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उत्तराखंड चुनाव से पहले कांग्रेस सख्त, केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दी व्यक्तिगत प्रचार से बचने की दो टूक नसीहतउत्तराखंड
5 अक्तू॰ 2026, 9:33 pm (32 दिन पहले)· 1

उत्तराखंड चुनाव से पहले कांग्रेस सख्त, केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दी व्यक्तिगत प्रचार से बचने की दो टूक नसीहत

कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के साथ बैठक कर स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में निजी प्रचार अभियान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और चुनाव सिर्फ सामूहिक रणनीति से लड़ा जाएगा।

चुनावी राज्य उत्तराखंड में जीत दर्ज करने की कवायद में जुटी कांग्रेस ने अपनी अंदरूनी संगठनात्मक गतिविधियों पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पार्टी नेता हरीश रावत के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में राज्य के भीतर चल रहे प्रचार अभियानों, जमीनी तैयारियों और संगठनात्मक ढांचे की विस्तृत समीक्षा की गई। आलाकमान ने साफ संकेत दिया है कि आगामी चुनावों को देखते हुए अनुशासनहीनता या अलग राह पकड़ने की किसी भी कोशिश को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अलग राह पकड़ने और व्यक्तिगत प्रचार पर आलाकमान की दो टूक चेतावनी

हरीश रावत के साथ इस महत्वपूर्ण मंथन के तुरंत बाद केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया पर पार्टी का रुख पूरी तरह साफ कर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन में किसी भी स्तर पर गुटबाजी या नेताओं द्वारा अपनी अलग दिशा तय करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि नेताओं द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर चलाए जा रहे प्रचार अभियानों को पार्टी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी। चुनावी दंगल में केवल उन्हीं कार्यक्रमों को अनुमति मिलेगी, जिन्हें पार्टी संगठन की आधिकारिक रूपरेखा के तहत सामूहिक निर्णय लेकर तय किया गया हो।

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मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की अगुवाई में साझा चुनावी मैदान

केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट निर्देश दिया कि उत्तराखंड के चुनावी समर में सभी कार्यक्रमों को राज्य के तमाम वरिष्ठ नेताओं की आपसी सहमति और भागीदारी से संचालित किया जाएगा। यह पूरा अभियान पार्टी के झंडे तले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के केंद्रीय नेतृत्व में आगे बढ़ेगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस नाजुक मोड़ पर पार्टी के प्रत्येक सदस्य का एकमात्र और अविभाजित लक्ष्य उत्तराखंड में कांग्रेस की स्पष्ट जीत सुनिश्चित करना होना चाहिए।

कार्यकर्ताओं की एकजुटता और गुटबाजी पर नकेल कसने की कवायद

धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा जैसी व्यक्तिगत गतिविधियों के बीच हुई इस बैठक के बाद नेतृत्व ने यह भरोसा जताया कि सभी नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं की सम्मिलित ऊर्जा और अथक परिश्रम से कांग्रेस चुनावी मुकाबले में विजयी होकर निकलेगी। चुनाव से ठीक पहले आलाकमान की ओर से उठाया गया यह सख्त कदम पार्टी के भीतर पनपने वाली गुटबाजी पर पूर्ण अंकुश लगाने और सभी गुटों को एकजुट होकर एक मंच पर लाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

सवाल-जवाब

केसी वेणुगोपाल और हरीश रावत के बीच किस मुद्दे पर बैठक हुई?
इस बैठक में उत्तराखंड के आगामी चुनाव, जमीनी रणनीति, संगठनात्मक तैयारियों और प्रचार अभियानों के संचालन पर चर्चा की गई।
कांग्रेस आलाकमान ने नेताओं के व्यक्तिगत प्रचार अभियानों पर क्या फैसला सुनाया है?
केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट किया कि पार्टी में नेताओं के व्यक्तिगत प्रचार अभियान सहन नहीं किए जाएंगे और सिर्फ संगठन द्वारा तय कार्यक्रम ही होंगे।
उत्तराखंड में कांग्रेस का चुनावी अभियान किन नेताओं के नेतृत्व में चलेगा?
यह अभियान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सभी वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर चलेगा।
हरीश रावत हाल ही में किस व्यक्तिगत कार्यक्रम को लेकर चर्चा में थे?
हरीश रावत उत्तराखंड में धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा के माध्यम से जनता से संपर्क साध रहे थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·31 दिन पहले

चुनाव से ठीक पहले घर के अंदर ऐसी कलह सुलझानी ही पड़ती है। ऊर्जा बाज़ार हो या राजनीतिक मैदान, बिखराव से हमेशा नुकसान ही होता है जब तक सब मिलकर एक साथ ना चलें।

Arjun Mehta@arjun-mehta·31 दिन पहले

हरीश रावत जैसे सीनियर नेता पर लगाम कसना साफ दिखाता है कि पार्टी इस बार चुनाव में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती। उत्तराखंड में गुटबाजी की वजह से पहले भी नुकसान हुआ है, इसलिए आलाकमान ने शुरुआत में ही कड़े तेवर दिखा दिए हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·31 दिन पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछली बार जब मैं दून गया था, तो वहां कार्यकर्ताओं में यही नाराजगी थी कि हर नेता अपनी अलग ढपली बजा रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·31 दिन पहले

हरीश रावत जी की व्यक्तिगत यात्राओं पर रोक का यह फैसला थोड़ा चौकाने वाला है, क्योंकि चुनाव के वक्त हर नेता अपनी ताकत दिखाना चाहता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·31 दिन पहले

रोहन भाई, चुनाव के समय अकेले दौड़ने की आदत नेताओं की पुरानी होती है। जब मैं एक बार देहरादून में रावत जी के कार्यक्रम में गया था, तब भी कार्यकर्ताओं में ऐसी ही खींचतान साफ दिख रही थी।

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