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उत्तर प्रदेश में फर्जी दवाओं के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, सहारनपुर में तहखाने से बरामद हुई भारी पैकेजिंग सामग्रीउत्तर प्रदेश
2 सित॰ 2026, 9:57 pm (10 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश में फर्जी दवाओं के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश, सहारनपुर में तहखाने से बरामद हुई भारी पैकेजिंग सामग्री

उत्तर प्रदेश एफएसडीए ने लखनऊ और सहारनपुर के बीच फैले नकली दवाओं के अवैध कारोबार पर बड़ा एक्शन लिया है। सहारनपुर के नागल क्षेत्र में एक मकान के तहखाने से 32 किलो से अधिक दवा स्ट्रिप्स, मशीनरी और फर्जी कार्टन जब्त किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने राज्य में नकली और सस्ती दवाओं के संगठित नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ा अभियान चलाया है। लखनऊ में एक मुख्य संदिग्ध की गिरफ्तारी के बाद मिली जानकारियों के आधार पर अधिकारियों ने सहारनपुर जिले में छापा मारकर एक गुप्त निर्माण और पैकेजिंग केंद्र का खुलासा किया है। यह कार्रवाई यह दर्शाती है कि राज्य के विभिन्न जिलों में अवैध दवाओं की सप्लाई किस तरह एक योजनाबद्ध तरीके से की जा रही थी। जांच एजेंसियों ने मौके से भारी मात्रा में दवा स्ट्रिप्स, पैकेजिंग मशीनरी, प्रिंटेड कार्टन और एल्युमिनियम फॉयल बरामद कर सील कर दिए हैं।

सहारनपुर के मकान में मिला गुप्त तहखाना और सेटअप

इस पूरे मामले की शुरुआती कड़ी लखनऊ से जुड़ी हुई है, जहां पुलिस और एसओजी की टीम ने नकली दवाओं की बिक्री की जांच के दौरान सहारनपुर निवासी एजाज नाम के व्यक्ति को पकड़ा था। गिरफ्तारी के बाद हुई गहन पूछताछ में एजाज ने अवैध नेटवर्क के मुख्य ठिकानों और काम करने के तरीके के बारे में अहम जानकारियां दीं। इन सुरागों के आधार पर एफएसडीए की विशेष टीम ने सहारनपुर के नागल क्षेत्र के ग्राम कोटा में स्थित एक रिहाइशी मकान में अचानक छापेमारी की।

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जब जांच टीम मौके पर पहुंची, तो ऊपरी कमरे में विभिन्न दवा कंपनियों के कॉरुगेटेड बॉक्स रखे हुए मिले। हालांकि, असली अवैध काम मकान के नीचे बने एक गुप्त तहखाने में चल रहा था। तहखाने के भीतर दवाओं की पैकेजिंग के लिए पूरा औद्योगिक ढांचा तैयार किया गया था। वहां से अधिकारियों को स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो, डाई-पंच और भारी मात्रा में प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल बरामद हुई। प्राथमिक पड़ताल से स्पष्ट हुआ कि इस स्थान का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर फर्जी दवाओं को असली जैसी पैकिंग में बंद करने के लिए किया जा रहा था।

32 किलो से अधिक दवाएं और भारी पैकेजिंग सामग्री जब्त

एफएसडीए द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, मौके से लगभग 32.555 किलो दवा स्ट्रिप्स बरामद की गई हैं। इसके अलावा 973 प्रिंटेड कार्टन और विशेष रूप से Rosuvas F-10 दवा के 472 प्रिंटेड कार्टन जब्त किए गए। छापेमारी के दौरान कमरे और तहखाने से पीली तथा सफेद रंग की गोलियों का बड़ा स्टॉक, सादा एल्युमिनियम फॉयल और प्रिंटेड फॉयल भी मिली है।

अधिकारियों ने मौके पर मौजूद सभी मशीनों, प्रिंटेड सामग्री और कच्चे माल को तुरंत प्रभाव से सील कर दिया। इसके साथ ही, वहां मिली दवाओं के चार अलग-अलग नमूने एकत्र कर उन्हें विस्तृत जांच और लैब विश्लेषण के लिए शासकीय प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच टीम इस बात का पता लगा रही है कि इन गोलियों में कौन-कौन से रासायनिक तत्व मौजूद थे और क्या वे स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं।

अमीनाबाद में रिकॉर्ड का अंतर और लैब रिपोर्ट के खुलासे

सहारनपुर में हुई इस बड़ी कार्रवाई के साथ-साथ एफएसडीए ने लखनऊ के प्रमुख दवा बाजार अमीनाबाद में भी समानांतर जांच चलाई। वहां विभिन्न दवा विक्रेताओं और फर्मों के खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय इनवॉइस और स्टॉक रिकॉर्ड की गहन समीक्षा की गई। इस पड़ताल के दौरान Levera-500 दवा के दो अलग-अलग बैचों के नमूने लेकर राजकीय प्रयोगशाला भेजे गए थे।

