दिल्ली के रेस कोर्स क्लब परिसर में बनी मस्जिद की बिजली और पानी की आपूर्ति अचानक काटे जाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान साफ शब्दों में कहा कि किसी भी संपत्ति की बिजली और पानी का कनेक्शन बिना किसी पूर्व नोटिस के काटा नहीं जा सकता है। इस सिलसिले में हाईकोर्ट ने नई दिल्ली नगरपालिका परिषद यानी एनडीएमसी और दिल्ली वक्फ बोर्ड को औपचारिक नोटिस जारी कर दिया है। दोनों पक्षों से आगामी दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया है, जबकि इस मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को तय की गई है।
बिना नोटिस कार्रवाई पर अदालत का सवाल
न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह अहम टिप्पणी जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने दी, जो मस्जिद के बिजली और पानी की बहाली की मांग से जुड़ी याचिका पर विचार कर रही थी। मस्जिद के इमाम की तरफ से दायर इस याचिका में सिंगल जज की उस बेंच के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें बिजली और पानी के कनेक्शन को बहाल करने की मांग ठुकरा दी गई थी। अदालत ने सुनवाई के दौरान एनडीएमसी से कड़ा सवाल किया कि आखिर बिना कोई नोटिस जारी किए इस तरह से बिजली कैसे काटी जा सकती है।
प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित है मस्जिद
यह विवादित मस्जिद राजधानी दिल्ली के रेस कोर्स क्लब परिसर के भीतर स्थित है। यह पूरा परिसर देश के प्रधानमंत्री आवास के बेहद करीब है और लगभग 53 एकड़ के विशाल भूभाग में फैला हुआ है। याचिका में इस बात की आशंका जताई गई है कि जमीन खाली कराने की चल रही प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान इस मस्जिद को भी ढहाया जा सकता है। याचिका के दस्तावेजों के अनुसार, यह मस्जिद दिल्ली वक्फ बोर्ड के तहत एक अधिसूचित संपत्ति है। इसके अलावा साल 2009 में इस धार्मिक स्थल को ग्रेड-2 हेरिटेज इमारत का दर्जा भी दिया जा चुका है।
केंद्र सरकार का पुराना आश्वासन और आगामी सुनवाई
अदालत के समक्ष मस्जिद की बिजली-पानी काटने और जमीन खाली कराने से जुड़े कई कानूनी पहलू विचाराधीन हैं। इससे पहले इसी साल 29 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया था कि दिल्ली वक्फ बोर्ड के प्रतिवेदन पर चार सप्ताह के भीतर उचित फैसला लिया जाएगा। सरकार की तरफ से यह भी भरोसा दिलाया गया था कि तब तक इस मस्जिद के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या कड़ी कार्रवाई नहीं की जाएगी। अब दो सप्ताह बाद आने वाले जवाबों के बाद 14 दिसंबर को होने वाली अगली सुनवाई में इस मामले पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
























