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वाराणसी में गरजे मुख्यमंत्री योगी, बोले सपा के भर्ती सिंडिकेट ने युवाओं के भविष्य के साथ किया खिलवाड़उत्तर प्रदेश
14 अक्तू॰ 2026, 7:09 pm (14 दिन पहले)· 1

वाराणसी में गरजे मुख्यमंत्री योगी, बोले सपा के भर्ती सिंडिकेट ने युवाओं के भविष्य के साथ किया खिलवाड़

वाराणसी के शिक्षक-स्नातक सम्मेलन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि उनके दौर में भर्तियां केवल एक परिवार और सिंडिकेट तक सीमित थीं। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार आगामी छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र देगी।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित शिक्षक-स्नातक सम्मेलन के मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और उसके बहुचर्चित पीडीए फॉर्मूले पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने विरोधी दल पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस पीडीए की बात की जा रही थी, वह असल में परिवार के विकास और दूसरों के संसाधनों पर कब्जे तक सीमित रह गया है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती शासनकाल में भर्ती प्रक्रियाओं में हुई कथित गड़बड़ियों और हालिया राजनीतिक फैसलों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए।

राज्यसभा उम्मीदवारी और पीडीए नारे पर तीखा तंज

सम्मेलन में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के पीडीए नारे की व्याख्या अपने तरीके से की। उन्होंने कहा कि पहले दिन से ही यह स्पष्ट था कि इनके लिए पीडीए का असली अर्थ परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी या फिर पराया धन अपना है। उन्होंने हालिया राज्यसभा चुनाव में प्रत्याशियों के चयन का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि टिकट वितरण के समय यह सामाजिक न्याय का दावा कहां गायब हो गया था।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि पार्टी ने राज्यसभा के लिए दो उम्मीदवारों को मैदान में उतारा, जिसमें से एक सीट अपने चाचा को दे दी गई। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि प्रतिनिधित्व ही देना था तो काशी, गाजीपुर या बलिया के किसी स्थानीय यादव नेता को अवसर दिया जा सकता था। इसके अतिरिक्त दूसरी सीट पर किसी दलित चेहरे को या फिर अपने पारंपरिक मतदाता वर्ग के किसी मुस्लिम नेता को मौका दिया जा सकता था। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी उम्मीदवारी मुंबई के एक धन्नासेठ को सौंप दी गई, जिससे परिवार के लाभ और धन जुटाने की मंशा पूरी तरह उजागर हो गई।

भर्ती आयोग और पिछली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल

मुख्यमंत्री ने पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान राज्य भर्ती आयोगों की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन का अध्यक्ष अनिल यादव को बनाया गया था, जो इस संवैधानिक पद के योग्य ही नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस प्रशासनिक व्यवस्था में भारी अनियमितताएं हुईं और ऐसे अभ्यर्थी को राज्य लोक सेवा आयोग की परीक्षा में शीर्ष स्थान दिला दिया गया, जिसके हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और बीए में केवल थर्ड डिवीजन अंक आए थे।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उस समय प्रदेश में भारी प्रशासनिक अराजकता और गुंडागर्दी का माहौल था, जिसने लाखों योग्य युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया। उन्होंने तत्कालीन व्यवस्था पर आरोप लगाते हुए कहा कि उस शासन के दौरान हर ओर उपद्रव, दंगे और माफिया गिरोहों का वर्चस्व बना हुआ था, जिससे राज्य की प्रशासनिक विश्वसनीयता पूरी तरह नष्ट हो गई थी।

सैफई सिंडिकेट और चाचा-भतीजा पर गंभीर आरोप

मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सीधे तौर पर आरोप लगाया कि पिछली सरकार के समय रोजगार के अवसरों पर केवल एक खास सिंडिकेट का नियंत्रण था। उन्होंने कहा कि उस शासन में युवाओं की गंभीर दुर्गति हुई क्योंकि व्यवस्था में विकास की कोई गति ही मौजूद नहीं थी। जब किसी व्यवस्था में आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति नहीं होती, तो वहां केवल अव्यवस्था ही जन्म लेती है।

