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उत्तराखंड के नैनीताल में मानसून का अद्भुत नजारा, बादलों की लुकाछिपी और कोहरे से सराबोर होती है सरोवर नगरीउत्तराखंड
1 सित॰ 2026, 12:05 pm (21 दिन पहले)· 2

उत्तराखंड के नैनीताल में मानसून का अद्भुत नजारा, बादलों की लुकाछिपी और कोहरे से सराबोर होती है सरोवर नगरी

बरसात के मौसम में नैनीताल की वादियां पूरी तरह बदल जाती हैं और यहां का मौसम पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस समय यहां का प्राकृतिक सौंदर्य देखने लायक होता है।

यदि आपने फिल्मों और तस्वीरों में दर्शाया जाने वाला पारंपरिक कोहरा अभी तक नहीं देखा है, तो आप बारिश के मौसम में नैनीताल की यात्रा का प्लान बना सकते हैं। वर्षा ऋतु के आगमन के बाद पर्वतों की श्रृंखलाओं पर उतरने वाली गहरी धुंध इस सुंदर सरोवर नगरी के सौंदर्य में चार चांद लगा देती है। हर तरफ बादलों और कोहरे का आवरण, ठंडी बयार और नैनी झील के इर्द-गिर्द मंडराता कुहासा देखने वालों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यह अनोखा परिदृश्य इस हिल स्टेशन की खूबसूरती को और भी अधिक बढ़ा देता है।

पल-पल बदलता मौसम और बादलों का खेल

वर्षाकाल के दौरान नैनीताल की आबोहवा बहुत तेजी से करवट लेती है। कभी नीला आसमान बिल्कुल साफ नजर आता है तो कुछ ही पलों में गाढ़ा कोहरा पूरी पहाड़ियों को अपनी आगोश में समेट लेता है। ऊंची चोटियों से ढलानों की तरफ उतरते बादल जब नैनी झील और आसपास की संरचनाओं को आच्छादित कर लेते हैं, तो संपूर्ण नगर सफेद कोहरे की चादर ओढ़े हुए प्रतीत होता है। विशेष तौर पर सुबह और शाम के वक्त यह नज़ारा बेहद मनमोहक और अद्भुत दिखाई देता है।

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नैनी झील पर तैरते बादलों का रोमांच

मानसून के दिनों में नैनी झील के ऊपर मंडराते और पहाड़ियों के बीच आते-जाते बादलों का यह अनूठा संगम पर्यटकों को एक अलग ही स्तर का अनुभव कराता है। कई बार बादलों के बड़े टुकड़े दूर से ही तैरते हुए आगे बढ़ते हैं और देखते ही देखते पूरी झील तथा उसके आसपास के रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लेते हैं। कुछ ही पलों में ये बादल अचानक बिखर जाते हैं और नैनीताल का जीवंत तथा सुंदर स्वरूप फिर से सैलानियों के सामने प्रकट हो जाता है।

मॉल रोड पर कुहासे का अद्भुत आवरण

इस प्रसिद्ध पर्वतीय स्थल की मुख्य सड़क यानी मॉल रोड मानसून के मौसम में पूरी तरह से सफेद धुंध की परत से ढकी नजर आती है। इस सघन कोहरे के बीच नैनी झील के शांत जल में तैरती हुई सुंदर नावें और झील के तटवर्ती इलाकों के दृश्य मिलकर एक अत्यंत रमणीय वातावरण तैयार करते हैं। नैनीताल में आमतौर पर दोपहर के वक्त ऐसे विहंगम दृश्य देखने को मिल जाते हैं। यही लगातार बदलती हुई मौसमी परिस्थितियां यहां की मानसूनी सुंदरता को खास बनाती हैं।

झील में नौकायन का अनूठा आनंद

नैनी झील के जल में बोटिंग का लुत्फ उठाने वाले सैलानियों के लिए बरसात का यह समय बिल्कुल अलग और यादगार अनुभव लेकर आता है। जब संपूर्ण झील के ऊपर कोहरे की चादर तन जाती है, तो पानी के बीच आगे बढ़ती नावें दूर से बेहद आकर्षक दिखती हैं। इसके अलावा चारों तरफ फैली हुई हरी-भरी पहाड़ियों पर नजर आने वाला कुहासा इस प्राकृतिक सौंदर्य को और अधिक प्रगाढ़ कर देता है।

