा है। बीते कल एक ग्रामीण के भाई की बेटी का निधन हो गया, तो उसके जनाजे को कब्रिस्तान तक ले जाना भी एक बड़ी चुनौती बन गया। गंदे पानी की अधिकता के कारण जनाजे को बाइक पर गोद में बैठाकर ले जाने पर परिजन मजबूर हुए। इसके अलावा, एक ग्रामीण के घर में 10 दिन बाद बेटी की शादी तय है, लेकिन घर के बाहर भरे गंदे पानी और बदहाल रास्तों को देखकर परिवार बेहद चिंतित है कि इस स्थिति में रिश्तेदार और मेहमान समारोह में कैसे शामिल हो पाएंगे।
प्रशासनिक उपेक्षा और खोखले आश्वासनों से ग्रामीणों में रोष
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से कई बार शिकायतें कीं, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखले आश्वासन ही दिए गए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न मामलों में त्वरित कार्रवाई की बात कही जाती है, परंतु ग्रामीणों का कहना है कि बसी कुंडा गांव की इस पुरानी समस्या पर किसी भी अधिकारी की जांच या बुलडोजर का असर दिखाई नहीं दे रहा है। लंबे समय से उपेक्षा झेल रहे ग्रामीणों का कहना है कि लगातार मिलती निराशा से वे बेहद आहत हैं और जल्द से जल्द इस समस्या से मुक्ति पाना चाहते हैं।



