उन्होंने कहा कि उस कालखंड में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण पदों पर एक ही परिवार के करीबी लोगों को बैठाया गया था। उनके अनुसार, पहले अपने कुनबे के जरिए पदों की अधिसूचना निकाली जाती थी और फिर चाचा और भतीजे की जोड़ी वित्तीय वसूली के लिए सक्रिय हो जाती थी। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उस दौर में सैफई सिंडिकेट के दायरे से बाहर के किसी भी सामान्य या प्रतिभाशाली युवा को योग्यता के आधार पर नौकरी नहीं मिल पाती थी।

नौ साल में साढ़े नौ लाख नौकरियां और आगामी लक्ष्य

वर्तमान सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा पेश करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन व्यवस्था के तहत पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश के साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भर्ती की प्रक्रियाएं अब पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित हैं।

समारोह के दौरान नियुक्ति पत्र वितरण के संबंध में पूछे गए सवाल का उत्तर देते हुए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा प्रशासनिक लक्ष्य साझा किया। उन्होंने घोषणा की कि आने वाले छह महीनों के भीतर राज्य सरकार एक लाख और युवाओं को विभिन्न विभागों में निष्पक्ष रूप से सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र वितरित करने जा रही है।

सवाल-जवाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले की क्या व्याख्या की?
उन्होंने पीडीए का अर्थ 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' और 'पराया धन अपना' बताते हुए आरोप लगाया कि यह केवल निजी लाभ तक सीमित रहा है।
सपा सरकार में लोक सेवा आयोग के किस अध्यक्ष का उल्लेख मुख्यमंत्री ने किया?
मुख्यमंत्री ने अनिल यादव का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें अयोग्य होने के बावजूद भर्ती आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था।
पूर्ववर्ती सरकार में भर्ती परीक्षा में टॉप करने वाले अभ्यर्थी को लेकर क्या दावा किया गया?
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उस दौरान हाईस्कूल, इंटर और बीए में थर्ड डिवीजन पाने वाले एक व्यक्ति को लोक सेवा आयोग की परीक्षा में टॉप करा दिया गया था।
पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में कितनी सरकारी नौकरियां देने की बात कही गई?
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले नौ वर्षों में राज्य के साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरियों के नियुक्ति पत्र दिए गए हैं।
अगले छह महीनों के लिए राज्य सरकार ने रोजगार का क्या लक्ष्य रखा है?
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·14 दिन पहले

नेता लोग मंच से युवाओं के भविष्य और नौकरियों की इतनी बात करते हैं, पर ज़मीनी स्तर पर सच में कोई पारदर्शी बदलाव आता है क्या? इतने सालों से वादे सुनते-सुनते उम्र निकल जाती है, इस बार छह महीने में एक लाख नौकरियां मिलने वाली बात सच साबित होगी या बस चुनाव का जुमला बनकर रह जाएगी?

Arjun Mehta@arjun-mehta·14 दिन पहले

योगी जी ने पुरानी भर्तियों पर तो सवाल उठा दिए और अगले छह महीने में नौकरियां देने का वादा भी कर दिया, लेकिन क्या इन नए विज्ञापनों में पेपर लीक रोकने की कोई पुख्ता गारंटी भी तय की गई है?

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

अर्जुन जी, सही सवाल उठाया आपने। वित्तीय बाज़ारों में पारदर्शिता की तरह ही सरकारी भर्तियों में भी जब तक डिजिटल और फूल-प्रूफ सिस्टम नहीं बनता, तब तक सिर्फ वादों से निवेशकों—यानी युवाओं—का भरोसा नहीं लौटता।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

भर्ती घोटालों और भाई-भतीजावाद के मामलों में पहले भी जांच एजेंसियों के सामने कई फाइलें खुली हैं, लेकिन अदालतों में ठोस पैरवी न होने से आरोपी बच निकलते हैं। युवाओं के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ रुकना चाहिए और भ्रष्टाचार के पुराने मामलों में रिकवरी भी होनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

करण भाई, बात बिल्कुल सही है। जब तक घोटालों में सिर्फ बयानबाजी होती रहेगी और कागजों पर रिकवरी नहीं होगी, तब तक युवाओं का भरोसा नहीं लौटेगा।

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