असम के डिब्रूगढ़ में ऑयल इंडिया के टैंक फार्म में लगी भीषण आग, एक की मौत और छह घायलत्योहारी खरीदारी में मिला है खराब सामान, तो इस तरह आसानी से वापस मिल जाएंगे आपके पैसेजमशेदपुर के जलेबी लाइन बाजार में सजी मिठाइयों की महफिल, दिवाली पर बारह तरह के लड्डू और नमकीन की भारी मांगऑनलाइन शॉपिंग और महंगाई की मार, नैनीताल में इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार 30 प्रतिशत तक गिराज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के सभी चुनावी नतीजों की हो व्यापक समीक्षा, जयपुर में सचिन पायलट की बड़ी मांगझारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, JSSC CGL के दो हजार सफल अभ्यर्थियों को राहत और परीक्षा रद्द करने का आदेश खारिजजैसलमेर के रामदेवरा में दीपावली पर अनूठी सजावट, 500 किलो फूलों से महका बाबा रामदेव का दरबारहिमाचल के सम्मू गांव में दिवाली पर क्यों पसरा रहता है सन्नाटा, जानिए सात पीढ़ियों से चली आ रही अनूठी परंपरासुप्रीम कोर्ट में हिमाचल प्रदेश की बड़ी जीत, बीबीएमबी विवाद सुलझा, सालाना 1000 करोड़ तक का होगा फायदासिरमौर के सराहां में धनतेरस पर दर्दनाक हादसा, खाई में बोलेरो गिरने से बड़े भाई की मौत और नौ घायल
उत्तराखंड के नैनीताल में ड्राई आई और पिंक आई का प्रकोप, बीडी पांडे जिला अस्पताल में उमड़ रहे मरीजउत्तराखंड
18 अक्तू॰ 2026, 1:47 pm (19 दिन पहले)· 1

उत्तराखंड के नैनीताल में ड्राई आई और पिंक आई का प्रकोप, बीडी पांडे जिला अस्पताल में उमड़ रहे मरीज

नैनीताल में आंखों से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। बीडी पांडे जिला अस्पताल में ड्राई आई, पिंक आई और स्क्रीन टाइम से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

उत्तराखंड के नैनीताल में इन दिनों आंखों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं लोगों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बनती जा रही हैं। बीडी पांडे जिला अस्पताल में आंखों में जलन, खुजली, लालिमा, किरकिरापन और पानी आने जैसी तमाम शिकायतों के साथ मरीजों के आने का सिलसिला लगातार जारी है। अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपिका लोहनी के अनुसार, इस समय मुख्य रूप से ड्राई आई यानी आंखों में सूखापन और पिंक आई यानी आई फ्लू के मामले सामने आ रहे हैं, जिनकी चपेट में बच्चे और बड़े दोनों ही आ रहे हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों ने साफ तौर पर चेताया है कि आंखों की इन दिक्कतों को बिल्कुल भी हल्के में न लें और समय रहते डॉक्टर से मिलकर उचित इलाज करवाएं।

अस्पताल में रोजाना पहुंच रहे हैं मरीजों के आंकड़े

डॉ. दीपिका लोहनी ने जानकारी दी है कि वर्तमान में अस्पताल की ओपीडी में हर रोज ड्राई आई के लगभग 5 से 10 मरीज आ रहे हैं। इसके साथ ही, पिंक आई यानी आई फ्लू के लगभग 4 से 5 मरीज रोजाना उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। इन दो प्रमुख समस्याओं के अलावा, अत्यधिक स्क्रीन टाइम से प्रभावित होने वाले मरीजों की संख्या भी प्रतिदिन 5 से 6 के आसपास बनी हुई है। डॉक्टर का कहना है कि इन परेशानियों का बुरा असर कम उम्र के बच्चों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल स्क्रीनों के सामने लंबे वक्त तक बैठे रहने के कारण आंखों में सूखापन, तेज जलन और भारी असहजता महसूस होने लगती है। ऐसी स्थिति को देखते हुए माता-पिता और अभिभावकों का यह कर्तव्य बनता है कि वे बच्चों के स्क्रीन इस्तेमाल करने के समय पर कड़ी नजर रखें।

ये भी पढ़ें

आई फ्लू और पलकों के चिपकने के लक्षण

आम बोलचाल की भाषा में पिंक आई को आई फ्लू भी कहा जाता है, जिसमें आंखों के भीतर संक्रमण और सूजन के कारण कई तरह के कष्टदायक लक्षण प्रकट होते हैं। आंखों का लाल हो जाना, लगातार पानी बहना, चुभन महसूस होना, खुजली और किरकिरापन इसके मुख्य लक्षण माने जाते हैं। इतना ही नहीं, कुछ रोगियों को तो सुबह के वक्त नींद से जागने पर अपनी पलकें आपस में चिपकी हुई मिलती हैं। डॉ. दीपिका लोहनी ने बताया कि आई फ्लू के कई रूप संक्रामक प्रकृति के होते हैं, जो संक्रमित आंखों से निकलने वाले स्राव, गंदे हाथों या दूषित वस्तुओं के छूने से बहुत तेजी से फैलते हैं।

संक्रमण से बचाव और साफ-सफाई के उपाय

आई फ्लू के इस फैलाव को रोकने के लिए व्यक्तिगत साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। डॉक्टरों की सख्त सलाह है कि अपनी आंखों को गंदे हाथों से बार-बार न छुएं और समय-समय पर अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह साफ करते रहें। इसके अलावा, इस्तेमाल करने के लिए अपनी तौलिया, रुमाल या आंखों के संपर्क में आने वाली अन्य निजी वस्तुएं किसी दूसरे व्यक्ति के साथ बिल्कुल साझा न करें। यदि किसी की आंखें लाल हो रही हैं या उनमें से किसी प्रकार का स्राव निकल रहा है, तो बिना किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह के खुद से कोई भी दवा या आई ड्रॉप आंखों में न डालें।

