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उत्तराखंड में तीन तलाक और हलाला पीड़िताओं को वक्फ की जमीन पर मिलेंगे आशियाने, मुख्यमंत्री से मिली मंजूरीउत्तराखंड
24 सित॰ 2026, 10:59 am (43 दिन पहले)· 4

उत्तराखंड में तीन तलाक और हलाला पीड़िताओं को वक्फ की जमीन पर मिलेंगे आशियाने, मुख्यमंत्री से मिली मंजूरी

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और निकाह हलाला से पीड़ित बेसहारा मुस्लिम महिलाओं को अपनी जमीन से आवास मुहैया कराने का फैसला किया है, जिसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हरी झंडी मिल चुकी है।

उत्तराखंड में तीन तलाक और निकाह हलाला जैसी कुप्रथाओं का दंश झेल चुकी बेसहारा मुस्लिम महिलाओं के पुनर्वास के लिए एक अहम पहल शुरू की जा रही है। इस योजना के अंतर्गत पीड़ित महिलाओं को रहने के लिए छत उपलब्ध कराने के मकसद से राज्य का वक्फ बोर्ड अपने लैंड बैंक से आवासीय व्यवस्था तैयार करेगा। इस सामाजिक कल्याणकारी कदम को आगे बढ़ाने के लिए राज्य स्तर पर प्रशासनिक सहमति भी बन चुकी है।

वक्फ की जमीन से आशियाना बनाने की रूपरेखा

योजना के प्रारूप के अनुसार, बेसहारा और प्रताड़ित महिलाओं को सुरक्षित ठिकाना देने के लिए वक्फ बोर्ड के पास उपलब्ध भूखंडों का उपयोग किया जाएगा। कई मामलों में तलाक अथवा हलाला के बाद महिलाओं को सामाजिक बहिष्कार और आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है। इसी बेबसी को दूर करने के लिए बोर्ड की संपत्ति का इस्तेमाल उनके स्थायी आवास निर्माण में करने का खाका तैयार हुआ है।

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मुख्यमंत्री की हरी झंडी और बोर्ड की आगामी बैठक

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस संबंध में औपचारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस योजना को आगे बढ़ाने की अनुमति प्रदान कर दी है। योजना को कानूनी और प्रशासनिक अमलीजामा पहनाने के लिए इसे वक्फ बोर्ड की आगामी बैठक में आधिकारिक प्रस्ताव के रूप में पटल पर रखा जाएगा। बोर्ड की औपचारिक स्वीकृति मिलते ही जमीन के चयन और निर्माण की प्रक्रिया को गति दी जाएगी।

सख्त कानूनों के बीच पुनर्वास की दरकार

राज्य में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद हलाला और तीन तलाक से जुड़े मामलों पर कानूनी शिकंजा कसा है। हाल के महीनों में रुड़की जैसे क्षेत्रों में हलाला प्रताड़ना के मामलों में पुलिस कार्रवाई भी देखने को मिली है। अदालतों ने भी इन प्रथाओं पर गंभीर टिप्पणियां की हैं। ऐसे हालात में कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पीड़िताओं के रहने, खाने और सामाजिक सुरक्षा की जरूरत महसूस की जा रही थी, जिसे पूरा करने की दिशा में यह कदम उठाया जा रहा है।

सवाल-जवाब

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने किन महिलाओं के लिए आवास देने की योजना बनाई है?
यह योजना तीन तलाक और निकाह हलाला से पीड़ित बेसहारा मुस्लिम महिलाओं को आवास उपलब्ध कराने के लिए तैयार की जा रही है।
आवास निर्माण के लिए जमीन कहां से उपलब्ध कराई जाएगी?
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड अपने आधिकारिक लैंड बैंक में मौजूद जमीन का इस्तेमाल इन आवासों के निर्माण के लिए करेगा।
क्या इस प्रस्ताव को सरकार से मंजूरी मिल चुकी है?
वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस योजना के लिए अपनी अनुमति दे दी है।
इस योजना को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी?
इस योजना के आधिकारिक प्रस्ताव को वक्फ बोर्ड की आगामी औपचारिक बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
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टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·42 दिन पहले

पिछले साल जब मैं रुड़की में एक केस की शूटिंग कर रही थी, तब मेरी मुलाक़ात एक ऐसी महिला से हुई थी जिसे तलाक के बाद घर से निकाल दिया गया था। उसे अपनी पाँच साल की बेटी के साथ रातों-रात रिश्तेदार के बरामदे में शरण लेनी पड़ी थी। वक्फ बोर्ड का यह फ़ैसला सुनकर मुझे सच में राहत महसूस हुई कि अब ऐसी बेसहारा औरतों को कम से कम सिर छुपाने के लिए दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी और वे अपनी ज़िंदगी दोबारा शुरू कर सकेंगी।

Ravikash Gupta@ravikash·42 दिन पहले

तीन तलाक और हलाला पीड़िताओं के लिए वक्फ की जमीन पर घर बनाने की पहल वाकई सराहनीय है, लेकिन क्या यह तय हो पाया है कि इसके लिए पात्र महिलाओं की पहचान कैसे की जाएगी?

Arjun Mehta@arjun-mehta·42 दिन पहले

रविकेश भाई, आपकी चिंता जायज है। कुछ साल पहले रुड़की कवर करते समय एक ऐसी ही पीड़िता से मिला था, जिसे घर से निकाल दिया गया था। उम्मीद है पात्रता तय करने का पैमाना साफ और पारदर्शी होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·43 दिन पहले

वक्फ की ज़मीन पर घर देने की बात अच्छी है, पर ज़मीन पर काम सच में उतरेगा या कागज़ों में ही रह जाएगा, ये देखने वाली बात होगी। ऐसी योजनाओं में अक्सर फाइलें ही घूमती रहती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·43 दिन पहले

रोहन, बात तो सही है तुम्हारी। पर ये बता, वक्फ बोर्ड इन महिलाओं की पहचान और पात्रता कैसे तय करेगा, कोई पैमाना तय हुआ है क्या?

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