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रेस कोर्स मस्जिद की बिजली-पानी काटने पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, एनडीएमसी और वक्फ बोर्ड को नोटिसदिल्ली
7 नव॰ 2026, 12:13 am (3 घंटे पहले)· 0

रेस कोर्स मस्जिद की बिजली-पानी काटने पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, एनडीएमसी और वक्फ बोर्ड को नोटिस

दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स क्लब परिसर स्थित मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई बिना नोटिस काटे जाने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद और दिल्ली वक्फ बोर्ड से दो हफ्ते में जवाब तलब किया है।

दिल्ली के रेस कोर्स क्लब परिसर में बनी मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति अचानक काटे जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा कि किसी भी संपत्ति की बिजली और पानी का कनेक्शन बिना किसी पूर्व नोटिस के काटा नहीं जा सकता है। इस सिलसिले में हाईकोर्ट ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी एनडीएमसी और दिल्ली वक्फ बोर्ड को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। दोनों पक्षों से आगामी दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है, जबकि इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को तय की गई है।

बिना नोटिस कार्रवाई पर अदालत का सवाल

न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणी जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने दी, जो मस्जिद के बिजली और पानी की बहाली की मांग से जुड़ी याचिका पर विचार कर रही थी। मस्जिद के इमाम की तरफ से दायर इस याचिका में सिंगल जज की उस बेंच के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें बिजली और पानी के कनेक्शन को बहाल करने की मांग ठुकरा दी गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान एनडीएमसी से कड़ा सवाल किया कि आखिर बिना कोई नोटिस जारी किए इस तरह से बिजली कैसे काटी जा सकती है।

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प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित है मस्जिद

यह विवादित मस्जिद राजधानी दिल्ली के रेस कोर्स क्लब परिसर के भीतर स्थित है। यह पूरा परिसर देश के प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब है और लगभग 53 एकड़ के विशाल भूभाग में फैला हुआ है। याचिका में इस बात की आशंका जताई गई है कि जमीन खाली कराने की चल रही प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान इस मस्जिद को भी ढहाया जा सकता है। याचिका के दस्तावेजों के अनुसार, यह मस्जिद दिल्ली वक्फ बोर्ड के तहत एक अधिसूचित संपत्ति है। इसके अलावा साल 2009 में इस धार्मिक स्थल को ग्रेड-2 हेरिटेज इमारत का दर्जा भी दिया जा चुका है।

केंद्र सरकार का पुराना आश्वासन और आगामी सुनवाई

अदालत के समक्ष मस्जिद की बिजली-पानी काटने और जमीन खाली कराने से जुड़े कई कानूनी पहलू विचाराधीन हैं। इससे पहले इसी साल 29 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया था कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर चार सप्ताह के भीतर उचित फैसला लिया जाएगा। सरकार की तरफ से यह भी भरोसा दिलाया गया था कि तब तक इस मस्जिद के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी। अब दो सप्ताह बाद आने वाले जवाबों के बाद 14 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई में इस मामले पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

सवाल-जवाब

दिल्ली हाईकोर्ट ने किस मामले में सुनवाई की है?
दिल्ली हाईकोर्ट ने रेस कोर्स क्लब परिसर में स्थित मस्जिद की बिजली और पानी की सप्लाई बिना नोटिस काटे जाने के मामले पर सुनवाई की।
अदालत ने किन-किन संस्थाओं को नोटिस जारी किया है?
हाईकोर्ट ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी एनडीएमसी और दिल्ली वक्फ बोर्ड को नोटिस जारी किया है।
जवाब दाखिल करने के लिए कितना समय दिया गया है?
अदालत ने दोनों पक्षों से दो हफ्ते के भीतर अपना जवाब देने को कहा है।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को तय की गई है।
यह मस्जिद कहां स्थित है?
यह मस्जिद दिल्ली के रेस कोर्स क्लब परिसर में प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित है।
मस्जिद को हेरिटेज दर्जा कब मिला था?
साल 2009 में इस मस्जिद को ग्रेड-2 हेरिटेज इमारत घोषित किया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Priya Sharma@priya-sharma·1 घंटे पहले

बिना नोटिस के बिजली-पानी काटना बिल्कुल गलत है। कोर्ट का रुख सही है कि नियमों के हिसाब से ही कार्रवाई होनी चाहिए, मनमानी नहीं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 घंटे पहले

बिना नोटिस के बिजली-पानी काटना तो सरासर मनमानी है। पिछली बार जब मैं उस इलाके के पास से गुजर रहा था, तो सोचा भी नहीं था कि यहाँ ऐसे मामलों पर भी कोर्ट तक बात पहुँच जाएगी। उम्मीद है 14 दिसंबर को कुछ साफ हो।

Tanvi Desai@tanvi-desai·2 घंटे पहले

अर्जुन, तुम्हारी बात बिल्कुल सही है। पर क्या तुम्हें लगता है कि 14 दिसंबर की सुनवाई के बाद भी बिजली-पानी का कनेक्शन इतनी आसानी से वापस मिल पाएगा?

Rohan Verma@rohan-verma·2 घंटे पहले

बिना नोटिस बिजली-पानी काटना गलत है, लेकिन प्रधानमंत्री आवास के इतने पास ऐसे मामले में सिर्फ़ प्रशासनिक लापरवाही नहीं लगती। कहीं न कहीं कुछ तो बड़ा पेच है जो साफ़ नहीं आ रहा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 घंटे पहले

रोहन, तुम्हारी बात सही है कि पेच हो सकता है, पर क्या सच में बिना नोटिस कनेक्शन काटना कानूनी रूप से सही है?

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