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उत्तराखंड के रामनगर में वन भूमि पर बड़ा बुलडोजर एक्शन, 82 मकानों को ढहाने की कार्रवाई के दौरान महिला को पड़ा दिल का दौराउत्तराखंड
31 अक्तू॰ 2026, 1:23 pm (6 दिन पहले)· 0

उत्तराखंड के रामनगर में वन भूमि पर बड़ा बुलडोजर एक्शन, 82 मकानों को ढहाने की कार्रवाई के दौरान महिला को पड़ा दिल का दौरा

रामनगर के पूछड़ी क्षेत्र में वन विभाग और प्रशासन ने 82 निर्माणों को गिराने के लिए व्यापक अभियान शुरू किया, जिसके दौरान आशियाना छिनने के तनाव में 45 वर्षीय महिला अस्पताल में भर्ती कराई गई।

उत्तराखंड के रामनगर स्थित अपर कोसी क्षेत्र में वन भूमि को खाली कराने के लिए शनिवार सुबह प्रशासन और वन विभाग ने व्यापक स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया। इस कार्रवाई के केंद्र में ग्राम पूछड़ी के लगभग 82 चिह्नित मकान शामिल हैं। अपने घरों को ढहाए जाने की इस अचानक हुई प्रक्रिया के बीच मौके पर भारी अफरातफरी मच गई। इसी तनावपूर्ण माहौल में अपना आशियाना छिनने की चिंता के कारण 45 वर्षीय महिला फातमा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद गंभीर हालत में तुरंत रामदत्त संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।

चिंता और सामान समेटने के बीच बिगड़ी महिला की तबीयत

फातमा के बेटे शादाब ने बताया कि ध्वस्तीकरण की आशंका के चलते उनका परिवार बीती रात से ही अपने आशियाने से जरूरी घरेलू सामान सुरक्षित बाहर निकालने में जुटा हुआ था। पूरी रात जागने और सुबह शुरू हुई व्यापक प्रशासनिक कार्रवाई के तनाव के बीच फातमा को कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ गया। स्थानीय स्तर पर महिलाओं और छोटे बच्चों के सामने अचानक सिर छिपाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। प्रभावित परिवारों में अपनी छत खोने को लेकर रोना-पीटना और गहरा असंतोष देखा गया।

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दूसरे चरण का अभियान और अदालती मामलों पर स्थिति

वन भूमि पर बने अवैध ढांचों को हटाने के लिए यह अभियान कई चरणों में तैयार किया गया है। इससे पहले वर्ष 2025 में प्रथम चरण के तहत करीब 51 परिवारों के निर्माणों को इस क्षेत्र से हटाया गया था। अब मौजूदा दूसरे चरण में 82 मकानों को ध्वस्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जिन परिवारों के कानूनी विवाद वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं, उन्हें फौरी तौर पर इस ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया से अलग रखा गया है और उन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

तीन किलोमीटर के दायरे में पाबंदी और सुरक्षा बंदोबस्त

पूछड़ी गांव में अतिक्रमण रोधी अभियान को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कड़े सुरक्षा घेरे तैयार किए हैं। किसी भी अप्रिय स्थिति, कानून व्यवस्था की समस्या या विरोध प्रदर्शन को रोकने के मकसद से कार्रवाई स्थल के आसपास करीब तीन किलोमीटर के दायरे में आम नागरिकों और वाहनों की आवाजाही पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल को अलर्ट मोड पर तैनात किया गया है और संबंधित विभागों की तकनीकी टीमें संयुक्त रूप से निगरानी रख रही हैं।

दर्जनों भारी मशीनों के साथ सुबह से जारी ध्वस्तीकरण

प्रशासन ने शनिवार सुबह करीब पांच बजे से ही अभियान को प्रभावी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर भारी मशीनों का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। इलाके में संरचनाओं को गिराने के लिए 30 से अधिक जेसीबी और कई पोकलैंड मशीनों को उतारा गया है। अधिकारियों की सीधी देखरेख में चिह्नित 82 अतिक्रमणों को हटाने की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है, जबकि प्रतिबंधित परिधि के भीतर अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को रोकने के लिए निगरानी तंत्र सख्त रखा गया है।

सवाल-जवाब

रामनगर में प्रशासन ने कितने मकानों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की है?
प्रशासन और वन विभाग ने ग्राम पूछड़ी में चिह्नित लगभग 82 मकानों को हटाने के लिए अभियान चलाया है।
कार्रवाई के दौरान 45 वर्षीय महिला फातमा की तबीयत क्यों बिगड़ी?
घर खाली कराने और आशियाना छिनने की मानसिक चिंता के चलते उन्हें कथित तौर पर दिल का दौरा पड़ गया, जिसके बाद उन्हें रामदत्त संयुक्त चिकित्सालय में भर्ती कराया गया।
क्या इस इलाके में पहले भी ऐसा अभियान चलाया जा चुका है?
हां, वर्ष 2025 में प्रथम चरण के दौरान इसी क्षेत्र से लगभग 51 परिवारों के अवैध निर्माण हटाए गए थे।
क्या सभी चिह्नित मकानों को तुरंत तोड़ा जा रहा है?
नहीं, जिन परिवारों के मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, उन्हें फिलहाल इस ध्वस्तीकरण कार्रवाई से अलग रखा गया है।
मौके पर सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या प्रबंध किए गए हैं?
प्रशासन ने लगभग तीन किलोमीटर के दायरे में लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी है और 30 से अधिक जेसीबी एवं कई पोकलैंड मशीनों के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·5 दिन पहले

अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अपनी जगह है, लेकिन एक परिवार की पूरी जिंदगी और आशियाना उजड़ने पर किसी महिला को दिल का दौरा पड़ जाना बेहद झकझोर देने वाला है। क्या प्रशासन के पास ऐसी कार्रवाई से पहले इन परिवारों के पुनर्वास के लिए कोई ठोस योजना नहीं थी?

Ravikash Gupta@ravikash·5 दिन पहले

जब रामनगर के उस इलाके में बुलडोजर चला, तो मुझे अपने बचपन के वे दिन याद आ गए जब ऐसा ही नोटिस देखकर मेरे एक पड़ोसी ने अपना घर खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया था। उस बुजुर्ग महिला को दिल का दौरा पड़ना कोई अचरज की बात नहीं है, क्योंकि सिर से छत छिन जाने का डर इंसान को अंदर से तोड़ देता है। प्रशासन को कम से कम कुछ दिन का वक्त तो देना ही चाहिए था।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 दिन पहले

रविकेश जी, सही कहा आपने। अदालतों में मामले लंबित होने पर राहत मिल जाती है, पर बाकी परिवारों को अचानक बेघर करना और नोटिस का समय न देना सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 दिन पहले

अतिक्रमण हटाने की यह तस्वीर दिल दहला देती है। पूछड़ी में जब वो भारी मशीनें चल रही थीं, तब फातमा जी को दिल का दौरा पड़ना दिखाता है कि बेघर होने का डर क्या होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·5 दिन पहले

करन भाई, फातमा जी के बेटे शादाब ने सही कहा कि पूरा परिवार रातभर जागकर सामान बाहर निकाल रहा था। यही थकान और डर जानलेवा बन गया।

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