प्रयोगशाला से आई जांच रिपोर्ट में Levera-500 के ये दोनों बैच गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे और उन्हें आधिकारिक रूप से अमान्य यानी नकली घोषित कर दिया गया। इसके अलावा, अमीनाबाद के स्टॉक रजिस्टरों और बिक्री इनवॉइस का मिलान करने पर खरीद और बिक्री के आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आया। इस विसंगति से यह साफ हो गया कि बाजार में बिना वैध दस्तावेजों के फर्जी दवाएं उतारी जा रही थीं।

उत्तराखंड से जुड़े तार और दो जिलों में एफआईआर दर्ज

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह अवैध नेटवर्क किसी एक शहर तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार पड़ोसी राज्यों और जिलों से भी जुड़े हुए हैं। शुरुआती एफआईआर में कई संदिग्ध व्यक्तियों और व्यावसायिक फर्मों के नाम शामिल किए गए हैं। विशेष रूप से उत्तराखंड के रुड़की और हरिद्वार क्षेत्रों से जुड़ी कुछ फर्मों और व्यक्तियों की भूमिका अब गहन जांच के घेरे में है। अधिकारियों को अंदेशा है कि दवाओं के निर्माण, कच्चे माल, फॉयल और कार्टन की आपूर्ति अलग-अलग स्थानों से की जा रही थी।

फिलहाल एफएसडीए ने लखनऊ और सहारनपुर दोनों स्थानों पर संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस और औषधि प्रशासन की संयुक्त टीमें अब इस बात का पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क द्वारा तैयार की गई नकली दवाएं उत्तर प्रदेश के किन-किन जिलों और रिटेल दुकानों तक पहुंचाई जा चुकी हैं। इस अंतरराज्यीय गिरोह में शामिल अन्य सभी लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

सवाल-जवाब

सहारनपुर में एफएसडीए की कार्रवाई के दौरान क्या-क्या सामान बरामद हुआ?
छापेमारी के दौरान लगभग 32.555 किलो दवा स्ट्रिप्स, 973 प्रिंटेड कार्टन, Rosuvas F-10 के 472 कार्टन, पीली व सफेद गोलियां, स्ट्रिपिंग मशीन और पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई।
इस नकली दवा नेटवर्क का खुलासा कैसे हुआ?
लखनऊ में पुलिस और एसओजी द्वारा पकड़े गए सहारनपुर निवासी एजाज से पूछताछ के बाद एफएसडीए को सहारनपुर के नागल क्षेत्र स्थित मकान के तहखाने की जानकारी मिली।
लखनऊ के अमीनाबाद बाजार में जांच के दौरान क्या खामियां मिलीं?
सरकारी प्रयोगशाला की जांच में Levera-500 के दो बैच असली नहीं पाए गए, और दवा विक्रेताओं के खरीद व बिक्री रिकॉर्ड के आंकड़ों में बड़ा अंतर मिला।
मामले में जांच एजेंसियों ने क्या कानूनी कार्रवाई की है?
एफएसडीए ने लखनऊ और सहारनपुर दोनों जिलों में एफआईआर दर्ज की है तथा रुड़की और हरिद्वार की संदिग्ध फर्मों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·10 दिन पहले

सहारनपुर और लखनऊ के बीच फैला यह नेटवर्क स्पष्ट करता है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में किस तरह संगठित गिरोह स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। तहखाने में औद्योगिक मशीनों का मिलना यह संकेत देता है कि यह कोई छिटपुट मामला नहीं, बल्कि एक गहरी साजिश है। आगे की जाँच में यह सामने आना लाजिमी है कि इन नकली दवाओं की आपूर्ति किन-किन जिलों के मेडिकल स्टोरों तक हुई थी, जिससे कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 दिन पहले

रोहन का विश्लेषण सही दिशा में है, लेकिन एक अपराध संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि असली चुनौती इस सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क और मास्टरमाइंड तक पहुँचना है। लखनऊ से सहारनपुर के बीच सप्लाई चेन का यह मॉडल दर्शाता है कि संगठित अपराधी अब अर्ध-शहरी इलाकों के गुप्त तहखानों को अपनी सुरक्षित पनाहगाह बना रहे हैं। लैब रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इन गोलियों में कौन से खतरनाक रसायन इस्तेमाल हुए, जिसके आधार पर एनडीपीएस या अन्य कठोर धाराओं के तहत कड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता होगी ताकि जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले इस अवैध कारोबार की जड़ों को पूरी तरह काटा जा सके।

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