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वाशिम में दो दिनों से गायब महादेव निंबालकर और निकीता कांबले के शव जलाशय से बरामदमहाराष्ट्र
19 अग॰ 2026, 8:52 am (24 दिन पहले)· 2

वाशिम में दो दिनों से गायब महादेव निंबालकर और निकीता कांबले के शव जलाशय से बरामद

महाराष्ट्र के वाशिम जिले स्थित गोकसावंगी के ऊर्ध्व मोर्णा तालाब से 14 अगस्त से लापता 26 वर्षीय महादेव निंबालकर और 19 वर्षीय निकीता कांबले के शव बरामद हुए हैं। पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं पर गहनता से छानबीन कर रही है।

महाराष्ट्र के वाशिम जिले के अंतर्गत आने वाले मालेगांव तालुका स्थित गोकसावंगी इलाके में एक बेहद दुखद और रहस्यमयी घटना सामने आई है। स्थानीय ऊर्ध्व मोर्णा तालाब के पानी में तैरते हुए दो लोगों के शव मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। मृत पाए गए लोगों की पहचान 26 साल के महादेव निंबालकर और 19 साल की निकीता कांबले के तौर पर की गई है। यह दोनों ही गोकसावंगी गांव के निवासी थे और पिछले कुछ दिनों से अचानक अपने घरों से गायब थे। पानी में शव दिखाई देने की खबर जंगल में आग की तरह फैली, जिसके बाद गांव और आसपास के इलाकों में भारी तनाव और शोक का माहौल बन गया।

गुमशुदगी की शिकायत और तलाश का दौर

मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो महादेव निंबालकर और निकीता कांबले 14 अगस्त को अचानक अपने-अपने घरों से गायब हो गए थे। जब काफी समय बीत जाने के बाद भी दोनों वापस नहीं लौटे, तो उनके परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और गांव के परिचितों ने मिलकर आसपास के सभी संभावित स्थानों, खेतों और सड़कों पर उनकी तलाश शुरू की। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों का कोई पता नहीं चल सका। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, परिजनों ने 15 अगस्त को मालेगांव पुलिस थाने पहुंचकर आधिकारिक रूप से दोनों की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामले की कागजी कार्रवाई शुरू की थी।

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मछुआरों की नजर और पुलिस का एक्शन

गुमशुदगी दर्ज होने के बाद भी दोनों का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। इसी दौरान गोकसावंगी शिवार में स्थित ऊर्ध्व मोर्णा जलाशय के पास कुछ स्थानीय युवक मछली पकड़ने के इरादे से पहुंचे थे। जब वे तालाब के किनारे पानी में अपनी गतिविधियों में लगे थे, तभी अचानक उनकी नजर जलाशय के गहरे पानी में तैर रहे दो मानव शवों पर पड़ी। इस भयावह दृश्य को देखते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और युवकों ने तुरंत गांव के लोगों व मालेगांव पुलिस को इस घटना की सूचना दी। जानकारी मिलते ही पुलिस की एक विशेष टीम घटनास्थल पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से दोनों शवों को पानी से बाहर निकलवाया, जहां उनकी शिनाख्त महादेव और निकीता के रूप में हुई।

हत्या या आत्महत्या? पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजरें

शवों की बरामदगी की खबर मिलते ही मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया। दोनों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। फिलहाल इस बात का खुलासा नहीं हो सका है कि दोनों की मौत किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस प्रशासन इस पूरी घटना को बेहद गंभीरता से ले रहा है। मालेगांव पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों ही संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर हर एंगल से जांच आगे बढ़ा रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि 14 अगस्त को गायब होने के बाद दोनों कहां-कहां गए थे और वे जलाशय तक किस प्रकार पहुंचे। पुलिस का कहना है कि मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगा।

हालिया घटनाओं से उठते सवाल

गौरतलब है कि हाल ही में देश के अन्य हिस्सों से भी इस तरह के संदेहास्पद मामले सामने आए हैं। कुछ समय पहले दिल्ली के बुराड़ी इलाके में भी एक किराए के मकान के बंद कमरे से युवक और युवती के खून से लथपथ शव बरामद किए गए थे। उस मामले में 26 वर्षीय युवक और 22 वर्षीय युवती कमरे के अंदर मृत पाए गए थे, जो लगभग एक महीने से वहां किराए पर रह रहे थे। दिल्ली वाली घटना में पुलिस को मौके से एक पिस्टल भी मिली थी और मामले का खुलासा तब हुआ था जब युवक की बहन मकान पर पहुंची और दरवाजा अंदर से बंद पाया था। वाशिम की इस ताजा घटना ने एक बार फिर ऐसे मामलों में सुरक्षा और पुलिस जांच की गहराई पर ध्यान केंद्रित कर दिया है, जहां मालेगांव पुलिस पूरी मुस्तैदी से सुराग जुटाने में लगी है।

