बंगाल की खाड़ी के ऊपर गहराया गंभीर मौसमी संकट अब तटीय इलाकों के बेहद करीब पहुंच चुका है। चक्रवात अर्नब से हुए नुकसान से लोग अभी उबर भी नहीं पाए थे कि चक्रवाती तूफान मुरासु ने आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में भारी तबाही की आशंका पैदा कर दी है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार यह मौसमी तंत्र लगातार तीव्र हो रहा है और तट रेखा की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है। तटीय क्षेत्रों में इसके प्रभाव से तेज गति की हवाओं के साथ अत्यधिक भारी बारिश का गंभीर खतरा बना हुआ है।
तट के करीब पहुंचा चक्रवात और मौजूदा स्थिति
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार सोमवार सुबह साढ़े आठ बजे के अवलोकन में यह तूफान पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में 14.1 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 81.4 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास सक्रिय था। बीते छह घंटों के दौरान यह प्रणाली 22 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम-उत्तरपश्चिम दिशा की तरफ आगे बढ़ी है। तट रेखा से नजदीकी की बात करें तो तूफान का मुख्य केंद्र आंध्र प्रदेश के नेल्लोर से करीब 160 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित दर्ज किया गया। इसके अलावा यह कवाली से लगभग 180 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, ओंगोल से 210 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व तथा मछलीपट्टनम से 240 किलोमीटर दक्षिण दिशा में मौजूद था। पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से इसकी दूरी तकरीबन 180 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में आंकी गई।
लैंडफॉल का समय और तूफानी हवाओं का पूर्वानुमान
मौसम विभाग का अनुमान है कि यह मौसमी विक्षोभ अपनी मौजूदा दिशा में बढ़ते हुए दक्षिण आंध्र प्रदेश की सीमा को एक गंभीर चक्रवाती तूफान के रूप में पार करेगा। जमीन से टकराने की यह प्रक्रिया सोमवार रात 11:30 बजे से लेकर मंगलवार तड़के 4:00 बजे के बीच होने की संभावना जताई गई है। इसके नेल्लोर और नरसापुर के मध्यवर्ती क्षेत्र में, ओंगोल के दक्षिणी हिस्से के आसपास तट को पार करने का आकलन किया गया है। लैंडफॉल के दौरान तटीय हिस्सों में 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की निरंतर रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अंदेशा है, जबकि तूफानी झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे के स्तर को छू सकती है।
तटीय इलाकों में भारी बारिश और पिछले चक्रवात का असर
तट पार करते वक्त भीषण हवाओं के साथ-साथ अत्यंत भारी वर्षा की चेतावनी दी गई है, जिससे निचले इलाकों में गंभीर जलभराव और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में चक्रवाती तूफान अर्नब ने आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में व्यापक स्तर पर तबाही मचाई थी, जिसका प्रतिकूल प्रभाव बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के मौसम पर भी देखा गया था। उस आपदा के तुरंत बाद मुरासु के रूप में एक और चक्रवात का सक्रिय होना तटीय आबादी और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
















