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उत्तराखंड में थमी भारी बारिश, 21 सितंबर को अधिकतर हिस्सों में धूप खिलने के आसारउत्तराखंड
21 सित॰ 2026, 5:44 am (1 दिन पहले)· 0

उत्तराखंड में थमी भारी बारिश, 21 सितंबर को अधिकतर हिस्सों में धूप खिलने के आसार

उत्तराखंड में मानसून कमजोर पड़ने से अधिकांश इलाकों में मौसम साफ रहने का अनुमान है, जबकि 21 सितंबर को बागेश्वर, चमोली और पिथौरागढ़ में छिटपुट बौछारें गिर सकती हैं।

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में पिछले कई दिनों से जारी भारी वर्षा के सिलसिले पर अब विराम लगता दिखाई दे रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के नवीनतम आकलन के अनुसार, 21 सितंबर को राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क और साफ बना रहेगा। लंबे समय बाद धूप निकलने से स्थानीय नागरिकों, किसानों और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पर्वतीय भूगोल के प्रभाव से चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जनपदों के कुछ सीमित क्षेत्रों में बहुत हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना बनी रहेगी। वहीं देहरादून, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे मैदानी क्षेत्रों में फिलहाल किसी बड़े मौसमी उलटफेर की गुंजाइश नहीं है।

समूचे राज्य में मानसून की सक्रियता में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके कारण बीते 24 घंटों के दौरान भी केवल गिने-चुने स्थानों पर ही छिटपुट वर्षा देखने को मिली। राहत की सबसे अहम बात यह है कि मौसम केंद्र ने 21 सितंबर के लिए राज्य के किसी भी जिले हेतु किसी प्रकार की चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया है। भारी बारिश का दौर थमने से चारधाम यात्रा के मार्गों और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन का बड़ा संकट फिलहाल टल गया है। इससे तीर्थयात्रियों, स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सुरक्षित आवाजाही में काफी सहूलियत मिलेगी। तापमान के मोर्चे पर दिन के समय हल्की गर्माहट देखने को मिल सकती है, जबकि रात होते ही पहाड़ी घाटियों में हल्की गुलाबी ठंडक का अहसास बना रहेगा।

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मैदानी शहरों में खिली रहेगी चटख धूप

राजधानी देहरादून सहित हरिद्वार और ऋषिकेश के मैदानी इलाकों में 21 सितंबर को पूरे दिन मौसम शुष्क और खुला रहेगा। सुबह से ही आसमान साफ रहने और तेज धूप खिलने के आसार हैं, जिससे दिन का तापमान सामान्य स्तर पर या उससे थोड़ा अधिक दर्ज किया जा सकता है। सुबह और देर शाम के समय ठंडी और हल्की हवाएं चलने से वातावरण सुहावना बना रहेगा, हालांकि दोपहर के वक्त थोड़ी उमस लोगों को परेशान कर सकती है। स्थानीय नागरिकों और मैदानी इलाकों में घूमने आए पर्यटकों के लिए बिना किसी रुकावट या जलभराव के बाहर निकलने और रोजमर्रा के कामकाज निपटाने के लिए यह दिन पूरी तरह अनुकूल रहेगा।

पर्वतीय जिलों में हल्की फुहारों की गुंजाइश

चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के कुछ चुनिंदा ऊंचाई वाले इलाकों में 21 सितंबर को स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण आंशिक रूप से बादलों का जमावड़ा हो सकता है। दोपहर बाद अथवा शाम के वक्त इन घाटियों में कहीं-कहीं बहुत हल्की बूंदाबांदी या गरज के साथ हल्की फुहारें पड़ने के संकेत हैं। बदरीनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे यात्रा के दौरान छाता और हल्के ऊनी कपड़े साथ रखें, क्योंकि शाम ढलते ही इन पर्वतीय इलाकों के पारे में तेजी से गिरावट आती है।

प्रमुख पर्यटन स्थलों पर खुशनुमा रहेगा माहौल

सरोवर नगरी नैनीताल, मसूरी, अल्मोड़ा और रानीखेत जैसे विख्यात पर्यटन केंद्रों पर 21 सितंबर को बारिश की कोई विशेष संभावना नहीं जताई गई है। इन इलाकों में आसमान ज्यादातर समय साफ रहेगा और दिनभर बादलों व खिली धूप के बीच हल्की आंखमिचौली चलती रहेगी। वीकेंड के मौके पर पहाड़ों की सैर करने पहुंचे सैलानियों के लिए यह मौसम बेहद सुखद साबित होगा। दूसरी ओर, तराई और मैदानी बेल्ट यानी ऊधम सिंह नगर और पौड़ी गढ़वाल के निचले भूभागों में भी मौसम पूरी तरह सूखा रहेगा, जिससे खरीफ फसलों की देखरेख और खेती से जुड़े अन्य कार्यों में जुटे किसानों को बड़ी सुविधा होगी।