ड्राई आई की समस्या और उसकी असली वजह

डॉक्टर दीपिका लोहनी ने समझाया कि ड्राई आई यानी आंखों में सूखापन होने पर वह प्राकृतिक टियर फिल्म गड़बड़ा जाती है, जो असल में आंखों की बाहरी सतह को हर वक्त नम बनाए रखती है। इस परत की मात्रा या गुणवत्ता प्रभावित होने पर आंखों में सूखापन, जलन, चुभन और ऐसा अहसास होता है जैसे आंख के भीतर कोई बाहरी कण गिरा हो। सबसे हैरानी की बात यह है कि आंखों में सूखापन होने के बावजूद कई लोगों की आंखों से अनायास ही पानी भी बहने लगता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक लगातार स्क्रीन देखने की आदत भी इस परेशानी को और अधिक गंभीर बना देती है। डिजिटल स्क्रीन पर टकटकी लगाकर देखने के दौरान लोग सामान्य स्थिति की तुलना में बहुत कम बार अपनी पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों की प्राकृतिक नमी खत्म होने लगती है और भयंकर जलन व थकान महसूस होने लगती है।

स्क्रीन का इस्तेमाल करते वक्त अपनाए जाने वाले जरूरी सुझाव

चिकित्सकों का सुझाव है कि स्क्रीन का उपयोग करते समय बीच-बीच में थोड़ा विश्राम लेना और अपनी पलकों को नियमित रूप से झपकाना आंखों की तकलीफों को काफी हद तक कम कर सकता है। इसके लिए एक बेहद कारगर तरीका 20-20-20 नियम है, जिसे आसानी से अपनाया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि हर 20 मिनट तक लगातार स्क्रीन देखने के पश्चात लगभग 20 सेकंड का ब्रेक लें और अपनी आंखों को कम से कम 20 फीट की दूरी पर रखी किसी अन्य वस्तु पर टिकाएं। हालांकि यह नियम आंखों के अत्यधिक तनाव को दूर करने में बहुत मददगार साबित होता है, लेकिन यह हर प्रकार की आंख की बीमारी से सुरक्षा की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं देता है। इसके अलावा, गैजेट्स की स्क्रीन को अपनी आंखों से एक उचित दूरी पर रखें, पढ़ाई या काम करते समय कमरे में पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करें और यदि आंखों में लगातार सूखापन या जलन बनी रहे तो बिना देर किए किसी योग्य नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास जाएं। बच्चों को भी मोबाइल और कंप्यूटर के लंबे सत्रों से बचाते हुए नियमित अंतराल पर छोटे ब्रेक देना बेहद आवश्यक है।

सवाल-जवाब

नैनीताल के किस अस्पताल में आंखों के मरीज पहुंच रहे हैं?
मरीज बीडी पांडे जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
अस्पताल में कौन सी प्रमुख आंखों की समस्याएं देखी जा रही हैं?
अस्पताल में मुख्य रूप से ड्राई आई और पिंक आई यानी आई फ्लू के मरीज आ रहे हैं।
ड्राई आई के प्रतिदिन कितने मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं?
प्रतिदिन ड्राई आई के लगभग 5 से 10 मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं।
आई फ्लू के कितने मरीज रोजाना उपचार के लिए आ रहे हैं?
पिंक आई या आई फ्लू के लगभग 4 से 5 मरीज रोजाना उपचार के लिए आ रहे हैं।
स्क्रीन टाइम से जुड़ी समस्याओं के कितने मरीज रोजाना आ रहे हैं?
स्क्रीन टाइम से जुड़ी आंखों की परेशानी के करीब 5 से 6 मरीज रोजाना अस्पताल पहुंच रहे हैं।
आंखों की समस्याओं के संबंध में डॉक्टर ने क्या नियम सुझाया है?
डॉक्टर ने 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी है, जिसमें हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखना शामिल है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·18 दिन पहले

बढ़ते स्क्रीन टाइम और आई फ्लू ने इन दिनों सबको परेशान कर दिया है। क्या इस बदलते मौसम और संक्रमण का कोई ज्योतिषीय या ग्रहीय संबंध भी होता है?

Ravikash Gupta@ravikash·19 दिन पहले

आजकल स्क्रीन पर लगातार टिके रहने का यही नतीजा है। बच्चों को मोबाइल से दूर रखना अब बहुत जरूरी हो गया है, वरना ये परेशानी और बढ़ेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 दिन पहले

रवि काश गुप्ता, बच्चों का स्क्रीन टाइम तो मान लिया, लेकिन क्या अस्पतालों में इसके इलाज के लिए डॉक्टर और दवाइयां पर्याप्त मात्रा में हैं?

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

बदलती जीवनशैली और बच्चों का लगातार स्क्रीन पर चिपके रहना वाकई खतरनाक होता जा रहा है। आजकल आंखों की ऐसी समस्याएं आम हो गई हैं, इसलिए समय पर डॉक्टर को दिखाना और साफ-सफाई रखना बहुत जरूरी है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 दिन पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। आजकल जिस तरह से बच्चे घंटों स्क्रीन के सामने बैठ रहे हैं, उससे सिर्फ नजर कमजोर नहीं हो रही बल्कि ऐसे संक्रमण भी तेजी से फैल रहे हैं।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp