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उत्तर प्रदेश में युवाओं को गो सेवा अभियान से जोड़ेगी सरकार, 10 हजार गो मित्र संभालेंगे जिम्मेदारीउत्तर प्रदेश
17 अग॰ 2026, 3:23 am (27 दिन पहले)· 4

उत्तर प्रदेश में युवाओं को गो सेवा अभियान से जोड़ेगी सरकार, 10 हजार गो मित्र संभालेंगे जिम्मेदारी

योगी सरकार उत्तर प्रदेश के गांवों में 10 हजार गो मित्र तैनात कर युवाओं को गो संरक्षण और प्राकृतिक खेती से जोड़ेगी। इस पहल के जरिए गोशालाओं को बायोगैस, जैविक खाद और स्वरोजगार के आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में गोवंश संरक्षण और गो सेवा के कार्यों को एक नए आयाम देने की तैयारी कर रही है। इस मुहीम में नई पीढ़ी और युवाओं, विशेष रूप से जेन जी (Gen Z) की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। राज्य प्रशासन का लक्ष्य ग्रामीण इलाकों में व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर युवा वर्ग को देसी गोवंश के संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और इसके आर्थिक-सामाजिक महत्व से जोड़ना है। इस विशेष योजना के तहत पूरे प्रदेश में लगभग 10,000 गो मित्र तैयार किए जाएंगे, जो गांव-गांव जाकर लोगों को प्रशिक्षित और प्रेरित करेंगे।

मास्टर ट्रेनर बनाएंगे 10 हजार गो मित्रों का नेटवर्क

अभियान को जमीनी स्तर पर सुचारू रूप से लागू करने के लिए एक चरणबद्ध ढांचा तैयार किया गया है। शुरुआती चरण में विशेषज्ञों द्वारा मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। इसके बाद ये मास्टर ट्रेनर ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर युवाओं को गो संरक्षण, गो सेवा और प्राकृतिक खेती के गुर सिखाएंगे। इस चयन प्रक्रिया में उन लोगों और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जाएगी जो पहले से ही गो सेवा के कार्यों में रुचि रखते हैं। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच गो संरक्षण को सिर्फ सरकारी आश्रय स्थलों तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण समृद्धि का आधार बनाने की है।

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता का नया मॉडल

राज्य सरकार इस पूरी व्यवस्था को केवल पशु कल्याण तक सीमित न रखकर इसे ग्रामीण विकास के एकीकृत मॉडल से जोड़ रही है। इस रणनीति के अंतर्गत गो संरक्षण को प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और स्थानीय रोजगार से जोड़ा जा रहा है। गोशालाओं को गोबर और गोमूत्र पर आधारित विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा आर्थिक तंत्र खड़ा करना है, जिससे गांवों में स्वतः रोजगार के नए अवसर पैदा हों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

बच्चों और युवाओं में जागरूकता फैलाने पर विशेष ध्यान

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अनुसार, अभियान का एक प्रमुख स्तंभ नई पीढ़ी को गोवंश के पारिस्थितिकीय और आर्थिक महत्व से अवगत कराना है। इसके लिए स्कूलों और ग्रामीण चौपालों के माध्यम से बच्चों व युवाओं तक संदेश पहुंचाया जाएगा। उन्हें देसी गोवंश की नस्लों, प्राकृतिक खेती में गाय की उपयोगिता और पर्यावरण संतुलन में इनकी भूमिका के बारे में विस्तार से समझाया जाएगा। गांवों में प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं का एक स्थायी ढांचा खड़ा किया जा रहा है, जो लंबे समय तक इस जागरूकता अभियान को चलाता रहेगा।

7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल और 12 लाख गोवंश

उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश की सुरक्षा और भरण-पोषण के लिए वर्तमान में विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर काम कर रहा है। पूरे प्रदेश में 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें 12 लाख से ज्यादा गोवंश को संरक्षण प्रदान किया गया है। इससे एक ओर जहां निराश्रित पशुओं को सुरक्षित ठिकाना मिला है, वहीं दूसरी ओर किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान में भी कमी आई है। राज्य सरकार ने व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए प्रति गोवंश दिए जाने वाले दैनिक भरण-पोषण अनुदान को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया है। इसके अलावा, पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन के लिए अधिकांश आश्रय स्थलों की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से की जा रही है।

मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन की सफलता

आम नागरिकों और पशुपालकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन को तेजी से आगे बढ़ा रही है। आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत अब तक लगभग 1.15 लाख पशुपालकों को करीब 1.85 लाख गोवंश सौंपे गए हैं। इस पहल से गोवंश को पारिवारिक परिवेश में उचित देखभाल मिल रही है। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश देश में सबसे बड़े पशुधन वाला राज्य है और दुग्ध उत्पादन के मामले में भी पूरे देश में पहले स्थान पर है। सरकार इस अपार क्षमता का उपयोग ग्रामीण आय बढ़ाने के लिए करना चाहती है।

