केंद्रीय जांच ब्यूरो की मुंबई स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने कर वसूली के नाम पर घूसखोरी में लिप्त एक बड़े नेटवर्क के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने उत्तराखंड के ऋषिकेश में ठिकाना बनाकर छिपे बैठे केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर के अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती को धर दबोचा। वर्ष 2009 बैच का यह भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी अदालत द्वारा हिरासत मंजूर किए जाने के बाद से लगातार फरार चल रहा था। इस पूरे प्रकरण में एक व्यावसायिक फर्म से जुड़े मामले को दबाने के एवज में डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई थी, जिसे बाद में 40 लाख रुपये पर तय किया गया। मुख्य आरोपी अधिकारी की इस गिरफ्तारी के बाद संबंधित महकमे में व्यापक हड़कंप मच गया है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज हुआ था मुकदमा
इस कानूनी कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब रायगढ़ स्थित सीजीएसटी खांडेश्वर के अधीक्षक और अतिरिक्त आयुक्त के आचरण के खिलाफ सीबीआई को एक औपचारिक शिकायत प्राप्त हुई। प्रारंभिक तथ्यों की पुष्टि होने पर जांच एजेंसी ने 26 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार का नियमित मामला दर्ज किया। एक फर्म से जुड़े लंबित मामले को रफा-दफा करने के उद्देश्य से अधिकारियों की ओर से भारी-भरकम राशि की अनुचित मांग रखी गई थी। एजेंसी ने शिकायतकर्ता के सहयोग से योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर बिचौलिए को रंगे हाथों पकड़ने की रणनीति तैयार की।
रंगे हाथों 40 लाख रुपये बरामदगी के साथ जालसाजी का भंडाफोड़
सीबीआई के दल ने पुख्ता खुफिया इनपुट के आधार पर 27 अगस्त 2026 को एक ट्रैप का आयोजन किया। इस योजनाबद्ध कार्रवाई के दौरान कस्टम्स हाउस एजेंट नरिंदर राजपूत को 40 लाख रुपये की नकद रकम प्राप्त करते समय रंगे हाथों दबोच लिया गया। पूछताछ और मौके पर मिले साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि उक्त घूस की रकम सीजीएसटी अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा तथा अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती के लिए ही वसूली जा रही थी। इसके तुरंत बाद जांच एजेंसी ने त्वरित कदम उठाते हुए अधीक्षक और प्राइवेट एजेंट सहित तीनों आरोपियों को अपनी गिरफ्त में ले लिया था।
ठाणे की विशेष अदालत से लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट तक की कानूनी जंग
गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी करने के पश्चात सीबीआई ने सभी आरोपियों को ठाणे स्थित विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। जांच एजेंसी ने पूछताछ के जरिए पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने के लिए पांच दिन की पुलिस कस्टडी की मांग की थी। हालांकि विशेष अदालत ने 28 अगस्त 2026 को पुलिस रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने गिरफ्तारी को अवैध करार देते हुए सभी आरोपियों को जमानत पर रिहा करने का फैसला सुना दिया।
निचली अदालत के इस निर्णय के खिलाफ सीबीआई ने बिना विलंब किए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और एक रिवीजन पिटीशन दाखिल की। उच्च न्यायालय ने मामले के तथ्यों और एजेंसी की दलीलों पर विचार करते हुए 16 सितंबर 2026 को निचली अदालत का आदेश पलट दिया। हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपियों को दो दिन की सीबीआई कस्टडी में भेजने का स्पष्ट निर्देश जारी किया।
अदालत के आदेश की अवहेलना और ऋषिकेश से गिरफ्तारी
बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए जांच एजेंसी ने अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा और बिचौलिए नरिंदर राजपूत को तत्काल हिरासत में लेकर सघन पूछताछ की। हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद अदालत ने इन दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। दूसरी तरफ अतिरिक्त आयुक्त विनय कुमार कांठेती अदालत के आदेश की सीधी अवहेलना करते हुए अचानक भूमिगत हो गया।
मुंबई सीबीआई की टीम ने फरार अधिकारी का सुराग लगाने के लिए तकनीकी निगरानी का सहारा लिया और गुप्त सूचनाएं एकत्रित कीं। इन प्रयासों के जरिए एजेंसी को पता चला कि आरोपी अधिकारी उत्तराखंड के ऋषिकेश में छिपा हुआ है। इसके बाद जांच दल ने वहां छापेमारी कर उसे सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया।


















