अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती दर्ज की गई है। बुधवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान अमेरिकी मानक कच्चा तेल वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट लगभग 96.10 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। इससे पहले हफ्ते की शुरुआत में पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कम होने के चलते कच्चे तेल में करीब 7 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखने को मिली थी। हालांकि, अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की दिशा को लेकर उपजे संशय ने बाजार में खरीदारों को फिर से सक्रिय कर दिया है, जिससे कीमतें संभलती हुई 96 डॉलर के आंकड़े को पार कर गई हैं।
शांति वार्ता पर कतर की मध्यस्थता और ईरान का रुख
पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि दोनों देश मध्यस्थों द्वारा मतभेदों को पाटने के लिए रखे गए नए शांति प्रस्तावों का फिलहाल मूल्यांकन कर रहे हैं। इस कूटनीतिक पहल के बावजूद तेहरान की तरफ से आए बयानों ने तेल बाजारों को सतर्क कर दिया है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख ने सोशल मीडिया पर अपने एक बयान में कहा कि वाशिंगटन की ओर से मौजूदा जवाब असंतोषजनक बना हुआ है। इस बयान के बाद निवेशकों में यह चिंता गहरा गई है कि समझौते की राह अभी भी आसान नहीं है।
सीमित सैन्य कार्रवाई और बाजार की कुल स्थिति
क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की बात करें तो अमेरिका ने इस सप्ताह की शुरुआत में ईरान के खिलाफ रक्षात्मक हमले किए थे। अमेरिकी संपत्तियों के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों को इन हमलों में निशाना बनाया गया था। इन हमलों का दायरा काफी सीमित रखा गया था, जिससे यह संकेत मिला कि दोनों पक्षों के बीच तुरंत किसी बड़े पैमाने के सैन्य अभियान की शुरुआत होने की आशंका फिलहाल नहीं है। इसके अलावा ट्रंप ने ईरान पर फौरन हमला करने की कोई प्रत्यक्ष योजना न होने का संकेत दिया, यद्यपि इजराइल ने इस सप्ताह हमले की संभावना का इशारा किया था। पूरे सप्ताह के समग्र प्रदर्शन को देखें तो अमेरिकी तेल मानक डब्ल्यूटीआई अभी भी इस हफ्ते लगभग 6 प्रतिशत नीचे चल रहा है। इस साप्ताहिक गिरावट का मुख्य कारण संभावित कूटनीतिक सफलता की उम्मीदें और पश्चिम एशिया से कच्चे तेल के निर्यात में सुधार के संकेत रहे हैं।
डब्ल्यूटीआई कच्चा तेल और इसके मानक की विशेषताएं
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल की प्रमुख किस्मों में से एक है। वैश्विक बाजार में ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ डब्ल्यूटीआई शीर्ष तीन प्रमुख तेल प्रकारों में गिना जाता है। अपने अपेक्षाकृत कम गुरुत्वाकर्षण और कम सल्फर मात्रा के कारण इसे क्रमशः 'लाइट' और 'स्वीट' तेल भी कहा जाता है। कम सल्फर और उच्च गुणवत्ता की वजह से इसे रिफाइन करना काफी आसान माना जाता है। इस कच्चे तेल का स्रोत संयुक्त राज्य अमेरिका है और इसका वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे 'दुनिया के पाइपलाइन का चौराहा' माना जाता है। वैश्विक तेल बाजार के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण बेंचमार्क है और वित्तीय मीडिया में इसके भाव लगातार उद्धृत किए जाते हैं।
कच्चे तेल की कीमतों को तय करने वाले प्रमुख वैश्विक कारक
अन्य संपत्तियों की तरह डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल की कीमत का निर्धारण भी मुख्य रूप से मांग और आपूर्ति के संतुलन पर निर्भर करता है। जब वैश्विक आर्थिक विकास मजबूत होता है, तो ऊर्जा की मांग बढ़ती है और कीमतें ऊपर जाती हैं, जबकि कमजोर वैश्विक विकास मांग को घटाकर कीमतों पर दबाव डालता है। राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध अक्सर तेल की आपूर्ति को बाधित करते हैं, जिससे बाजार में भारी उतार-चढ़ाव आता है।