25 और 26 सितंबर से मौसम में फिर हो सकता है बदलाव

मौसम विभाग के आगे के पूर्वानुमान के मुताबिक 22 सितंबर को पूरे राज्य में मौसम पूरी तरह शुष्क और साफ बना रहेगा। इसके बाद 23 और 24 सितंबर को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के कुछ इलाकों में हल्की छिटपुट बारिश दोबारा शुरू हो सकती है। फिर 25 सितंबर से वर्षा का दायरा थोड़ा और विस्तृत होगा, जबकि 26 सितंबर को बागेश्वर, नैनीताल, चम्पावत और पिथौरागढ़ समेत कई जिलों में अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश दर्ज की जा सकती है। फिलहाल राहत की बात यह है कि 24 सितंबर तक मौसम विभाग ने किसी भी तरह की कोई चेतावनी जारी नहीं की है।

सवाल-जवाब

21 सितंबर को उत्तराखंड में मौसम कैसा रहेगा?
राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम पूरी तरह साफ और शुष्क रहेगा, जबकि चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में हल्की बौछारें गिर सकती हैं।
क्या 21 सितंबर के लिए मौसम विभाग ने कोई चेतावनी जारी की है?
मौसम केंद्र ने 21 सितंबर को राज्य के किसी भी जिले के लिए कोई अलर्ट या चेतावनी जारी नहीं की है।
देहरादून और हरिद्वार में कैसा रहेगा मौसम?
देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश के मैदानी इलाकों में दिनभर तेज धूप खिली रहेगी और मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा।
चारधाम यात्रा मार्गों की स्थिति कैसी है?
बारिश रुकने से राजमार्गों पर भूस्खलन का बड़ा खतरा टल गया है, जिससे तीर्थयात्रियों की आवाजाही सुगम हो गई है।
उत्तराखंड में बारिश का अगला दौर कब से शुरू होगा?
23 और 24 सितंबर को पर्वतीय जिलों में हल्की वापसी होगी, जबकि 25 और 26 सितंबर से कई जिलों में बारिश का दायरा बढ़ेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Divya Reddy@divya-reddy·1 दिन पहले

मौसम में सुधार से चारधाम यात्रा के मार्गों पर आवाजाही सुगम होने का सीधा लाभ उन हजारों छात्र-युवाओं और शोधार्थियों को मिलेगा जो फील्ड वर्क या शैक्षणिक दौरों पर पर्वतीय क्षेत्रों में हैं। खासकर भूस्खलन का संकट टलने से विश्वविद्यालयों और संस्थानों के शैक्षणिक कैलेंडर बिना किसी बाधा के समय पर पूरे हो सकेंगे, जो प्रशासनिक और छात्र हितों के लिहाज से एक सकारात्मक कदम है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

उत्तराखंड में भारी बारिश का थमना और अलर्ट का न होना पर्यटन और चारधाम यात्रा के लिए वित्तीय दृष्टिकोण से बेहद सकारात्मक है। परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन का संकट टलने से आपूर्ति श्रृंखला और स्थानीय आतिथ्य व्यवसाय को गति मिलेगी, जिससे राज्य की आर्थिकी को तत्काल संबल प्राप्त होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

मानसून के कमजोर पड़ने और मौसम के साफ होने से न केवल चारधाम यात्रा को सुचारू गति मिलेगी, बल्कि राज्य के पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के रखरखाव और सड़क बहाली के कार्यों में भी तेजी आएगी। आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक मशीनरी को अब आगामी पर्यटक सीजन के लिए अपनी लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने का अवसर मिल गया है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

मौसम साफ होने से चारधाम यात्रा मार्गों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भूस्खलन का संकट फिलहाल टल गया है, जिससे पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियों को यातायात व्यवस्था दुरुस्त रखने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में बड़ी राहत मिलेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

मौसम सुधरने से चारधाम यात्रा के मार्गों पर भूस्खलन का खतरा टलने के साथ ही अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुचारू यातायात प्रबंधन और संभावित भीड़ को नियंत्रित करने की होगी। चूंकि मार्गों पर जलभराव और आवाजाही की रुकावटें हटी हैं, इसलिए संवेदनशील पटरियों पर सुरक्षा बलों की तैनाती और निरंतर निगरानी बनाए रखना बेहद जरूरी होगा ताकि पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की आवाजाही बिना किसी व्यवधान के पूरी हो सके।

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