सवाल-जवाब

वाशिम के ऊर्ध्व मोर्णा तालाब में किनके शव बरामद हुए हैं?
तालाब से गोकसावंगी गांव निवासी 26 वर्षीय महादेव निंबालकर और 19 वर्षीय निकीता कांबले के शव मिले हैं।
दोनों युवक-युवती कब से लापता चल रहे थे?
महादेव और निकीता 14 अगस्त को अचानक लापता हुए थे, और उनके परिजनों ने 15 अगस्त को मालेगांव पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।
तालाब में तैरते शवों के बारे में सबसे पहले किसने जानकारी दी?
गोकसावंगी शिवार स्थित ऊर्ध्व मोर्णा तालाब में मछली पकड़ने पहुंचे स्थानीय युवकों ने शवों को देखा और तुरंत ग्रामीणों व पुलिस को सूचित किया।
मौत का कारण जानने के लिए पुलिस क्या कदम उठा रही है?
मालेगांव पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों एंगलों से जांच कर रही है। मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।
लेख में दिल्ली की किस घटना का उल्लेख किया गया है?
लेख में दिल्ली के बुराड़ी की घटना का संदर्भ दिया गया है, जहां किराए के कमरे से 26 वर्षीय युवक और 22 वर्षीय युवती के खून से लथपथ शव तथा एक पिस्टल बरामद हुई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·23 दिन पहले

वाशिम के इस ऊर्ध्व मोर्णा जलाशय मामले में पुलिस की प्राथमिकता यह साबित करना होगी कि यह सुनियोजित अपराध था या दुखद कदम। 14 अगस्त की गुमशुदगी से लेकर शव मिलने तक के हर घंटे का डिजिटल और भौतिक रूट मैप खंगालना इस पहेली को सुलझाने की कुंजी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही तय होगा कि आगे की आपराधिक जांच किस दिशा में बढ़ेगी।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·23 दिन पहले

वाशिम के इस मामले में पुलिस के सामने मुख्य चुनौती यह स्पष्ट करना है कि यह हत्या थी या आत्महत्या। 14 अगस्त से शव मिलने तक के घटनाक्रम का डिजिटल और भौतिक रूट मैप तैयार करना, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के निष्कर्ष ही यह तय करेंगे कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·23 दिन पहले

वाशिम की यह घटना ग्रामीण भारत में मानसिक स्वास्थ्य संकट, सामाजिक दबाव और युवा वर्ग में बढ़ती अनिश्चितता की एक गंभीर बानगी पेश करती है। पुलिस की जांच हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं पर केंद्रित है, लेकिन इस मामले में तकनीकी साक्ष्य जैसे कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स और जियो-लोकेशन मैपिंग से ही अंतिम सच सामने आ सकेगा। आर्थिक व सामाजिक तनाव के दौर में ऐसे मामलों का बढ़ना स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक व मनोवैज्ञानिक परामर्श तंत्र की कमी को उजागर करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 दिन पहले

मालेगांव पुलिस के लिए यह मामला अब केवल गुमशुदगी से आगे बढ़कर गंभीर फोरेंसिक जांच का बन गया है। 14 अगस्त से जलाशय से शव मिलने तक के बीच के घंटों का डिजिटल और कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालना सबसे बड़ी चुनौती होगी। विसरा रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के निष्कर्ष ही यह तय करेंगे कि यह सुनियोजित अपराध था या कोई अन्य दुखद कदम, क्योंकि जल निकायों में मिले शवों के मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य सबसे अहम होते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·23 दिन पहले

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते सामाजिक तनाव और आपसी संबंधों के जटिल पहलुओं को उजागर करती है। पुलिस के लिए यह आवश्यक है कि वह केवल कॉल रिकॉर्ड तक सीमित न रहे, बल्कि फोरेंसिक साक्ष्यों और अंतिम समय की गतिविधियों को जोड़कर सच तक पहुंचे। इस तरह के मामलों में त्वरित और पारदर्शी जांच ही क्षेत्र में फैल रही अफवाहों को रोक सकती है और न्याय सुनिश्चित कर सकती है।

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