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वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट तीन हफ्ते बाद करेगा अंतिम सुनवाई, केंद्र ने बताया संसद का अधिकार क्षेत्रभारत
9 सित॰ 2026, 6:01 pm (22 दिन पहले)· 4

वैवाहिक बलात्कार को अपराध बनाने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट तीन हफ्ते बाद करेगा अंतिम सुनवाई, केंद्र ने बताया संसद का अधिकार क्षेत्र

सुप्रीम कोर्ट वैवाहिक बलात्कार को आपराधिक कृत्य घोषित करने की मांग वाली याचिकाओं पर तीन हफ्ते बाद अंतिम सुनवाई शुरू करेगा, जबकि केंद्र सरकार ने इसे पूरी तरह विधायिका के अधिकार क्षेत्र का मामला बताया है।

पति द्वारा पत्नी की असहमति के बावजूद यौन संबंध बनाने को अपराध घोषित करने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर शीर्ष अदालत में तीन हफ्ते बाद विस्तृत सुनवाई होगी। देश की सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस महत्वपूर्ण कानूनी विषय पर अंतिम दलीलों को सुनने के लिए मामले को सूचीबद्ध किया जा रहा है। दूसरी ओर केंद्र सरकार ने अदालत के समक्ष अपना रुख दोहराते हुए कहा कि वैवाहिक बलात्कार को नया अपराध घोषित करना या कानून में बदलाव लाना पूरी तरह से संसद और कार्यपालिका के क्षेत्र में आता है, न कि न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में।

संसद के अधिकार क्षेत्र पर केंद्र की दलील

शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि विवाह के भीतर यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में लाने का निर्णय विधायिका का कार्य है। उन्होंने जोर दिया कि अदालत को इस विषय पर नया वैधानिक प्रावधान तय नहीं करना चाहिए। इस पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस सूर्य कांत कर रहे थे, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने निर्देश दिया कि इस पूरे मामले को तीन सप्ताह पूरा होने के बाद बुधवार और गुरुवार को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

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भारतीय न्याय संहिता के अपवाद पर कानूनी चुनौती

अदालत के समक्ष लंबित यह पूरा विवाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 के अपवाद 2 की संवैधानिकता पर आधारित है। यह कानूनी प्रावधान पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के अंतर्गत मिलने वाले वैवाहिक अपवाद को ही आगे कायम रखता है। इस नियम के अनुसार यदि कोई बालिग पुरुष अपनी पत्नी के साथ उसकी सहमति के बिना भी यौन संबंध बनाता है, तो उसे बलात्कार का अपराध नहीं माना जाता, बशर्ते पत्नी की आयु 18 वर्ष से कम न हो। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह छूट महिलाओं के मौलिक अधिकारों और उनकी शारीरिक अखंडता का उल्लंघन करती है।

अदालत की टिप्पणियां और याचिकाकर्ताओं का तर्क

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने महिलाओं की सुरक्षा और स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण बातें रखीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि विवाह बंधन में बंधने का अर्थ किसी महिला की व्यक्तिगत आजादी का समाप्त हो जाना नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी महिला को उसकी मर्जी के बिना यौन संबंध के लिए मजबूर किया जाता है, तो वह निस्संदेह एक पीड़िता है और अदालत पीड़ितों को संरक्षण प्रदान करेगी। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या राज्य ऐसे कृत्य को बलात्कार मानता है या नहीं। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट करुणा नंदी ने दलील दी कि कोई भी पति वैवाहिक रिश्ते की आड़ लेकर पत्नी को गंभीर शारीरिक क्षति पहुंचाने या उसकी मर्जी के खिलाफ संबंध बनाने की कानूनी छूट का दावा नहीं कर सकता।

दिल्ली हाई कोर्ट के विभाजित फैसले से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

यह कानूनी विवाद साल 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सुनाए गए एक विभाजित फैसले के बाद शीर्ष अदालत पहुंचा था। दिल्ली हाई कोर्ट के दो जजों की पीठ इस मुद्दे पर एकमत नहीं हो सकी थी, जिसके बाद मामला देश की सबसे बड़ी अदालत को भेजा गया। केंद्र सरकार ने इस संबंध में पहले दाखिल अपने हलफनामे में साफ किया था कि वह वैवाहिक बलात्कार को एक पृथक आपराधिक कृत्य बनाने के पक्ष में नहीं है। सरकार का तर्क है कि इसे अपराध घोषित करने से विवाह जैसी सामाजिक संस्था की स्थिरता और उसके ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सरकार के अनुसार ऐसे पारिवारिक मामलों को मौजूदा कानूनी प्रावधानों के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए, न कि इसे सामान्य बलात्कार के अपराध के समतुल्य माना जाए।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट वैवाहिक बलात्कार मामले की अंतिम सुनवाई कब शुरू करेगा?
सुप्रीम कोर्ट तीन हफ्ते पूरे होने के बाद बुधवार और गुरुवार को इस मामले की अंतिम सुनवाई शुरू करेगा।
इस मामले में केंद्र सरकार की क्या दलील है?
केंद्र सरकार का कहना है कि वैवाहिक बलात्कार को अपराध घोषित करने का फैसला संसद और कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि सुप्रीम कोर्ट के।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की किस धारा को चुनौती दी गई है?
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 63 के अपवाद 2 को चुनौती दी गई है, जो 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की पत्नी के साथ पति के गैर-सहमति वाले यौन संबंध को रेप नहीं मानता।
सुनवाई करने वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ में कौन-कौन शामिल हैं?
इस पीठ में चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा?
साल 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा वैवाहिक बलात्कार को अपराध मानने के सवाल पर विभाजित फैसला सुनाए जाने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
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