स्थानीय बुजुर्ग निवासियों का ऐसा मानना है कि वर्ष 1841 के बाद जब ब्रिटिश हुकूमत के लोगों ने यहां रहना शुरू किया था, तो बरसात के दिनों में पहाड़ियों पर उमड़ने वाला यह कोहरा उन्हें इंग्लैंड की याद दिलाता होगा। इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच नैनीताल के इस विशिष्ट कोहरे को ऐतिहासिक रूप से 'लंदन फॉग' और 'ब्राउन फॉग ऑफ इंग्लैंड' जैसे नामों से पुकारे जाने की परंपरा शुरू हुई।

अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान इस खूबसूरत शहर को 'छोटी बिलायत' की संज्ञा से भी नवाजा जाता था। यहां की ठंडी आबोहवा, घनघोर हरियाली, पर्वत श्रृंखलाएं और बारिश के समय छाने वाला कुहासा ब्रिटिश अधिकारियों को उनके गृहदेश की याद ताजा करा देता था। वर्षा ऋतु में पर्वतों के ऊपर उतरते बादल और झील को घेरती धुंध आज भी इस पर्यटन स्थल की पहचान का एक अनिवार्य हिस्सा बने हुए हैं। यही वजह है कि मानसून के दिनों में इस सरोवर नगरी का रूप बिल्कुल अनूठा नजर आता है।

इस पर्वतीय क्षेत्र में बरसात के दौरान मौसम बहुत तेजी से बदलता है। कुछ ही मिनटों के भीतर पहाड़ियों पर बादलों का जमावड़ा लग जाता है और फिर बारिश की फुहारों के साथ पूरा वातावरण काफी ठंडा हो जाता है। कई बार वर्षा की बूंदें दूर से तेज हवाओं के झोंकों के साथ आती हुई दिखाई देती हैं, जबकि कुछ ही वक्त के बाद मौसम दोबारा पूरी तरह साफ हो जाता है। धुंध, बारिश, ठंडी हवा और हरियाली का यह मेल नैनीताल को मानसून में घूमने के लिए बेहतरीन जगह बनाता है।

यद्यपि नैनीताल के इस प्राकृतिक कोहरे को स्थानीय स्तर पर 'लंदन फॉग' की उपाधि दी जाती है, लेकिन वास्तविक रूप से लंदन में इस शब्द का इतिहास काफी अलग और भिन्न रहा है। उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान इंग्लैंड में तीव्र औद्योगिकीकरण के दौर में घरों तथा कारखानों में कोयले और लकड़ी के अत्यधिक इस्तेमाल से भारी मात्रा में धुआं निकलता था। कोहरे और इस औद्योगिक प्रदूषण के खतरनाक मिश्रण को 'लंदन फॉग' या 'ब्राउन फॉग ऑफ इंग्लैंड' कहा जाता था। इसका मतलब यह है कि नैनीताल का यह प्राकृतिक और स्वच्छ कोहरा और ऐतिहासिक लंदन फॉग दोनों बिल्कुल एक जैसे नहीं हैं।

सवाल-जवाब

नैनीताल के कोहरे को स्थानीय रूप से क्या कहा जाता है?
नैनीताल के इस विशेष कोहरे को स्थानीय स्तर पर 'लंदन फॉग' और 'ब्राउन फॉग ऑफ इंग्लैंड' कहा जाता है।
नैनीताल में इस कोहरे का ऐतिहासिक संदर्भ किससे जुड़ा है?
वर्ष 1841 के बाद जब अंग्रेजों ने यहां रहना शुरू किया था, तो बरसात के दिनों में उठने वाला कोहरा उन्हें अपने देश की याद दिलाता था।
क्या नैनीताल का कोहरा और ऐतिहासिक लंदन फॉग एक जैसे हैं?
नहीं, ऐतिहासिक लंदन फॉग 19वीं सदी में औद्योगिकीकरण के दौरान कारخानों और घरों से निकले धुएं व प्रदूषण का मिश्रण था, जबकि नैनीताल का कोहरा पूरी तरह प्राकृतिक है।
मानसून के दौरान नैनीताल में मौसम कैसा रहता है?
मानसून में नैनीताल का मौसम पल-पल बदलता है, जहां कुछ ही मिनटों में साफ आसमान को घना कोहरा और बारिश घेर लेती है।
इस मौसम का नैनी झील पर क्या असर पड़ता है?
बरसात और धुंध के समय नैनी झील के ऊपर तैरते बादल और पानी में चलती नावें एक बेहद खूबसूरत और मनमोहक दृश्य बनाती हैं।
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