गोशालाओं से बनने लगे व्यावसायिक उत्पाद

गोशालाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में गोबर से लकड़ी का विकल्प (गो-काष्ठ), गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले और दीपक का निर्माण शुरू हो चुका है। इसके साथ ही पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे प्राकृतिक कृषि इनपुट को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन निर्माण इकाइयों में महिला स्वयं सहायता समूहों को बड़े पैमाने पर शामिल किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण महिलाओं को अपने ही गांव में स्थायी स्वरोजगार मिल रहा है।

हर जिले की स्थानीय जरूरतों के हिसाब से मूल्यांकन

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने राज्य के सभी जिलों की गोशालाओं का व्यापक मूल्यांकन शुरू किया है। इस मूल्यांकन का उद्देश्य हर जिले के स्थानीय संसाधनों और परिस्थितियों के अनुकूल योजनाएं बनाना है। उदाहरण के लिए, जिन जिलों में गोबर की उपलब्धता अधिक है वहां बायोगैस संयंत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जबकि अन्य जिलों में जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों के निर्माण इकाइयां स्थापित की जाएंगी। इस रणनीति से स्थानीय स्तर पर संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग संभव हो सकेगा।

सवाल-जवाब

उत्तर प्रदेश सरकार कितने गो मित्र तैयार करने जा रही है?
योगी सरकार राज्य भर के गांवों में लगभग 10,000 गो मित्र तैयार करने की योजना बना रही है।
गो मित्र अभियान में मास्टर ट्रेनर की क्या भूमिका होगी?
मास्टर ट्रेनर पहले स्वयं प्रशिक्षित होंगे और फिर गांवों में युवाओं को गो संरक्षण, गो सेवा और प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण देंगे।
उत्तर प्रदेश में कितने गो आश्रय स्थल हैं और उनमें कितने गोवंश हैं?
प्रदेश में 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थल हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक गोवंश को संरक्षण दिया जा रहा है।
सरकार ने गोवंश के दैनिक भरण-पोषण अनुदान को कितना बढ़ाया है?
प्रति गोवंश मिलने वाले दैनिक अनुदान को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत कितने पशुपालकों को गोवंश सौंपे गए हैं?
इस योजना और पोषण मिशन के तहत लगभग 1.15 लाख पशुपालकों को करीब 1.85 लाख गोवंश सौंपे गए हैं।
गोशालाओं में गोबर से कौन-कौन से व्यावसायिक उत्पाद बनाए जा रहे हैं?
गोशालाओं में गोबर और गोमूत्र से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले, दीपक, पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·26 दिन पहले

उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल गो संरक्षण को केवल धार्मिक या सामाजिक दायित्व तक सीमित न रखकर, इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था, जैविक खेती और बायोगैस जैसे हरित ऊर्जा आयामों से जोड़ती है। 10,000 गो मित्रों के माध्यम से युवाओं और जेन ज़ी को स्वरोजगार और प्राकृतिक कृषि से जोड़ने का यह मॉडल यदि ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से उतरा, तो यह ग्रामीण भारत में खाद्य संस्कृति, कृषि स्थिरता और आजीविका के नए रास्ते खोल सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·26 दिन पहले

उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। 10 हजार गो मित्रों और गोशालाओं को बायोगैस व जैविक खाद जैसी व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर, राज्य प्रशासन पशु कल्याण को स्वरोजगार और स्थानीय आर्थिक विकास के एक मजबूत मॉडल में बदलने का प्रयास कर रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 दिन पहले

यह पहल महज़ पशु कल्याण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज़मीनी स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव का एक प्रभावी माध्यम बन सकती है। 10 हजार प्रशिक्षित युवाओं का यह नेटवर्क ग्रामीण मतदाताओं और स्वयंसेवकों को सीधे तौर पर प्रशासनिक प्राथमिकताओं से जोड़ेगा। मास्टर ट्रेनर और गो मित्रों का यह ढांचा भविष्य के चुनावों के मद्देनज़र ग्रामीण क्षेत्रों में एक मजबूत वैचारिक और सांगठनिक पैठ बनाने में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

इस प्रशासनिक पहल का कानूनी और सामाजिक परिप्रेक्ष्य यह है कि 10,000 गो मित्रों की तैनाती से ग्रामीण स्तर पर निगरानी तंत्र मजबूत होगा। गोशालाओं को व्यावसायिक और प्राकृतिक खेती से जोड़ने से आवारा पशुओं के प्रबंधन में आ रही कानूनी व प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान मिल सकता है, बशर्ते इस नेटवर्क का क्रियान्वयन पारदर्शी हो।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, 7,500 से अधिक गो आश्रय स्थलों और 12 लाख गोवंश के मौजूदा विशाल बुनियादी ढांचे के बीच यह 10,000 गो मित्रों की फौज प्रशासनिक दबाव को कम करने में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के इस विजन से गांवों में प्राकृतिक खेती और बायोगैस जैसी व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा तो मिलेगा, लेकिन असली चुनौती मास्टर ट्रेनर्स के जरिए इस नेटवर्क को बिना किसी प्रशासनिक सुस्ती के सीधे जमीनी स्तर तक पारदर्शी तरीके से पहुँचाने की होगी।

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