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उत्तराखंड के नैनीताल में डिजिटल कृषि पंजीकरण शुरू, न्याय पंचायत स्तर पर लगेंगे विशेष कैंपउत्तराखंड
4 नव॰ 2026, 12:52 pm (2 दिन पहले)· 0

उत्तराखंड के नैनीताल में डिजिटल कृषि पंजीकरण शुरू, न्याय पंचायत स्तर पर लगेंगे विशेष कैंप

नैनीताल जिले में एग्रीस्टैक पहल के तहत किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान शुरू किया गया है।

उत्तराखंड के पर्वतीय जिले नैनीताल में काश्तकारों को केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने के लिए एक व्यापक डिजिटल पहल शुरू की गई है। केंद्र सरकार के एग्रीस्टैक कार्यक्रम के तहत जिलेभर के किसानों की विशिष्ट फार्मर आईडी तैयार की जा रही है। इस पूरी कवायद का मुख्य मकसद किसानों की कृषि योग्य भूमि, फसल विवरण और उनकी व्यक्तिगत पहचान को एक साझा डिजिटल मंच पर व्यवस्थित करना है। इस व्यवस्था के लागू होने से भविष्य में सरकारी योजनाओं की सब्सिडी, राहत राशि और अन्य सुविधाओं का वितरण पूरी तरह पारदर्शी और परेशानी मुक्त हो जाएगा।

पंचायत स्तर पर तैयार किया गया विस्तृत रोस्टर

जिले के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के किसानों को पंजीकरण कराने के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए प्रशासन ने न्याय पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित करने की रूपरेखा तैयार की है। कृषि विभाग, उद्यान विभाग और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीमें इन शिविरों में मौजूद रहेंगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय कॉमन सर्विस सेंटरों को भी इस प्रक्रिया से जोड़ा गया है ताकि किसान अपनी सुविधानुसार भी पंजीकरण करा सकें। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाने के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना और तिथिवार रोस्टर जारी किया है।

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काश्तकारों को यह परामर्श दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में आयोजित होने वाले शिविर की पूर्व जानकारी स्थानीय ग्राम पंचायत, कृषि कार्यालय या तहसील स्तर के अधिकारियों से अवश्य प्राप्त कर लें। इससे शिविर स्थल पर अनावश्यक भीड़ से बचा जा सकेगा और दस्तावेज सत्यापन का कार्य सुचारू रूप से पूरा होगा।

पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज और सत्यापन प्रक्रिया

फार्मर रजिस्ट्री के तहत प्रत्येक किसान का व्यक्तिगत ब्योरा और उसकी जमीन के कागजात ऑनलाइन दर्ज किए जाएंगे। इस कार्य के लिए दो प्रमुख दस्तावेजों का होना अनिवार्य किया गया है। किसान को अपना आधार कार्ड और भूमि स्वामित्व से संबंधित खतौनी या भू-अभिलेख साथ लाने होंगे। शिविर में तैनात अधिकृत कर्मचारी इन दस्तावेजों का मिलान कर किसान का डिजिटल प्रोफाइल तैयार करेंगे। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी पात्र काश्तकार का नाम इस सूची में शामिल होने से न छूटे।

विभिन्न योजनाओं के सत्यापन में मिलेगी सीधी मदद

फार्मर आईडी बन जाने के बाद सरकारी तंत्र में किसानों की पात्रता जांचने की पुरानी और जटिल प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी। नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने इस संबंध में स्पष्ट किया है कि यह डिजिटल रिकॉर्ड कई महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में आधार बनेगा। प्राकृतिक आपदा के समय मिलने वाली मुआवजा राशि, रासायनिक खाद और बीज पर मिलने वाली सहायता, किसान पेंशन और अन्य कृषि संवर्धन योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान इसी डेटाबेस के जरिए की जा सकेगी।

प्रशासन ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि फार्मर आईडी होना केवल एक डिजिटल पहचान पत्र है। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि आईडी बनते ही किसान को हर योजना का आर्थिक लाभ स्वतः मिलना शुरू हो जाएगा। प्रत्येक योजना के अपने विशिष्ट नियम, पात्रता मानदंड और शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी। आईडी बन जाने से सिर्फ सत्यापन और आवेदन की प्रक्रिया तेज होगी।

प्रशासन की किसानों से सक्रिय सहयोग की अपील

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जिले के सभी कृषकों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लें और प्रशासन को सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं। गलत या अधूरी जानकारी देने से डिजिटल प्रोफाइल में विसंगतियां आ सकती हैं, जिसका असर भविष्य में मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ सकता है। प्रशासन का अंतिम लक्ष्य नैनीताल के प्रत्येक वास्तविक किसान को इस आधुनिक डिजिटल ढांचे के दायरे में लाना है ताकि सरकारी सहायता सीधे हकदार तक पहुंच सके।

सवाल-जवाब

नैनीताल में फार्मर आईडी किस सरकारी पहल के तहत बनाई जा रही है?
यह आईडी केंद्र सरकार की डिजिटल कृषि पहल एग्रीस्टैक के तहत तैयार की जा रही है।
पंजीकरण कराने के लिए किसान को कौन से दस्तावेज साथ ले जाने होंगे?
किसान को अपनी पहचान के लिए आधार कार्ड और भूमि से संबंधित राजस्व अभिलेख उपलब्ध कराने होंगे।
किसानों की सुविधा के लिए शिविर कहां और किस स्तर पर आयोजित किए जा रहे हैं?
काश्तकारों की सुविधा के लिए न्याय पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है।
शिविरों के अलावा क्या किसी अन्य केंद्र पर पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है?
हां, किसान कॉमन सर्विस सेंटर पर जाकर भी अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
क्या फार्मर आईडी बनते ही सभी सरकारी योजनाओं का लाभ अपने आप मिलने लगेगा?
नहीं, फार्मर आईडी केवल सत्यापन का साधन है; प्रत्येक योजना के लिए तय अलग-अलग पात्रता नियमों को पूरा करना अनिवार्य होगा।
इस डिजिटल रजिस्ट्री से किन प्रमुख योजनाओं में सत्यापन आसान होगा?
इससे किसान पेंशन, खाद और उर्वरक सहायता, आपदा राहत और अन्य कृषि योजनाओं में सत्यापन प्रक्रिया आसान होगी।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

गांव-गांव कैंप लगने से कम से कम चक्कर तो नहीं काटने पड़ेंगे। कई बार दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते ही असली काम छूट जाता है, उम्मीद है अब सब्सिडी और राहत का पैसा सीधे सही समय पर पहुंचेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। पिछली बार जब पिताजी को सब्सिडी के लिए चक्कर काटने पड़े थे, तो पूरा हफ्ता बर्बाद हो गया था, उम्मीद है अब हालात सुधरेंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

अब किसानों को दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, न्याय पंचायत स्तर पर कैंप लगना राहत की बात है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

रोहन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले साल जब मैं रामनगर गया था, तो एक बुजुर्ग किसान को छोटे से काम के लिए तहसील के चक्कर काटते देखा था, बहुत बुरा लगा था।

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