इसके अलावा प्रमुख तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक के फैसले कीमतों को संचालित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल का व्यापार मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए अमेरिकी डॉलर का मूल्य भी डब्ल्यूटीआई की कीमतों पर सीधा असर डालता है। कमजोर अमेरिकी डॉलर तेल को अन्य मुद्राओं के धारकों के लिए अधिक किफायती बनाता है जिससे मांग बढ़ सकती है, जबकि मजबूत डॉलर से तेल महंगा हो जाता है।
साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट और ओपेक की भूमिका
अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और अमेरिकी ऊर्जा सूचना एजेंसी यानी ईआईए द्वारा हर सप्ताह जारी की जाने वाली तेल भंडारण रिपोर्टें डब्ल्यूटीआई के मूल्य पर त्वरित प्रभाव डालती हैं। भंडारण के आंकड़ों में होने वाले बदलाव मांग और आपूर्ति के रुझान को स्पष्ट करते हैं। यदि रिपोर्ट में इन्वेंट्री में गिरावट दिखती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत देती है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ती हैं। इसके विपरीत, अधिक भंडारण आपूर्ति में बढ़ोतरी का संकेत देकर कीमतों को नीचे धकेलता है। एपीआई की रिपोर्ट हर मंगलवार को प्रकाशित होती है, जबकि ईआईए अपनी रिपोर्ट उसके ठीक अगले दिन जारी करता है। लगभग 75 प्रतिशत मौकों पर इन दोनों रिपोर्टों के परिणाम एक दूसरे के 1 प्रतिशत के दायरे में रहते हैं। चूंकि ईआईए एक सरकारी एजेंसी है, इसलिए इसके आंकड़ों को बाजार में अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
वहीं ओपेक 12 तेल उत्पादक देशों का एक संगठन है, जो साल में दो बार होने वाली बैठकों में सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा सामूहिक रूप से तय करता है। जब ओपेक उत्पादन कोटा घटाने का फैसला करता है, तो वैश्विक आपूर्ति सख्त हो जाती है और तेल की कीमतें चढ़ने लगती हैं। उत्पादन बढ़ाने पर इसका ठीक उल्टा असर दिखता है। ओपेक प्लस इसी समूह का विस्तारित रूप है, जिसमें दस अतिरिक्त गैर-ओपेक सदस्य शामिल हैं, जिनमें सबसे प्रमुख देश रूस है।
मुद्रा बाजारों और सोने पर कूटनीतिक घटनाक्रम का असर
पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और ईरान कूटनीति की उम्मीदों का असर बुधवार को एशियाई सत्र में वैश्विक वित्तीय बाजारों पर साफ देखने को मिला। कूटनीतिक उम्मीदों के चलते सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) पिछले दिन के दो सप्ताह के निचले स्तर से थोड़ा संभलकर ऊपर चढ़ी, जो कि रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की कम सख्त प्रतिक्रिया के बाद बना था। हालांकि, अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के इंतजार के बीच यह बढ़त सीमित दायरे में रही।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) फिसलकर 158.50 से नीचे आ गया। इससे पहले जापानी मुद्रा में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के जोखिम के कारण डॉलर की दो दिन की बढ़त का सिलसिला टूटा, जिसने पिछले दिन तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर को छुआ था। कमजोर डॉलर ने मुद्रा जोड़ी पर अतिरिक्त दबाव डाला। वहीं सोने की बात करें तो यह 3,900 डॉलर से नीचे के स्तर से पिछले दिन की तेजी को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष करता दिखा। एशियाई सत्र में सोना एक सीमित दायरे में घूमता रहा, क्योंकि ट्रेडर अमेरिकी मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बीच अल्पकालिक अस्थिरता को लेकर सतर्क हैं। ईरान कूटनीति की उम्मीदों ने डॉलर को कमजोर कर सोने को सहारा जरूर दिया, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के अनुमानों ने सोने की बढ़त को सीमित रखा।


















